Research: अनिद्रा में योग, आयुर्वेदिक औषधियों का मेल सबसे असरदार; मई में 120 मरीजों पर हुए अध्ययन
Varanasi News: मई में 120 अनिद्रा मरीजों पर किए गए अध्ययन में योग, आयुर्वेदिक औषधियों और दोनों के संयुक्त प्रयोग की तुलना की गई। शोध में पाया गया कि योग और आयुर्वेदिक दवाओं का संयुक्त उपचार सबसे प्रभावी रहा। इस समूह के मरीजों में नींद की गुणवत्ता बेहतर हुई और अनिद्रा के लक्षणों में सबसे अधिक सुधार दर्ज किया गया।
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Varanasi News: अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस-बीएचयू) के शोध में सामने आया है कि योग और जटामांसी-तगर आधारित आयुर्वेदिक औषधियों का संयुक्त प्रयोग नींद की समस्या के उपचार में सबसे अधिक प्रभावी साबित हुआ है। मई में 120 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि केवल योग या केवल हर्बल दवा की तुलना में दोनों के संयोजन से नींद की गुणवत्ता और अनिद्रा की गंभीरता में कहीं अधिक सुधार हुआ।
शोधकर्ताओं ने इसे सुरक्षित और गैर-फार्माकोलॉजिकल विकल्प बताते हुए अस्पतालों और क्लीनिकों में ऐसे एकीकृत उपचार मॉडल को अपनाने की सिफारिश की है। शोध में पाया गया है कि योग और जटामांसी व तगर आधारित आयुर्वेदिक औषधियों का संयुक्त प्रयोग अनिद्रा के उपचार में सबसे अधिक प्रभावी है।
यह पद्धति न केवल सुरक्षित है, बल्कि लंबे समय तक नींद की गोलियों के इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों और निर्भरता की समस्या का विकल्प भी बन सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार दुनिया की लगभग 10 से 30 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में अनिद्रा से प्रभावित है।
अध्ययन में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 120 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें प्राथमिक अनिद्रा की समस्या थी। सभी प्रतिभागियों को समान संख्या में तीन समूहों में विभाजित किया गया। पहले समूह को प्रतिदिन 60 मिनट योग कराया गया, दूसरे समूह को दिन में दो बार जटामांसी और तगर आधारित हर्बल दवा दी गई, जबकि तीसरे समूह को योग और हर्बल दवा दोनों का संयुक्त उपचार दिया गया।
अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता और अनिद्रा की गंभीरता का मूल्यांकन पिट्सबर्ग स्लीप क्वालिटी इंडेक्स (पीएसक्यूआई) और इंसोम्निया सीवेरिटी इंडेक्स (आईएसआई) के आधार पर किया गया। परिणामों में तीनों समूहों में सुधार देखा गया, लेकिन योग और हर्बल दवा के संयुक्त उपचार वाले समूह में सबसे अधिक सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।
शोध के मुताबिक संयुक्त उपचार लेने वाले समूह में पीएसक्यूआई स्कोर में 41.2 प्रतिशत और आईएसआई स्कोर में 52.2 प्रतिशत तक सुधार पाया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण में यह अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण (पी-मान 0.001 से कम) पाया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि योग और आयुर्वेदिक औषधियों का एकीकृत मॉडल अनिद्रा के इलाज में एक प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प बन सकता है।
ऐसे चली शोध की प्रक्रिया
- मई में 120 मरीजों पर किया गया अध्ययन
- तीन उपचार पद्धतियों की तुलना की गई
- योग : 60 मिनट प्रतिदिन, सप्ताह में छह दिन
- हर्बल दवा : दिन में दो बार जटामांसी और तगर आधारित औषधि
- संयुक्त उपचार वाले समूह में सबसे बेहतर परिणाम
- नींद की गुणवत्ता में 41.2 प्रतिशत सुधार अनिद्रा की गंभीरता में 52.2 प्रतिशत कमी
इस टीम ने किया शोध
शोध में संज्ञाहरण विभाग, आयुर्वेद संकाय से डॉ. विजय शंकर यादव, डॉ. भोला नाथ मौर्य, काय चिकित्सा विभाग से डॉ. रोहित कुमार और शल्य तंत्र विभाग से डॉ. रुचि त्रिपाठी व न्यूरोलॉजी विभाग से डॉ. वितुर्व त्रिपाठी शामिल रहे।