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कोरोना काल में संसाधन बढ़े, नहीं कम हुईं चुनौतियां

Tue, 25 Aug 2020 01:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 01:06 AM IST
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corona
बहुत कुछ बदला... बदल भी रहा है...। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए बीते मार्च महीने में जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन घोषित किया गया तो एकबारगी ऐसा लगा कि जैसे जिंदगी ठहर सी गई है। चौबीसों घंटे गुलजार रहने वाली काशी की गलियां, घाट और मंदिर सूने हो गए। इस बीच घरों में कैद लोगों के कई अपने असमय ही काल के गाल में भी समा गए। काम-धंधा बंद होने से खाली बैठे लोग खासे हताश भी हुए। किसी को देखते ही बढ़ कर हाथ मिलाना और गले मिलना तो जैसे पुराने जमाने की बात हो गई। लोग अपनों के घर जाने और मुलाकात से ही कतराने लगे। सैनिटाइजर, हैंडवाश और मास्क जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गए। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लास और वेबिनार जैसी चीजें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ गईं। इस तरह से इस कोरोना काल में बहुत कुछ बदल गया और रोजाना बदल भी रहा है। इन पांच महीनों में क्या बदला और क्या बदल रहा है, प्रस्तुत है एक रिपोर्ट...!
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वाराणसी। कोरोना काल मे कोरोना मरीजो के बेहतर इलाज के लिए संसाधन तो बढ़ाए जा रहे है।शासन-प्रशासन स्तर से निगरानी भी हो रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियां कम नही हो रही हैं। जहा एक ओर नए मरीज मिलते जा रहे हैं वही मरने वालों का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा असपतालो में देखभाल न करने सहित अन्य लापरवाही भी सामने आती जा रही हैं। कोरोना काल मे मार्च से लेकर अब तक 6776 मरीजो में सबसे ज्यादा अगस्त महीने में ही अब तक 3972 मरीज मिल चुके हैं जबकि कुल 124 मौत में इस महीने में अब तक 67 मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग अब संक्रमण पर नियंत्रण में लगा हुआ है। कोरोना काल में जिस तरह की चुनौतियां स्वास्थ विभाग के सामने बड़ी हैं अब उससे निपटने के लिए नई रणनीति पर काम चल रहा है। बिना लक्षण वाले होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजो की सेहत की लगातार मानिटरिंग न करने,रिपोर्ट में देरी तो अस्पताल में इलाज में लापरवाही, अधिक धनराशि की शिकायतें भी आ रही है। लाख प्रयास के बाद सैम्पल की जांच रिपोर्ट भी लोगो को समय से नही मिल पा रही है। किसी को चार तो कही पांच से छह दिन लग जाए रहा है। इसके बाद भी 11 हजार सैम्पल का बैकलॉग है।
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कोविड सेंटर से हो रही निगरानी, शासन की विशेष नजर
कोरोना मरीजों की निगरानी पहले से अब बढ़ा दी गई है। इसके लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम के डोर टू डोर जाने के साथ ही सिगरा कोविड कमांड कंट्रोल सेंटर मरीजों की सेहत के बारे में रोजाना मोनिटरिंग की जा रही है। इसमे असपतालो में भर्ती मरीजो से भी बात लर फीडबैक लिया जा रहा है। उधर काशी में संक्रमण नियंत्रण को लेकर शासन की विशेष नजर है। मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री के दौरे के साथ ही पीजीआई, केजीएमयू ले विशेषज्ञ डॉक्टरो की टीम भी आ चुकी है। अपर मुख्य सचिव भी समय समय पर दौरा कर निर्देश देते रह रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी फीडबैक लिया जा रहा है।
