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बनारस में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी की हार का यह रहा कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 03 Dec 2017 02:11 PM IST
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वाराणसी में नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेस की शालिनी यादव दूसरे नंबर पर रही। उनकी हार क्यों हुई इसका कारण सामने आया है। निकाय चुनाव की शुरुआत से ही कांग्रेस में शुरू हुई आपसी खींचतान आखिरकार भारी पड़ गई।
रणनीति के नाम पर पार्टी सिर्फ समितियां बनाती रह गईं और जमीनी स्तर पर पार्टी का प्रचार अभियान आखिरी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाया। बेहतर प्रदर्शन के बावजूद पार्टी की हार की वजह संगठनात्मक कमियां बताई जा रही हैं। पार्टी प्रत्याशी शालिनी यादव को एक लाख से अधिक वोट मिले हैं।
शालिनी ने कहा कि धनबल, सत्ताबल के आगे जनता ने जो समर्थन और स्नेह उन्हें दिया है, वह उसके लिए आभारी हैं। वह जिन मुद्दों पर चुनाव मैदान में आई थीं, उनके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले कांग्रेस को महापौर पद के लिए अबकी लगभग चालीस हजार अधिक वोट प्राप्त हुए। पार्टी के ही रणनीतिकार भी अब चुनाव प्रबंधन में खामियां स्वीकार कर रहे हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर कोई भी इस बारे में कुछ बोलने से कतरा रहा है।
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रणनीति के नाम पर पार्टी सिर्फ समितियां बनाती रह गईं और जमीनी स्तर पर पार्टी का प्रचार अभियान आखिरी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाया। बेहतर प्रदर्शन के बावजूद पार्टी की हार की वजह संगठनात्मक कमियां बताई जा रही हैं। पार्टी प्रत्याशी शालिनी यादव को एक लाख से अधिक वोट मिले हैं।
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शालिनी ने कहा कि धनबल, सत्ताबल के आगे जनता ने जो समर्थन और स्नेह उन्हें दिया है, वह उसके लिए आभारी हैं। वह जिन मुद्दों पर चुनाव मैदान में आई थीं, उनके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले कांग्रेस को महापौर पद के लिए अबकी लगभग चालीस हजार अधिक वोट प्राप्त हुए। पार्टी के ही रणनीतिकार भी अब चुनाव प्रबंधन में खामियां स्वीकार कर रहे हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर कोई भी इस बारे में कुछ बोलने से कतरा रहा है।
गंगापुर और रामनगर में रहा फोकस
शालिनी यादव
- फोटो : अमर उजाला
पार्टी सूत्रों की मानें तो अधिकतर रणनीतिकारों का फोकस गंगापुर और रामनगर में रहा। उन्हें नगर निगम में इतने व्यापक जनसमर्थन की शायद उम्मीद ही नहीं थी। दूसरे, पार्षदों की पहली सूची जारी होने के बाद से आरोप-प्रत्यारोप और आपसी खींचतान ने मुश्किलें बढ़ाईं।
पार्टी के जिम्मेदार हालात संभालने और अंसतुष्टों को मैनेज करने में लगे रहे। एक के बाद एक समितियां बनाई जाती रहीं मगर संगठन अपनी रणनीति को जमीनी स्तर पर नहीं उतार पाया।
हालांकि पार्टी प्रत्याशी का प्रचार अभियान जोरों पर चला और लगभग वह सभी वार्डों में गईं। मतदान के करीब आने के बाद संगठन ने थोड़ी सक्रियता दिखाई। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर आए लेकिन उनके दौरे का भी अधिकतर समय गंगापुर और रामनगर में गुजरा।
बेहतर रणनीति और चुनाव प्रबंधन न होने से शहर में कहीं भी उनकी सभा नहीं हो सकी। सियासी जानकारों का दावा है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रबंधन पर ध्यान दिया होता तो नगर निगम में उसके लिए नतीजे और बेहतर होते।
पार्टी के जिम्मेदार हालात संभालने और अंसतुष्टों को मैनेज करने में लगे रहे। एक के बाद एक समितियां बनाई जाती रहीं मगर संगठन अपनी रणनीति को जमीनी स्तर पर नहीं उतार पाया।
हालांकि पार्टी प्रत्याशी का प्रचार अभियान जोरों पर चला और लगभग वह सभी वार्डों में गईं। मतदान के करीब आने के बाद संगठन ने थोड़ी सक्रियता दिखाई। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर आए लेकिन उनके दौरे का भी अधिकतर समय गंगापुर और रामनगर में गुजरा।
बेहतर रणनीति और चुनाव प्रबंधन न होने से शहर में कहीं भी उनकी सभा नहीं हो सकी। सियासी जानकारों का दावा है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रबंधन पर ध्यान दिया होता तो नगर निगम में उसके लिए नतीजे और बेहतर होते।