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कमिश्नर ने मंदिर के गर्भगृह से हटवाया एसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 02 Feb 2016 01:49 AM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर में दान की रकम से कराए गए मनमाना कार्यों के फैसले अब मंदिर प्रशासन को एक-एक कर वापस लेने पड़ रहे हैं। मंदिर परिसर में लगाए गए वाटर कूलर को हटाने के बाद अब सोमवार को गर्भगृह में लगे भारी क्षमता वाले एसी को भी हटवा दिया गया। मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण खुद मंदिर पहुंचकर एसी निकलवाया। शासन के हस्तक्षेप और न्यास परिषद के एतराज के बावजूद गर्भगृह में एसी लगवा दिया गया था।
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के अलावा बीएचयू के पुरातत्वविदों ने भी गर्भगृह में एसी को खतरे की घंटी बताया था। मंदिर की दीवारों और शिखर को इस एसी के चलने से होने वाले कंपन से खतरा महसूस किया जा रहा था। सीबीआरआई की रिपोर्ट के बावजूद एसी को मंदिर प्रशासन गर्भगृह से निकालने में टाल मटोल कर रहा था। न्यास परिषद के अध्यक्ष के इस पर चिंता जताने के बाद मंडलायुक्त ने जब इस पर सख्त रुख अपनाया तब दोपहर बाद आनन-फानन में मंदिर प्रशासन सक्रिय हो गया। मंडलायुक्त शाम करीब 4:30 बजे अपर कमिश्नर प्रशासन सहदेव के साथ मंदिर पहुंचे। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी की मौजूदगी में उन्होंने गर्भगृह में लगे एसी को खोलवा कर बाहर करवा दिया।
बता दें प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल के निर्देश के बावजूद एसी नहीं निकाला जा सका था। 7:50 लाख रुपये दान की रकम से इस एसी को वर्ष भर पहले तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे अजय कुमार अवस्थी ने लगवाया था। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि एसी निकलवा दिया गया है। भविष्य में जब विस्तारीकरण की योजना साकार होगी, तब इसके इस्तेमाल के बारे में विचार किया जाएगा।
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विस्तारीकरण के लिए चिह्नित भवनों को खाली कराने पर जोर
वाराणसी। मंडलायुक्त ने न्यास परिषद के अध्यक्ष के साथ विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर से लगे आसपास के भवनों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भवन स्वामियों से वार्ता की। कहा कि विस्तारीकरण के लिए चिह्नित भवनों को खाली कराने का रास्ता निकाला जाए। इससे पहले न्यास अध्यक्ष ने भवनों से जुड़ीं पत्रावलियों का भी अवलोकन किया।
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सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के अलावा बीएचयू के पुरातत्वविदों ने भी गर्भगृह में एसी को खतरे की घंटी बताया था। मंदिर की दीवारों और शिखर को इस एसी के चलने से होने वाले कंपन से खतरा महसूस किया जा रहा था। सीबीआरआई की रिपोर्ट के बावजूद एसी को मंदिर प्रशासन गर्भगृह से निकालने में टाल मटोल कर रहा था। न्यास परिषद के अध्यक्ष के इस पर चिंता जताने के बाद मंडलायुक्त ने जब इस पर सख्त रुख अपनाया तब दोपहर बाद आनन-फानन में मंदिर प्रशासन सक्रिय हो गया। मंडलायुक्त शाम करीब 4:30 बजे अपर कमिश्नर प्रशासन सहदेव के साथ मंदिर पहुंचे। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी की मौजूदगी में उन्होंने गर्भगृह में लगे एसी को खोलवा कर बाहर करवा दिया।
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बता दें प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल के निर्देश के बावजूद एसी नहीं निकाला जा सका था। 7:50 लाख रुपये दान की रकम से इस एसी को वर्ष भर पहले तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे अजय कुमार अवस्थी ने लगवाया था। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि एसी निकलवा दिया गया है। भविष्य में जब विस्तारीकरण की योजना साकार होगी, तब इसके इस्तेमाल के बारे में विचार किया जाएगा।
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विस्तारीकरण के लिए चिह्नित भवनों को खाली कराने पर जोर
वाराणसी। मंडलायुक्त ने न्यास परिषद के अध्यक्ष के साथ विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर से लगे आसपास के भवनों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भवन स्वामियों से वार्ता की। कहा कि विस्तारीकरण के लिए चिह्नित भवनों को खाली कराने का रास्ता निकाला जाए। इससे पहले न्यास अध्यक्ष ने भवनों से जुड़ीं पत्रावलियों का भी अवलोकन किया।