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21 मार्च को मिला था पहला कोरोना मरीज
जिले में 21 मार्च को जिले में पहला कोरोना मरीज मिलने के बाद शुरुआती दिनों में तो मरीज कम मिल रहे थे। जैसे-जैसे समय बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अब तक अगर 5 महीने की आंकड़ों की बात करें तो 21 मार्च से 30 मई तक केवल 182 मरीज मिले थे जबकि जून महीने में 314 नए मरीज सामने आए। हालांकि जुलाई महीने में 2271नए मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है। अगस्त में नए मरीजो का ग्राफ बढ़कर 3972 पहुंच गया है।
कोरोना काल में अब तक की स्थिति
21 मार्च से 30 मई- 182 मरीज-चार मौत।
जून माह-314 मरीज-15 मौत।
जुलाई-2271 मरीज 38 मौत
अगस्त--3972मरीज-67 मौत
ऐसे दूर होंगी चुनौतियां
-सैम्पल जांच की क्षमता बढ़ाना।
- समय पर पॉजिटिव मरीजों को भर्ती करना
- और कांटेक्ट ट्रेसिंग वालो का सैंपल लेना
-गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त बेड, चिकित्सक, आईसीयू की सुविधा।
-सर्विलांस अभियान में मिलने वाले मरीजो की जांच।
-कोविड हॉस्पिटलों की लगातार मॉनिटरिंग।
-मृत्यु दर को कम करना और रिकवरी रेट बढाना।
कोरोना के चलते निगम के रूटीन काम में जुड़ा सैनिटाइजेशन
वाराणसी। कोरोना के चलते नगर निगम के रूटीन काम में सैनिटाइजेशन अतिरिक्त जुड़ गया है। जो बीते पांच महीने से लगातार किया जा रहा है। कोविड-19 के तहत सैनिटाइजेशन का कार्य कराया जा रहा है। सभी वार्डों को 3 जोन में बांटा गया है। नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया कि हॉटस्पॉट वाले इलाकों में दो बार सैनिटाइजेशन किया गया। नगर प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा एंटी लार्वा स्प्रे का उचित प्रबंधन किया गया। जिन दिनों में आर्द्रता कम होगी उन दिनों में सघन फागिंग भी करवाई जानी है। इसके लिए 24 मशीनें लगाई गई है। वैज्ञानिक तरीके से साइकिल को तोड़ने के लिए प्रत्येक जगह का एंटी लार्वा स्प्रे से छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए विशेष कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
दावा बेहतर सुविधाओं का, हकीकत में बढ़ रही लापरवाही
वाराणसी। केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल पर बीएचयू कैंपस में 430 बेड के सुपरस्पेशियलिटी कांप्लेक्स को बनाया गया था। यहा इलाज शुरू हुआ तो लेकिन जिस तरह से लापरवाही पर लापरवाही सामने आती जा रही है उससे कहीं ना कहीं बीएचयू की साख पर धब्बा भी लग रहा है। कभी मरीजों के इलाज में लापरवाही का मामला तो कभी कोरोना मरीज की मौत के बाद शव बदलने का मामला हो या फिर कोरोना वार्ड में भर्ती मरीजों के यहां से भाग जाने और अब आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज के कूदकर जान देने का मामला। हर बार अस्पताल प्रबंधन की ओर से बेहतर सुविधाओं का दावा भी किया जाता है लेकिन घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। कोरोना काल में गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बीएचयू सुपरस्पेशियलिटी काम्प्लेक्स को लेवल थ्री का अस्पताल बनाया गया है । यहां न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों के भी गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
