बीएचयू गेट पर आपस में भिड़े दो गुटों के छात्र, तीखी नोकझोंक और नारेबाजी से गरमाया माहौल
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बीएचयू गेट पर शनिवार शाम को छात्रों के दो गुटों में नोकझोंक से माहौल गरमा गया। भगत सिंह छात्र मोर्चा, आंबेडकर विचार मंच, आइसा, परिवर्तनकामी विद्यार्थी मोर्चा के पदाधिकारी राजकीय दमन और फांसीवादी हमलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
उसी दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों का एक गुट यहां आ गया और पहले से चल रहे प्रदर्शन के विरोध में नारेबाजी और इनपर कार्यवाही की मांग करने लगा। इस दौरान दोनों तरफ से जमकर नारेबाजी हुई। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
इससे पहले बीएचयू सिंह द्वार पर शनिवार को कई छात्र संगठनों के पदाधिकारी सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ मनीष और अमिता, पत्रकार रूपेश कुमार सिंह और अन्य राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की मांग कर रहे थे।
छात्रों ने सरकार पर जन विरोधी कानूनों को लागू करने का आरोप लगाते हुए उसको तत्काल रद्द करने की भी मांग उठाई। छात्रों ने कहा कि नक्सलवाद के नाम पर आठ सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी यूपी में हुई है।
इसमें कई शिक्षक, मजदूर और किसान हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष सहित 20 छात्रों को बिना नोटिस निलंबन, इलाहाबाद विवि में छात्रसंघ खत्म करने की साजिश रची जा रही है। इस दौरान कड़ी सुरक्षा के बीच सदस्यों ने लंका रविदास गेट तक विरोध मार्च भी निकाला।
पोटा और एनएसए एक्ट को प्रभावी करने की मांग
बीएचयू सिंह द्वार पर कई छात्र संगठनों द्वारा प्रदर्शन के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रनेता अरुण कुमार चौबे, सुधांशु, आशीष, दीपक श्रीवास्तव आदि ने पोटा कानून और एनएसए एक्ट को प्रभावी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश में नक्सलियों के मॉड्यूल सामने आए हैं, इसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने सरकाकर से एक एसआईटी का गठन कर शिक्षण संस्थाओं के भीतर रहने वाले नक्सलियों की जांच कराए जाने की भी मांग की है।