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सूदखोरों से परेशान क्लर्क ने दफ्तर में आग लगाकर की आत्महत्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
Updated Wed, 09 May 2018 11:02 AM IST
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जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के भदोही में वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्थापित सीईपीसी के क्षेत्रीय कार्यालय के एक क्लर्क ने सूदखोरों से परेशान होकर अपने दफ्तर में ही आग लगाकर जान दे दी। घटना की जानकारी होते ही हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कोतवाली क्षेत्र के हरियांव गांव निवासी संजय श्रीवास्तव (45) अपने परिवार के साथ शहर के रजपुरा के गोपाल कुंज में रहते थे। वह वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्थापित कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के मर्यादपट्टी के कालीन भवन में स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात थे।
कार्यालय स्टाफ के मुताबिक सुबह 9.30 बजे वे कार्यालय पहुंचे। कुछ देर तक उनके साथ बैठने के बाद शौचालय जाने की बात कह कर वह वहां से चले गए। थोड़ी देर में कुछ की जलने महक आने के साथ शौचालय से धुआं उठता दिखा। लोग उधर दौड़े तो देखा शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद था।
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लोगों ने दरवाजा तोड़ा तो देखा संजय अंदर झुलसे पड़े थे। मौके पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार पांडेय ने शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया।
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि मामला आत्महत्या का है। शौचालय में बिस्लेरी की बोतल और माचिस पड़ी मिली है। बोतल में केरोसिन था। संजय का शव पूरी तरह झुलस चुका था।
एएसपी डा. संजय कुमार ने बताया कि जो स्थितियां थी उससे मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है। जांच की जा रही है जो सामने आएगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में परिजनों की ओर से भी कोई तहरीर नहीं मिली है।
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कोतवाली क्षेत्र के हरियांव गांव निवासी संजय श्रीवास्तव (45) अपने परिवार के साथ शहर के रजपुरा के गोपाल कुंज में रहते थे। वह वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्थापित कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के मर्यादपट्टी के कालीन भवन में स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात थे।
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कार्यालय स्टाफ के मुताबिक सुबह 9.30 बजे वे कार्यालय पहुंचे। कुछ देर तक उनके साथ बैठने के बाद शौचालय जाने की बात कह कर वह वहां से चले गए। थोड़ी देर में कुछ की जलने महक आने के साथ शौचालय से धुआं उठता दिखा। लोग उधर दौड़े तो देखा शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद था।
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लोगों ने दरवाजा तोड़ा तो देखा संजय अंदर झुलसे पड़े थे। मौके पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार पांडेय ने शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया।
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि मामला आत्महत्या का है। शौचालय में बिस्लेरी की बोतल और माचिस पड़ी मिली है। बोतल में केरोसिन था। संजय का शव पूरी तरह झुलस चुका था।
एएसपी डा. संजय कुमार ने बताया कि जो स्थितियां थी उससे मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है। जांच की जा रही है जो सामने आएगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में परिजनों की ओर से भी कोई तहरीर नहीं मिली है।
दो बेटों के सिर से उठ गया बाप का साया
घटना स्थल पर पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
संजय पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। बाकी भाइयों को हरियांव में छोड़कर वह पत्नी और बच्चों सहित रजपुरा के गोपालकुंज में रहते थे। खबर पाकर पत्नी प्रीती अपने छोटे बेटे ऋतिक के साथ बदहवास मौके पर पहुंची। दोनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
संजय के दो बेटों में से बड़ा बेटा अर्पित भोपाल में बीटेक कर रहा है, जबकि छोटा बेटा ऋतिक नईबाजार के सेंट मेरीज स्कूल में 12वीं का छात्र है। हर कोई नम आंखों से मां बेटे को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहा था।
उधर, सीईपीसी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख और उपनिदेशक, विजय कुमार सिन्हा घटना के वक्त घर से कार्यालय के लिए निकल रहे थे। रास्ते में ही उन्हें घटना की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि आम तौर पर रोज संजय उनके निकलने के बाद ही कार्यालय छोड़ते थे।
सोमवार की शाम सात बजे दोनों लोग साथ ही दफ्तर से निकले थे। उस दौरान ऐसा कुछ भी आभास नहीं हुआ कि उसके मन में ऐसा कुछ चल रहा है। उसने कभी किसी परेशानी के बारे में जिक्र नहीं किया। घटना से मैं खुद हतप्रभ हूं।
संजय के दो बेटों में से बड़ा बेटा अर्पित भोपाल में बीटेक कर रहा है, जबकि छोटा बेटा ऋतिक नईबाजार के सेंट मेरीज स्कूल में 12वीं का छात्र है। हर कोई नम आंखों से मां बेटे को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहा था।
उधर, सीईपीसी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख और उपनिदेशक, विजय कुमार सिन्हा घटना के वक्त घर से कार्यालय के लिए निकल रहे थे। रास्ते में ही उन्हें घटना की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि आम तौर पर रोज संजय उनके निकलने के बाद ही कार्यालय छोड़ते थे।
सोमवार की शाम सात बजे दोनों लोग साथ ही दफ्तर से निकले थे। उस दौरान ऐसा कुछ भी आभास नहीं हुआ कि उसके मन में ऐसा कुछ चल रहा है। उसने कभी किसी परेशानी के बारे में जिक्र नहीं किया। घटना से मैं खुद हतप्रभ हूं।