फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Corona effect Mahaviri flag julus will not come out for first time in 110 years Spanish flu also could not stop it in ballia

कोरोना का असर: 110 सालों में पहली बार रुका ये जुलूस, स्पेनिश फ्लू भी नहीं रोक पाया था इसे

Wed, 29 Jul 2020 03:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 29 Jul 2020 03:02 PM IST
विज्ञापन
Corona effect Mahaviri flag julus will not come out for first time in 110 years Spanish flu also could not stop it in ballia
महावीरी झंडा जुलूस (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

हर साल सावन की पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में निकलने वाला ऐतिहासिक महावीरी झंडा जुलूस पिछले 110 वर्षों में पहली बार नहीं निकलेगा। इसका कारण कोरोना संक्रमण को लेकर धार्मिक आयोजनों पर लगाई गई रोक है। इस बार शहर के विभिन्न अखाड़ों ने जिला प्रशासन के अनुरोध पर जुलूस नहीं निकालने का फैसला लिया है।

विज्ञापन

महावीरी झंडा जुलूस के इतिहास को लेकर शोधकर्ता व साहित्यकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय बताते हैं कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की असफलता के बाद 1887 तक आजादी की आग ठंडी पड़ी रही थी। लेकिन देश धीरे-धीरे जाग रहा था। बंगाल में महर्षि अरविंद घोष और उनके छोटे भाई वारीन्द्र घोष, बिहार के मुजफ्फरपुर में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चन्द्र का उत्सर्ग युवाओं को उद्वेलित कर रहा था।
विज्ञापन



बलिया के ठाकुर जगन्नाथ सिंह को बम्बई (मुंबई) से निकलने वाले साप्ताहिक अखबार जमशेद के माध्यम से पता चला कि जार्ज पंचम की दिल्ली में होने वाली ताजपोशी की खुशी में लोकमान्य तिलक मांडले जेल से छोड़ दिए जायेंगे। गवर्नमेंट स्कूल में सभी विद्यार्थियों को बताया गया कि सभी लोग आठ-आठ आना पैसा जमा करेंगे, जिसके एवज में उन्हें जार्ज पंचम की ताजपोशी का तगमा दिया जाएगा और मिठाई मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

ठाकुर साहब ने अठन्नी तो जमा कर दी, लेकिन उनके दिलों-दिमाग में विद्रोह की आग जल पड़ी थी। तब शहर के आदित्य राम मंदिर में विद्यार्थी परिषद की बैठक हुई। बैठक में पं. हृदय नारायण तिवारी, मुनीश्वर मिश्र, केदारनाथ उपाध्याय, शिवदत्त तिवारी, नंदकिशोर चौबे और पं. परशुराम चतुर्वेदी (जो बाद में ख्यातलब्ध साहित्यकार हुए) सहित कुल 35 छात्र शामिल हुए। यहीं जार्ज पंचम की ताजपोशी का विरोध करने और महाबीरी झण्डा जुलूस निकालने की योजना बनी, जो अब तक कायम थी।

1942 में दमन के बाद भी 1943 में निकला था जुलूस
कौशिकेय ने बताया कि 1910 में पहली बार जुलूस निकाला गया। आजादी के आन्दोलन की कोख से निकले महाबीरी झंडा जुलूस को सौ साल पहले 1920 में आई वैश्विक आपदा स्पेनिश फ्लू भी नहीं रोक पाई थी। ब्रिटिश शासन के दौरान भी बलियावासी अपनी परंपरा को कायम रखने सफल रहे थे।

उस समय जुलुस में कोई झांकी नहीं होती थी, केवल महाबीरी झंडा लेकर लोग सड़कों पर निकलते थे। 1942 की अगस्त क्रांति के बाद ब्रिटिश फौज ने बलिया जिले में बहुत क्रूरता से दमनात्मक कार्रवाई की, लेकिन उसके अगले साल भी 1943 में महाबीरी झण्डा निकालने की इजाजत देनी पड़ी।

सात दिन तक सड़क पर जमा रहा जुलुस
जंग-ए-आजादी के इस जुलुस ने अनेक झंझावात भी झेले हैं। 1968 में हुए पथराव और गोलीबारी में चार लोग मारे गए थे। 1990 में यह जुलुस सात दिनों तक सड़कों पर खड़ा रहा। 2005 में तीन दिन तक भगवान महावीर की पूजा अर्चना होती रही। लेकिन यह पहला अवसर है, जब वैश्विक महामारी के कारण ऐतिहासिक जुलुस नहीं निकल पाएगा।

लॉकडाउन के कारण नहीं हो पाई तैयारी
कौशिकेय बताते हैं कि इस बार जुलूस नहीं निकालने के पीछे कई कारण हैं। एक तो जिला प्रशासन ने अनुरोध किया था। दूसरा इसके लिए व्यापक तैयारी की जाती है। लाकडॉउन के कारण जिले के सभी बाजार बंद होने से तैयारी नहीं हो पाई। इस समय लोगों के पास पैसों का भी अभाव है। चंदा की वसूली नहीं हो पाने से मूर्तियों का निर्माण नहीं हो पाया है। अखाड़ों में खेलने वाले बच्चों का महीनों पहले से होने वाला अभ्यास भी नहीं हो पाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed