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कोरोना ने रोकी संगीत की बहार, कलाकारों का हाल बेहाल
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केस 1 : परिवार का पेट पालना मुश्किल
लोककला के मंच पर जब वह संगत करते थे तो श्रोता और कलाकार भी झूम उठते थे। कोरोना संक्रमण काल की दूसरी लहर ने तो हाथ ऐसे बांध दिए कि अब परिवार का पेट पालना भी मुश्किल है। जिन हाथों से मां सरस्वती की आराधना की है, उन हाथों को लक्ष्मी के लिए दूसरों के सामने कैसे फैला सकते हैं। काशी के बड़े कलाकारों को जब उनकी हालत की जानकारी हुई तो वह मदद के लिए पहुंच गए। साथी कलाकारों का यह प्रयास देखकर आंखें जब छलकीं तो हर शख्स की आंखों से आंसू छलक पड़े।
केस 2 : दूसरी लहर में टूट गई उम्मीद
काशी के एक ऐसे ही कलाकार हैं जो दो सालों से महामारी के कारण परेशान हैं। कोरोना की दूसरी लहर क्या आई बंधी-बंधाई उम्मीद भी टूट गई। किसी तरह हिम्मत करके अपने साथी कलाकार के पास पहुंचे और अपना दर्द बयां किया। साथी कलाकार भी उनका दर्द सुनकर रो पड़ा। कलाकार ने अपने साथी की हरसंभव मदद की और हिम्मत भी बंधाई। यह तो महज बानगी भर है। कलाकारों के अनुरोध पर हम उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं बस उनके मन के भाव और स्थितियों को बताने का प्रयास है।
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। कोरोना संक्रमण ने संगीत की दुनिया के सारे सुर थाम लिए हैं। न साज है न आवाज है और न ही मंच पर होने वाली रौनक नजर आती है। पिछले साल से चल रही संगीत जगत और कलाकारों की बदहाली जारी है। शास्त्रीय संगीत जगत हो, भोजपुरी संगीत या लोकसंगीत। हर जगह हर कलाकार की एक जैसी कहानी है।
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दूसरी लहर ने तो लोक कलाकारों की कमर तोड़कर रख दी है। हालत ऐसी हो गई है कि कलाकारों की रोजी रोटी चलना मुश्किल है। संगीत ने जो रुतबा, सम्मान और शोहरत दी है उसको देखते हुए यह कलाकार तो किसी से मदद भी नहीं मांग पा रहे हैं। पिछले साल तो जैसे-तैसे कट गया था, लोक कलाकार सोच रहे थे कि अब स्थितियां सुधरेंगी, लेकिन तब तक कोरोना की दूसरी लहर ने तो उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कोरोना के मुश्किल समय में इन तक कोई सरकारी योजना नहीं पहुंची। ये किसी योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
कलाकारों के सामने भुखमरी से हालात
कला और संस्कृति की बातें तो बहुत होती है, लेकिन कोरोना काल ने हकीकत से रूबरू करा दिया। जो कलाकार सरकारी कार्य या व्यवसाय से जुड़े हैं उनके लिए तो मुश्किलें कम हैं, लेकिन जो सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर ही आश्रित रहा करते थे उनके सामने भुखमरी जैसे हालात हैं। -कन्हैया दुबे के डी, गीतकार
कलाकारों की कोई सुनने वाला नहीं
कलाकारों की कोई सुनने वाला नहीं है। धार्मिक आयोजनों में भजन कीर्तन के कार्यक्रम से हम लोगों का परिवार पलता है, लेकिन पिछले साल से ही सब कुछ बंद चल रहा है। हमारे बीच से चुनकर सांसद और विधायक बने कलाकार भी हमारी बातों को सरकार के सामने नहीं रखते हैं।-डॉ. अमलेश शुक्ला, लोक गायक
परिवार चलाना हो गया है मुश्किल
कोरोना संक्रमण काल में कलाकारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कलाकारों की आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। ऐसे में तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है। समय रहते सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो कलाकारों की स्थितियां बहुत ज्यादा गंभीर हो जाएंगी।-स्नेहा अवस्थी, लोक गायिका
घर पर बैठे हैं कलाकार, कैसे चलेगा परिवार
देश की सांस्कृतिक राजधानी में कलाकारों की माली हालत ज्यादा खराब हो चुकी है। संगत कलाकारों की स्थिति तो बयान करने वाली नहीं है। वह कैसे अपना घर चला रहे हैं वहीं जानते हैं। समय रहते हालात नहीं सुधरे तो उनके सामने भीख मांगने तक की नौबत भी आ सकती है।-प्रियंका पांडेय, गायिका
कोई नहीं सोच रहा कलाकारों के बारे में
कोरोना संक्रमण काल में कलाकारों के बारे में तो कोई नहीं सोच रहा है। पिछले साल से ही सभी आयोजन निरस्त चल रहे हैं। सीजन में प्रतिदिन कुछ न कुछ कमा लेते थे, जिससे परिवार का गुजारा हो जाता था, लेकिन इस वक्त दो जून की रोटी को परिवार मोहताज हो चुका है। -संतोष मौर्य, की बोर्ड कलाकार, ढेलवरिया