अगस्त की बात करें तो 9 अगस्त को बिहार निवासी कोरोना मरीज के भाग जाने की घटना के बाद सही तरीके से मरीजों का देखभाल करने का दावा अस्पताल प्रबंधन ने किया था। इसके बाद 12 अगस्त को कोरोना मरीज की मौत के बाद उसका शव बदलने की घटना से भी खूब किरकिरी हुई है। 22 अगस्त को डाफी निवासी कोरोना मरीज के आइसोलेशन वार्ड से भागने की घटना सामने आने के बाद भी हड़कंप मचा है। अभी इस पूरे प्रकरण पर जांच शुरू भी नहीं हुई थी कि 23 अगस्त को ही रात में फूलपुर के कैथौली निवासी कोरोना मरीज ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी।
मानवाधिकार आयोग कर रहा है शिकायतों की जांच
आदमपुर के प्रह्लादघाट निवासी स्टूडियो संचालक के 20 जुलाई को एंबुलेंस से बीएचयू पहुंचने के बाद समय से बेड न मिलने और 21 जुलाई को उनकी मौत के मामले में क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राहुल सिंह की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है। शिकायत दर्ज करने के बाद अब मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी से पूरे मामले पर जवाब तलब किया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल जांच कर रहे हैं और शिकायतकर्ता राहुल सिंह ने अपना बयान भी दर्ज कराया है।
मुख्यमंत्री समेत अन्य अधिकारियों ने दिया था निर्देश
पछले दिनों बीएचयू सेंट्रल ऑफिस में अधिकारियों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री ने मरीजों का सही तरीके से देखभाल करने और समय-समय पर जांच आदि अन्य सुविधाओं को मुहैया कराने का भी निर्देश अधिकारियों को दिया था। इसके अलावा समय-समय पर कुलपति के साथ बैठक कर कमिश्नर दीपक अग्रवाल और जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा भी इसी बात पर जोर दे रहे हैं कि अधिक से अधिक सुविधा मरीजों को मिले और कोई परेशानी न हो।
भगवान के दरबार में भक्तों का टोटा
वाराणसी। भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी। राजराजेश्वर स्वरूप में यहीं विराजते हैं श्री काशी विश्वनाथ। द्वादश ज्योर्तिलिंग में प्रमुख स्वर्णमंडित शिखरों से युक्त बाबा के मंदिर में बारहों महीने भक्तों की कतार लगी रहती है। 24 मार्च के जनता कर्फ्यू और कोरोना महामारी ने हालात बदल दिए हैं। अनलॉक में भी भक्तों की संख्या गिनती की ही रह गई है। सुगम दर्शन की ऑनलाइन बुकिंग भी पूरी तरह से हो रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाली विश्वनाथ गली में भी सन्नाटा है। शहर के प्रमुख मंदिरों का भी यही हाल है। हालांकि संकटमोचन, दुर्गामंदिर समेत कई मंदिर व शिवालय में आम भक्तों का प्रवेश बंद हैं। जैन समुदाय ने भी पर्युषण पर्व में मंदिरों के कपाट आम श्रद्धालुओं केलिए नहीं खोले। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में जहां पहले सामान्य दिनों में 30 से 35 हजार भक्त दर्शन-पूजन करते थे वहीं अब यह आंकड़ा सैकड़े में भी नहीं पहुंच रहा है।
बात करें सावन में तो मात्र 50 हजार भक्तों ने ही बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। सावन के सोमवार पर जहां डेढ़ से दो लाख भक्त पहुंचते थे वहीं इस बार यह संख्या तीन से चार हजार ही रही।
कोरोना के चलते प्रभावित ढाई हजार करोड़ की योजनाओं ने पकड़ी रफ्तार
