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शहर के 148 नलकूप ऑटोमेटिक, सेंसर बताएगा लीकेज
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शहर में 148 नलकूपों से अब पूरी तरीके से ऑटोमेटिक संचालन शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को वर्चुअल संवाद में जलकल के महाप्रबंधक रघुवेंद्र कुमार ने बताया कि जल्द लोकार्पण कराने की तैयारी है। जलकल ने सेंसर से संचालित होने वाले ट्यूबवेल से आपूर्ति शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में सेंसर से लीकेज का भी पता चलेगा। साथ ही किस इलाके में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और क्या दिक्कत आ रही है, इसका भी पता चलेगा। पांच करोड़ रुपये से यह काम कराया गया है। मलदहिया में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
शहर में पेयजल व्यवस्था ऑटोमैटिक होने से अब पंपों को चलाने के लिए ऑपरेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें टाइमर फिक्स है। सुबह 5 से 9 बजे और शाम 4 से 8 बजे के बीच सभी जगहों पर पानी की आपूर्ति होगी। पानी में क्लोरीन की मात्रा भी कंट्रोल रूम से नियंत्रित हो रही है। सेंसर से पता चलेगा टंकी में कितना पानी भर गया है। उसके बाद वहां से पानी आपूर्ति होने पर धारा की तीव्रता, पानी की मात्रा, पानी की गुणवत्ता का पूरा लेखाजोखा होगा। टंकी से पानी की कहां कितनी आपूर्ति हुई, यह भी पता चलेगा।
ऐसे हो रही निगरानी
कंट्रोल पैनल - नलकूप में लगने वाले इस पैनल से पूरा सिस्टम कंट्रोल होगा।
फ्लो मीटर - इससे नलकूप से निकलने वाले पानी और आपूर्ति हुए पानी की मात्रा नापी जाएगी।
फ्लो रीडिंग मीटर - फ्लो मीटर की रीडिंग का डिजिटली रिकॉर्ड करने का उपकरण।
लेवल सेंसर - यह भूजल का स्तर बताएगा। इससे भविष्य की पेयजल योजना बनती रहेगी।
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शहर में पेयजल व्यवस्था ऑटोमैटिक होने से अब पंपों को चलाने के लिए ऑपरेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें टाइमर फिक्स है। सुबह 5 से 9 बजे और शाम 4 से 8 बजे के बीच सभी जगहों पर पानी की आपूर्ति होगी। पानी में क्लोरीन की मात्रा भी कंट्रोल रूम से नियंत्रित हो रही है। सेंसर से पता चलेगा टंकी में कितना पानी भर गया है। उसके बाद वहां से पानी आपूर्ति होने पर धारा की तीव्रता, पानी की मात्रा, पानी की गुणवत्ता का पूरा लेखाजोखा होगा। टंकी से पानी की कहां कितनी आपूर्ति हुई, यह भी पता चलेगा।
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ऐसे हो रही निगरानी
कंट्रोल पैनल - नलकूप में लगने वाले इस पैनल से पूरा सिस्टम कंट्रोल होगा।
फ्लो मीटर - इससे नलकूप से निकलने वाले पानी और आपूर्ति हुए पानी की मात्रा नापी जाएगी।
फ्लो रीडिंग मीटर - फ्लो मीटर की रीडिंग का डिजिटली रिकॉर्ड करने का उपकरण।
लेवल सेंसर - यह भूजल का स्तर बताएगा। इससे भविष्य की पेयजल योजना बनती रहेगी।