लॉकडाउन: पिता की तेरहवीं पर भोज की जगह बांटे मास्क और सैनेटाइजर, भूखों को खिलाया खाना
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मिर्जापुर जिले के अहरौरा क्षेत्र के रवानी टोला निवासी उमाशंकर प्रजापति ने कोरोना वायरस के कहर के बीच एक अलग नजीर पेश की। उन्होंने अपने पिता दीनानाथ प्रजापति की तेरहवीं पर भोज न कर भूखे और जरूरतमंदों को ही भोजन कराया। साथ ही लॉकडाउन का ध्यान रखते हुए उनको पैकेट बंद भोजन दिया।
इतना ही नहीं उन्होंने कोरोना के जंग में अपनी सहभागिता करते हुए लगभग पांच सौ लोगों को मास्क व सैनिटाइजर का भी वितरण किया। उनके इस अनोखे कार्य की क्षेत्र में चर्चा है।
उमाशंकर के पिता दीनानाथ की जब मृत्यु हुई थी तो उस समय लॉकडाउन नहीं था। जब तेरहवीं के भोज की चर्चा हुई तो उन्होंने देश व समाज की स्थिति को देखते हुए अपना कर्तव्य निर्धारित किया। उन्होंने निर्णय लिया कि भीड़ जुटाकर लोगों को भोजन कराने से बेहतर है कि परिस्थिति के चलते जो लोग इस समय भूख के शिकार हो रहे हैं, उनको भोजन उपलब्ध कराया जाए और कोरोना से लड़ने के लिए उन्होंने मास्क व सैनिटाइजर का भी वितरण किया।
उनके पिता भी समाज सेवा में लगे थे। उमाशंकर ने त्रयोदशाह संस्कार में ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद मलीन बस्ती के गरीबों में भोजन वितरित कर दिया। उमाशंकर प्रजापति ने बताया कि बूढ़ादेई, रवानी टोला, पट्टी कला सहित अन्य इलाकों में रह रहे गरीबों के बीच भोजन का वितरण कराया गया है। त्रयोदशाह कार्यक्रम के दिन गरीबों को भोजन कराने के बाद उनको आत्मीय सुख की अनुभूति हुई है।
विद्यालय के लिए दान मे दे दी कीमती भूमि
उमाशंकर के पिता दीनानाथ प्रजापति ने अपने जीवन काल में ही तकरीबन आठ बिस्वा लबे रोड की भूमि शिक्षा मंदिर के लिए दान मे दे दी थी। वर्तमान समय में इस भूमि की अनुमानित कीमत करोड़ों में आंकी गई है। आज क्षेत्र के बच्चे इस भूमि पर निर्मित विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।