वाराणसी। कोरोना के चलते प्रभावित ढाई हजार करोड़ की योजनाओं ने रफ्तार पकड़ ली है। लॉकडाउन की वजह से सबकुछ बंद था। यहां तक की विकास कार्य को भी रोक दिया गया था। पीएम के संसदीय क्षेत्र में कार्यदायी संस्थाओं ने अब इन परियोजनाओं का काम फिर से शुरू हो गया है।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता एसके अग्रवाल ने बताया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, कैंट-पड़ाव फोरलेन, चितईपुर-अखरी मार्ग चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बताया कि इस समय बेहतर गति से काम चल रहा है।
80 फीसदी औद्योगिक इकाईयों में हो रहा काम, शत प्रतिशत मिलने लगा आर्डर
वाराणसी। कोरोना काल में औद्योगिक इकाइयों की स्थिति अब पटरी पर लौट आई है। 80 फीसदी इकाईयों में उत्पादन ने रफ्तार पकड़ लिया है। उद्यमियों के अनुसार कुशल कामगारों के लौटने से उत्पादन बेहतर होने लगा तो वहीं अब ऑर्डर भी शत प्रतिशत मिलने लगा है। चांदपुर स्थित औद्योगिक आस्थान व एग्रो पार्क करखियांव में अधिकतर कुशल कारीगर अब लौट आएं है। कोविड प्रोटोकॉल का तहत इकाइयों में श्रमिक व कामगार काम कर रहे हैं। वाराणसी की 29000 इकाईयों में करीब 26000 इकाईयों में काम काज शुरू हो चुका है। डीआरडीओ अप्रूव्ड पीपीई किट की ईकाई संचालित हो रही हैं। जहां रोजाना 5 से 6 हजार पीपीई किट तैयार हो रही हैं। सैनिटाइजर और सैनिटाइजर डिस्पेंसर मशीन सहित अन्य छोटी बड़ी आधा दर्जन इकाईयां भी खुल गई। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव राजेश भाटिया व मंडल अध्यक्ष नीरज परीख ने बताया कि बाजार दोनों दिन खुलने से माल की मांग थोड़ी तेज हुई है। अब समय सीमा भी बढ़ने से मांग व खपत में तेजी आएगी। कुशल कारीगरों के लौटने से उत्पादन ठीक ठाक हो रहा है।
रेस्टोरेंट कारोबार का गिरा ग्राफ
वाराणसी। कोरोना काल में होटल व रेस्टोरेंट कारोबार का ग्राफ चढ़ नहीं पाया। अनलॉक में भी रेस्टोरेंट की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वहीं कोरोना से बचाव को लेकर अधिकतर रेस्टोरेंट संचालकों ने होम डिलिवरी की सुविधा दी है। रेस्टोरेंट में पहले की तरह अब लोग नहीं पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि शहर में 20 से 25 फीसदी रेस्टोरेंट बंद भी हो गए हैं। इनमें अधिकतर चेन वाले रेस्टोरेंट शामिल है। रेस्टोरेंट कारोबारी रोहित पाठक के अनुसार कोरोना ने रेस्टोरेंट कारोबार को तबाह कर दिया है। साफ-सफाई और बचाव के बावजूद लोग रेस्टोरेंट में आने से हिंचक रहे हैं। अधिकतर ग्राहक घर बैठे ही ऑर्डर कर रहे हैं, रेस्टोरेंट में बहुत कम लोग ही आ रहे हैं। वहीं कई रेस्टोरेंट व फ़ास्ट फ़ूड सेंटर बन्द भी हो गए हैं। छावनी क्षेत्र सहित कई होटलों में इम्युनिटी पावर बढ़ाने को लेकर गेस्ट को काढ़ा आदि दिया जा रहा है। रेस्टोरेंट में बार कोड वाला मेनू कार्ड, सेल्फ सर्विस और टेबल सिटिंग में भी बदलाव किया गया है।
विकास कार्य ठप, कोरोना से बचाव में जुटा प्रशासन
