वाराणसी: 'डीआरडीओ को चुनें बतौर कॅरिअर', चेयरमैन ने आईआईटी बीएचयू के छात्रों से की अपील
आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए डॉ. कामथ ने आईआईटी बीएचयू के युवाओं से डीआरडीओ को बतौर कॅरिअर चुनने की अपील की।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामथ ने कहा कि अगर आप सफलता चाहते हैं तो लगातार सीखते रहें और कड़ी मेहनत करें। सफलता का कोई शॉर्टकट फार्मूला नहीं होता। आप सभी विद्यार्थी बहुत अच्छे समय पर स्नातक होकर देश की सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं। जितना अधिक चैलेंज मिलेगा, उतना ही काम करने में मजा आएगा।
शुक्रवार को आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए डॉ. कामथ ने आईआईटी बीएचयू के युवाओं से डीआरडीओ को बतौर कॅरिअर चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ का मिशन है देश को मजबूत करना है और आने वाला समय भारत का है।
मिसाइल तकनीक में आज भारत आत्मनिर्भर
डीआरडीओ की मिसाइल यात्रा की यादों को ताजा करते हुए कहा कि 1983 में जब भारत ने मिसाइल बनाने की शुरुआत की थी तो उस समय ना तो संसाधन थे और ना ही देश के पास तकनीक थी। इसके बावजूद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के विजन ने इस सपने को सच कर दिखाया। इसके बाद भारत ने अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश और नाग जैसी मिसाइलें तैयार कीं।
मिसाइल तकनीक में आज भारत आत्मनिर्भर है। आज हम किसी भी तरह की मिसाइल तैयार कर सकते हैं। भारत रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया था जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान। आने वाली सदी भारत की है और आप भारत के भविष्य हैं। मैं चाहता हूं कि संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र डीआरडीओ में भी अपना कॅरिअर बनाएं। विज्ञात और तकनीक से सिर्फ हमारा जीवन नहीं बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था बदल सकती है।
विश्व में तीसरी बड़ी शक्ति के रूप में उभरा भारत
डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामथ ने कहा कि आज यूएस और चीन के बाद हम तीसरी बड़ी शक्ति बनकर उभरे हैं जो पूरी दुनिया में स्टार्ट अप इकोसिस्टम बन गए हैं। भारत के प्रधानमंत्री के विजन ’आत्मनिर्भर भारत’ और टेक्नोलॉजी लीडर के तौर पर देश का भविष्य उज्ज्वल है। साइंस और टेक्नॉलॉजी के चलते ही हमने कोरोना महामारी से बचने के लिए कोवैक्सिन, कोविड 19 वैक्सिन, मिशन शक्ति, चंद्रयान-3, आदित्य एल 1 मिशन जैसी उपलब्धियां हासिल कीं।
डॉ. कामथ ने कहा कि डीआरडीओ देश के शिक्षण संस्थानों में 15 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोल रहा है जहां इनोवेशन और कटिंग एज टेक्नोलॉजी पर फोकस किया जाएगा। डीआरडीओ ने यंग साइंटिस्ट प्रयोगशाला का शुभारंभ किया है जिसमें निदेशक की उम्र 35 साल से कम होगी। हमारा प्रयास है कि यह प्रयोगशाला एक स्टार्टअप की तरह काम करे। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर काम करने के लिए यह प्रयोगशाला प्रतिबद्ध है जैसे साइबर फिजिकल सिस्टम, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, स्मार्ट मैटेरियल्स और सिमेट्रिक टेक्नॉलॉजी।