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लोककला के मंच पर जब वह संगत करते थे तो श्रोता और कलाकार भी झूम उठते थे। कोरोना संक्रमण काल की दूसरी लहर ने तो हाथ ऐसे बांध दिए कि अब परिवार का पेट पालना भी मुश्किल है। जिन हाथों से मां सरस्वती की आराधना की है, उन हाथों को लक्ष्मी के लिए दूसरों के सामने कैसे फैला सकते हैं। काशी के बड़े कलाकारों को जब उनकी हालत की जानकारी हुई तो वह मदद के लिए पहुंच गए। साथी कलाकारों का यह प्रयास देखकर आंखें जब छलकीं तो हर शख्स की आंखों से आंसू छलक पड़े।
केस 2 : दूसरी लहर में टूट गई उम्मीद
काशी के एक ऐसे ही कलाकार हैं जो दो सालों से महामारी के कारण परेशान हैं। कोरोना की दूसरी लहर क्या आई बंधी-बंधाई उम्मीद भी टूट गई। किसी तरह हिम्मत करके अपने साथी कलाकार के पास पहुंचे और अपना दर्द बयां किया। साथी कलाकार भी उनका दर्द सुनकर रो पड़ा। कलाकार ने अपने साथी की हरसंभव मदद की और हिम्मत भी बंधाई। यह तो महज बानगी भर है। कलाकारों के अनुरोध पर हम उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं बस उनके मन के भाव और स्थितियों को बताने का प्रयास है।
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अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। कोरोना संक्रमण ने संगीत की दुनिया के सारे सुर थाम लिए हैं। न साज है न आवाज है और न ही मंच पर होने वाली रौनक नजर आती है। पिछले साल से चल रही संगीत जगत और कलाकारों की बदहाली जारी है। शास्त्रीय संगीत जगत हो, भोजपुरी संगीत या लोकसंगीत। हर जगह हर कलाकार की एक जैसी कहानी है।
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दूसरी लहर ने तो लोक कलाकारों की कमर तोड़कर रख दी है। हालत ऐसी हो गई है कि कलाकारों की रोजी रोटी चलना मुश्किल है। संगीत ने जो रुतबा, सम्मान और शोहरत दी है उसको देखते हुए यह कलाकार तो किसी से मदद भी नहीं मांग पा रहे हैं। पिछले साल तो जैसे-तैसे कट गया था, लोक कलाकार सोच रहे थे कि अब स्थितियां सुधरेंगी, लेकिन तब तक कोरोना की दूसरी लहर ने तो उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कोरोना के मुश्किल समय में इन तक कोई सरकारी योजना नहीं पहुंची। ये किसी योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
कलाकारों के सामने भुखमरी से हालात
कला और संस्कृति की बातें तो बहुत होती है, लेकिन कोरोना काल ने हकीकत से रूबरू करा दिया। जो कलाकार सरकारी कार्य या व्यवसाय से जुड़े हैं उनके लिए तो मुश्किलें कम हैं, लेकिन जो सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर ही आश्रित रहा करते थे उनके सामने भुखमरी जैसे हालात हैं। -कन्हैया दुबे के डी, गीतकार
कलाकारों की कोई सुनने वाला नहीं
कलाकारों की कोई सुनने वाला नहीं है। धार्मिक आयोजनों में भजन कीर्तन के कार्यक्रम से हम लोगों का परिवार पलता है, लेकिन पिछले साल से ही सब कुछ बंद चल रहा है। हमारे बीच से चुनकर सांसद और विधायक बने कलाकार भी हमारी बातों को सरकार के सामने नहीं रखते हैं।-डॉ. अमलेश शुक्ला, लोक गायक
परिवार चलाना हो गया है मुश्किल
कोरोना संक्रमण काल में कलाकारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कलाकारों की आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। ऐसे में तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है। समय रहते सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो कलाकारों की स्थितियां बहुत ज्यादा गंभीर हो जाएंगी।-स्नेहा अवस्थी, लोक गायिका
घर पर बैठे हैं कलाकार, कैसे चलेगा परिवार
देश की सांस्कृतिक राजधानी में कलाकारों की माली हालत ज्यादा खराब हो चुकी है। संगत कलाकारों की स्थिति तो बयान करने वाली नहीं है। वह कैसे अपना घर चला रहे हैं वहीं जानते हैं। समय रहते हालात नहीं सुधरे तो उनके सामने भीख मांगने तक की नौबत भी आ सकती है।-प्रियंका पांडेय, गायिका
कोई नहीं सोच रहा कलाकारों के बारे में
कोरोना संक्रमण काल में कलाकारों के बारे में तो कोई नहीं सोच रहा है। पिछले साल से ही सभी आयोजन निरस्त चल रहे हैं। सीजन में प्रतिदिन कुछ न कुछ कमा लेते थे, जिससे परिवार का गुजारा हो जाता था, लेकिन इस वक्त दो जून की रोटी को परिवार मोहताज हो चुका है। -संतोष मौर्य, की बोर्ड कलाकार, ढेलवरिया