वाराणसी। वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही कोरोना संक्रमण के चलते विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए थे। लॉकडाउन के पांच महीने बाद भी अब तक वाराणसी में माहौल सामान्य नहीं हुआ है। यही कारण है कि विकास कार्य प्रभावित हैं और कई जगहों पर ठप पड़े हैं। प्रशासन भी पूरी तरह से कोरोना से बचाव में जुटा है। ऐसे में ज्यादातर परियोजनाएं पिछड़ गई हैं और अब उन्हें पटरी पर लाने की चुनौती है। जनवरी महीने में सेवापुरी ब्लाक को देश का पहला मॉडल ब्लाक बनाने पर सहमति हुई और यह उम्मीद थी कि मार्च 2020 में नीति आयोग की टीम का दौरा होगा और 90 दिन में ब्लाक को योजनाओं व परियोजनाओं का लाभ दिला दिया जाएगा। मगर, कोरोना के चलते टीम जुलाई में आई और अब यह अभियान शुरू हुआ। ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण, फुलवरिया फोरलेन, आशापुर फ्लाईओवर, रिंग रोड-2 सहित कई परियोजनाओं पर एक महीने से ज्यादा तक काम बंद रहा। अनलॉक में निर्माण कार्य शुरू हुआ है, मगर मजदूरों की कमी के चलते वह रफ्तार नहीं पकड़ रही है। ऐसे में अब परियोजनाओं की मॉनिटरिंग कर विकास कार्य पटरी पर लाने की चुनौती है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि विकास कार्यो की मॉनिटरिंग शुरू कराई गई है और समयसीमा भी तय की जा रही है। ताकि विकास कार्य समय से पूरे किए जा सके।
लॉकडाउन में अपराध हुआ कम, सड़क दुर्घटनाओं में आई कमी
वाराणसी। लॉकडाउन में जिले में अपराध में कमी आई और सड़क हादसे बहुत कम हुए। यह जरूर हुआ कि घरेलू हिंसा, जमीन विवाद और साइबर क्राइम के प्रकरणों में तेजी आई। वहीं, जब अनलॉक लागू हुआ तो चेन स्नेचिंग, चोरी, मारपीट, बलवा और हत्या के प्रकरण में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इस बीच आत्महत्या की घटनाओं में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान लोगों को पुलिस का एक नया रूप देखने को मिला। रौब झाड़ने के लिए सख्त लहजे में बातचीत करने वाली पुलिस लॉकडाउन में लोगों को खाना और जरूरत का सामान देते नजर आई। तो कई दफे ऐसा भी हुआ जब किसी ने कोरोना वायरस के संक्रमण से जान गवाने वाले शख्स का पार्थिव शरीर नहीं छुआ तो पुलिस ही मदद के लिए आगे आई। इस बीच शहर की यातायात व्यवस्था में भी काफी सुधार देखने को मिला और हेलमेट पहनने के प्रति दोपहिया वाहन सवार लोग जागरूक भी हुए। कुल मिलाकर पुलिस और कानून व्यवस्था का एक नया रूप कोरोना काल में लोगों को देखने को मिला।

पांच महीने बाद भी नहीं टूटा शहीद उद्यान पार्क का सन्नाटा
वाराणसी। कोरोना के चलते शहर के गुलजार पार्कों में से एक शहीद उद्यान पार्क का सन्नाटा पांच महीने बाद भी नहीं टूटा है। लाक डाउन में बंद पार्क को ढिलाई के बाद कुछ दिनों के लिए खोला गया था। लेकिन कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए एक बार फिर से पार्क पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। पार्क में अब भी सन्नाटा है। यहां रोजाना सुबह शाम वॉक करने वाले अब नहीं आते हैं। पेड़ों की देखभाल के लिए एक दो लोग यहां आते है। पानी देने और यहां पक्षियों के लिए अनाज डालने का काम नगर निगम के कर्मचारी कर रहे हैं। लोग कोरोना वायरस के कारण अभी सैर करने नहीं आ रहे हैं। लोगों को काफी जागरूक किया जा रहा है, उसका लोग पालन भी कर रहे हैं। देश में हर किसी को पुलिस, प्रशासन का सहयोग देना चाहिए और घरों के अंदर ही रहना चाहिए। गर्मियों की छुट्टियों में पूरा पार्क गुलजार रहता है, लेकिन इस बार सिफ़ॱर सन्नाटा रहा। कोरोना के बाद पार्क की रौनक छीन गई है। जिनके टहलने का यही एकमात्र सहारा है, वो अब जैसे-तैसे दिन काट रहे हैं। 300 से ज्यादा लोग यहां सुबह 4 बजे भोर में पहुंच जाते थे। पार्क किनारे बने पाथवे पर टहलने के अलावा फव्वारे के पास बैठकर शुद्ध हवा का आनंद लेते थे।
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