Court News: वाराणसी में राहुल, सोनिया समेत कई नेताओं के खिलाफ दर्ज होगा परिवाद; BJP नेता ने की थी शिकायत
वाराणसी अदालत में भाजपा नेता ने परिवाद दर्ज करने की अपील की थी। इस परिवाद पर आगामी 24 अक्टूबर को बयान दर्ज करने का आदेश दिया गया है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोती की मां से जुड़ा हुआ है।
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भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और अन्य सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक परिवाद दर्ज करने की अपील की थी। जिसे शनिवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ एमपी, एमएलए कोर्ट ने पोषणीय मानते हुए केस दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही परिवादी का बयान दर्ज करने के लिए 24 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
परिवाद पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं और उनके आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता के संबंध में अत्यंत अपमानजनक और असभ्य शब्दों का प्रयोग किया गया।
प्रधानमंत्री के विरुद्ध वोट चोर–गद्दी छोड़ जैसे नारे और अभियान चलाना, संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कलंकित करना और एआई जनित वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट और भ्रामक प्रचार सामग्री प्रसारित करने की बात गई है। तथ्यों को परिवाद पत्र में विस्तृत रूप से अंकित किया गया और इन्हें डिजिटल साक्ष्य के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
एमसीएच विंग में नहीं मिलीं डॉक्टर, सभी से मांगा जवाब
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल परिसर के एमसीएच विंग में सीएमएस डॉ. आरएस राम के निरीक्षण में ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिलीं। लापरवाही पर सीएमएस ने सभी डॉक्टर, कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। इसकी कॉपी जिलाधिकारी, अपर निदेशक, सीएमओ और एमसीएच विंग के नोडल अधिकारी डॉ. आरके यादव को भी दी है।
सीएमएस कार्यालय की ओर से आदेश में बताया गया है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों ने डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। 3 अक्तूबर को सुबह 9.10 बजे निरीक्षण किया गया तो ओपीडी में कोई भी चिकित्साधिकारी अपने कक्ष में नहीं मिला।
निरीक्षण में पता चला कि चिकित्साधिकारियों के बीच समन्वय की कमी की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीएमएस ने दो दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही वेतन मिलेगा। किसी मरीज के प्रसव पीड़ा से कराहने के बाद कोई डॉक्टर देखने नहीं पहुंचा तो परिजनों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की थी।