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कांग्रेस की नई सोशल इंजीनियरिंग से हलचल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 04 Aug 2016 01:19 AM IST
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वाराण्ासी में सोनिया गांधी का रोड शो
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अरसे बाद काशी की सड़कों पर कांग्रेसियों ने अपना दम दिखाया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रोड शो के जरिए पार्टी ने एक साथ कई वर्गों को साधने की कोशिश की। भीड़ के लिहाज से कांग्रेस की ब्राह्मणों, अल्पसंख्यकों, वैश्यों और दलितों की नई सोशल इंजीनियरिंग कामयाब रही। इतना ही नहीं, कांग्रेस के फ्रंटल संगठन यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस, सेवादल और एनएसयूआई सब अपनी पूरी ताकत से रोड शो में शामिल हुए।
रोड शो के योजनाकार अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब रहे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के आला नेताओं ने मैनेजमेंट गुरु प्रशांत किशोर के साथ गहन मंत्रणा के बाद रोड शो का ब्ल्यू प्रिंट तैयार हुआ था। यूपी में हमेशा से ही कास्ट पालिटिक्स का बोलबाला रहा है। जाति का कार्ड खेले बिना यूपी के सियासी समर में मजबूती से खड़े रहना थोड़ा मुश्किल है। सीएम कैंडीडेट के रूप में अनुभवी शीला दीक्षित को आगे कर कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। रोड शो को कुछ तरह से प्लान किया गया, जिससे हर वर्ग की नुमाइंदगी नजर आए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बाबा साहेब डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर यूपी में चुनाव प्रचार अभियान का श्रीगणेश किया। ऐसा कर कांग्रेस ने दलितों को यह संदेश दिया कि वही उनकी सबसे बड़ी हितैषी है। मुस्लिम बहुल इलाकों में सोनिया को कार से उतरना या कार की छतों पर बैठकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करना अथवा समर्थकों से हाथ मिलाना भी रणनीति का ही हिस्सा रहा। ब्राह्मणों और वैश्य बिरादरी को साधने में भी कांग्रेस पीछे नहीं रही। भाजपा के गढ़ में कांग्रेस ने सड़कों पर भीड़ ज़ुटाकर काशी की सियासत में हलचल मचा दी है। सपा, बसपा और भाजपा अब कांग्रेस की इस नई सोशल इंजीनियरिंग की काट खोजने में जुट गए हैं।
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उध्ार, सोनिया के रोड शो की कामयाबी का जश्न केवल कांग्रेस नहीं मना रही, भाजपा के रणनीतिकार भी राहत में हैं। उधर, भाजपा का दिल्ली मुख्यालय सोनिया के काशी आगमन से लेकर उनके दिल्ली लौटने तक का अपडेट लगातार लेता रहा। भाजपा को सबसे अधिक चिंता मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण को लेकर है मगर सोनिया के रोड में जिस तरह से मुस्लिम इलाकों में लोग उमड़े, उससे संकेत हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का वोट बंटेगा। भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह कहते हैं, सपा-बसपा के अलावा कांग्रेस में भी मुस्लिमों का वोट बंटेगा तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा। वोट बंटने से भाजपा प्रत्याशियों की कई सीटों पर राह आसान हो जाएगी। मनीष कहते हैं, जहां तक मुस्लिम वोटरों का सवाल है तो लोकसभा के चुनाव में वे कांग्रेस या तो भाजपा को हराने वाली पार्टी के साथ होते हैं मगर विधानसभा चुनाव में उनका रुझान सपा-बसपा की ओर अधिक होता है।
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रोड शो के योजनाकार अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब रहे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के आला नेताओं ने मैनेजमेंट गुरु प्रशांत किशोर के साथ गहन मंत्रणा के बाद रोड शो का ब्ल्यू प्रिंट तैयार हुआ था। यूपी में हमेशा से ही कास्ट पालिटिक्स का बोलबाला रहा है। जाति का कार्ड खेले बिना यूपी के सियासी समर में मजबूती से खड़े रहना थोड़ा मुश्किल है। सीएम कैंडीडेट के रूप में अनुभवी शीला दीक्षित को आगे कर कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। रोड शो को कुछ तरह से प्लान किया गया, जिससे हर वर्ग की नुमाइंदगी नजर आए।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने बाबा साहेब डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर यूपी में चुनाव प्रचार अभियान का श्रीगणेश किया। ऐसा कर कांग्रेस ने दलितों को यह संदेश दिया कि वही उनकी सबसे बड़ी हितैषी है। मुस्लिम बहुल इलाकों में सोनिया को कार से उतरना या कार की छतों पर बैठकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करना अथवा समर्थकों से हाथ मिलाना भी रणनीति का ही हिस्सा रहा। ब्राह्मणों और वैश्य बिरादरी को साधने में भी कांग्रेस पीछे नहीं रही। भाजपा के गढ़ में कांग्रेस ने सड़कों पर भीड़ ज़ुटाकर काशी की सियासत में हलचल मचा दी है। सपा, बसपा और भाजपा अब कांग्रेस की इस नई सोशल इंजीनियरिंग की काट खोजने में जुट गए हैं।
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उध्ार, सोनिया के रोड शो की कामयाबी का जश्न केवल कांग्रेस नहीं मना रही, भाजपा के रणनीतिकार भी राहत में हैं। उधर, भाजपा का दिल्ली मुख्यालय सोनिया के काशी आगमन से लेकर उनके दिल्ली लौटने तक का अपडेट लगातार लेता रहा। भाजपा को सबसे अधिक चिंता मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण को लेकर है मगर सोनिया के रोड में जिस तरह से मुस्लिम इलाकों में लोग उमड़े, उससे संकेत हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का वोट बंटेगा। भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह कहते हैं, सपा-बसपा के अलावा कांग्रेस में भी मुस्लिमों का वोट बंटेगा तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा। वोट बंटने से भाजपा प्रत्याशियों की कई सीटों पर राह आसान हो जाएगी। मनीष कहते हैं, जहां तक मुस्लिम वोटरों का सवाल है तो लोकसभा के चुनाव में वे कांग्रेस या तो भाजपा को हराने वाली पार्टी के साथ होते हैं मगर विधानसभा चुनाव में उनका रुझान सपा-बसपा की ओर अधिक होता है।