जौनपुर कोर्ट में नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ देशद्रोह का परिवाद दर्ज
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जिसे 20 अगस्त को परिवादी व गवाह बृजेश, शैलेश व रविन्द्र विक्रम सिंह आदि ने सोशल मीडिया पर देखा, सुना, पढ़ा। सिद्धू के इस कृत्य से परिवादी देश वासियों एवं शहीदों के परिवारों को अत्यंत मानसिक कष्ट पहुंचा व भावनाएं आहत हुईं। यहां के सैनिकों का मनोबल घटा। भारतीय सेना का अपमान हुआ।
पाकिस्तान के सैनिकों के हमले से भारत के शहीद सैनिकों के परिवारों के जख्मों पर सिद्धू ने नमक छिड़कने का काम किया। देश में अस्थिरता पैदा हुई व लोक शांति भंग हुई। देश की प्रभुता एवं अखंडता को खतरा पैदा हुआ।
परिवादी के अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि पाकिस्तानी सैनिक और वहां पनप रहे आतंकवादी देश के सैनिकों व नागरिकों की कई बार जान ले चुके हैं। ऐसे में पाकिस्तान के आर्मी चीफ से गले मिलकर सिद्धू ने राजद्रोह व देशद्रोह का अपराध किया है। परिवादी ने कोर्ट से मांग की है कि अभियुक्त को तलब करके दंडित किया जाए।
बनारस में नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ दाखिल आवेदन खारिज
वाराणसी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवम रवि प्रकाश शाहू की अदालत ने पाक सेना प्रमुख से गले मिलने के मामले में पूर्व क्रिकेटर और पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ प्रस्तुत आवेदन को क्षेत्राधिकार के अभाव में पोषणीय न पाते हुए खारिज कर दिया है।
शिवपुर के खुशहाल नगर निवासी अधिवक्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू प्रबल शत्रु राष्ट्र के बुलावे पर गए और वहां के सेना प्रमुख से गले मिल कर अथाह प्रेम प्रदर्शित कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश, सेना और सैनिकों का उपहास उड़ाने का काम किया। अधिवक्ता कने सिद्धू के इस कृत्य को राष्ट्र विरोधी बताते हुए उन्हें तलब कर दंडित किए जाने का अनुरोध अदालत से किया गया था।