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महाविद्यालय भी होंगे शोध कोर्स वर्क के केंद्र
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नई शिक्षा नीति के तहत महाविद्यालयों को शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। लंबे समय से महाविद्यालयों को शोध केंद्र बनाने की मांग की जा रही थी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने विद्यापरिषद की बैठक में दो महाविद्यालयों को शोध केंद्र बनाने पर चर्चा होने से छात्रों में उम्मीद जगी है। इसमें एक महाविद्यालय वाराणसी का और दूसरा महाविद्यालय ज्ञानपुर का है।
महाविद्यालयों में शोध केंद्र की शुरुआत होने से छात्रों को शोध के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। काशी विद्यापीठ ने इसकी शुरुआत कर दी है। विद्यापरिषद में काशी नरेश पीजी कॉलेज में शोध कोर्स वर्क केंद्र बनाए जाने पर विद्यापरिषद में रिपोर्ट पर चर्चा हुई। वहीं सेवापुरी के महाविद्यालय की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई है।
काशी नरेश पीजी कॉलेज को शोध केंद्र बनाने के लिए छात्रनेता लंबे समय से मांग कर रहे हैं। महाविद्यालय 1951 से लगातार शोध केंद्र था लेकिन काशी विद्यापीठ से संबद्ध होने के बाद कॉलेज से व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में 20 नवंबर को हुई बैठक में महाविद्यालयों में शोध कोर्स वर्क केंद्र बनाने पर चर्चा की गई थी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में दीनदयाल शोध पीठ पर शोध कार्य किए जाने की सहमति दी गई है।
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महाविद्यालयों में शोध केंद्र की शुरुआत होने से छात्रों को शोध के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। काशी विद्यापीठ ने इसकी शुरुआत कर दी है। विद्यापरिषद में काशी नरेश पीजी कॉलेज में शोध कोर्स वर्क केंद्र बनाए जाने पर विद्यापरिषद में रिपोर्ट पर चर्चा हुई। वहीं सेवापुरी के महाविद्यालय की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई है।
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काशी नरेश पीजी कॉलेज को शोध केंद्र बनाने के लिए छात्रनेता लंबे समय से मांग कर रहे हैं। महाविद्यालय 1951 से लगातार शोध केंद्र था लेकिन काशी विद्यापीठ से संबद्ध होने के बाद कॉलेज से व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में 20 नवंबर को हुई बैठक में महाविद्यालयों में शोध कोर्स वर्क केंद्र बनाने पर चर्चा की गई थी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में दीनदयाल शोध पीठ पर शोध कार्य किए जाने की सहमति दी गई है।
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