सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, अमरनाथ यात्रा पर जाएंगे मुस्लिम श्रद्धालु
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देश में धार्मिक असहिष्णुता और सांप्रदायिकता की कितनी भी बातें होती रहें, कुछ लोग इन्हें दरकिनार कर नई मिसाल पेश कर देते हैं। अमरनाथ यात्रा की बात करें तो पूर्वांचल से केवल हिंदू नहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग भी जा रहे हैं।
इसमें कुछ श्रद्धालु पहले भी यात्रा का हिस्सा बनकर बर्फानी बाबा की छवि देख चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में अमरनाथ यात्रा के लिए की जा रही चिकित्सकीय जांच के लिए औसतन तीन-चार मुस्लिम रोज पहुंच रहे हैं।
17 मार्च से शुरू जांच में अब तक करीब 500 मरीजों की जांच हो चुकी हैं, जिसमें 16 से अधिक मुस्लिम हैं। इनकी अस्पताल परिसर स्थित लाल पैथ लैबमें नि:शुल्क जांच हो रही है।
गुरुवार को वाराणसी के जैतपुरा निवासी उजमा आलम, गोदोलिया से एन. खातून, सुंदरपुर की रेहाना, बड़ी पियरी निवासी सैय्यद अनवर आलम और आजमगढ़ के इमरान यात्रा के लिए फिटनेस रिपोर्ट लेने पहुंचे।
दूसरी बार यात्रा पर जा रहे अनवर आलम
इन सभी ने बुधवार को अपना चेकअप कराया था। मंडलीय अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एके सिंह ने बताया कि पिछले साल भी मुस्लिम समुदाय के कई श्रद्धालुओं ने जांच कराई थी।
बड़ी पियरी स्थित सैयद अनवर आलम दूसरी बार अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। चितईपुर आदर्श नवज्योति बालिका इंटर कॉलेज में उर्दू के शिक्षक आलम ने बताया कि 2005 में वह कॉलेज के साथी शिक्षकों संग वहां जा चुके हैं।
इस बार हम अपने दोस्तों संजय मिश्र, सरोज कुमार, सुनील यादव, पंकज और चंद्रभूषण भारती के साथ जाएंगे। आलम वर्ष 1999, 2002 और 2009 में मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भी जा चुके हैं।
वह अमरनाथ, वैष्णो देवी यात्रा पर साथियों संग न केवल जाते हैं बल्कि ईद, बकरीद आदि त्योहार पर उनके हिंदू साथी भी उनके घर आना नहीं भूलते हैं। ये ऐसे मौकों पर कई बार एक ही थाली में खाना भी खाते हैं।