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चित्रकूट और आदि लाटभैरव रामलीला का मुकुट पूजन से श्रीगणेश
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सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषण, आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर दूषणं...। जिनके मस्तक पर रत्न जड़ित मुकुट, कानों में कुंडल, भाल पर सुंदर तिलक और हर अंग में सुंदर आभूषण सुशोभित हो रहे हैं। जिनकी भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं, जो धनुष बाण धारण किए हुए हैं और जिन्होंने संग्राम में खर-दूषण को जीत लिया है। बृहस्पतिवार को अखिल ब्रह्मांड नायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मनोहारी स्वरूप के स्मरण के साथ रामलीलाओं का श्रीगणेश हुआ।
काशी की पांच सौ एक साल प्राचीन श्री चित्रकूट रामलीला बड़ागणेश स्थित अयोध्या भवन में मुकुट पूजन और राज्याभिषेक के साथ आरंभ हुई। गणेश पूजन, वरुण पूजन, मुकुट पूजन, किरीट पूजन एवं रामायण पूजन के साथ रामराज्याभिषेक आयोजन की लीला की झांकी सजाई गई। सर्वप्रथम श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन के स्वरूपों ने मानव जाति के कल्याण के लिए लीला का संकल्प लिया। इसके पश्चात मुकुट धारण कर सिंहासन पर विराजमान हुए। भजन मंडली ने रामायण के बालकांड का संगीतमय पाठ किया। भगवान राम की झांकी का दर्शन कर भक्त भी आह्लादित नजर आ रहे थे। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया। इस दौरान सुबोध अग्रवाल, मोहन कृष्ण अग्रवाल, मुकुंद उपाध्याय, सत्येंद्र कुमार राय, अशोक सिंह, अभिनव उपाध्याय, रघुनाथ दास मौजूद रहे।
गंगा-वरुणा संगम पर आरंभ हुई लाटभैरव की सांकेतिक रामलीला
श्रीआदि लाटभैरव के 477वें वर्ष में रामलीला का सांकेतिक श्रीगणेश मुकुट पूजन के साथ गंगा-वरुणा संगम स्थित लंका मैदान में हुआ। लंका मैदान के पश्चिमी छोर स्थित श्रीराम के सिंहासन पर पंचस्वरूपों का मुकुट एवं भगवान श्रीराम का चित्र सजाया गया। मानस का पाठ पांच ब्राह्मणों द्वारा पं. रामनिवास के आचार्यत्व में आरंभ हुआ। अंत में रामलीला समिति के सदस्यों ने चित्र और पंचस्वरूपों के मुकुट की आरती उतारी। प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैया लाल यादव ने बताया कि कोविड संक्रमण के कारण रामलीला का सांकेतिक आयोजन किया जा रहा है।
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लीला प्रेमियों में छाई उदासी
आदि लाटभैरव रामलीला का मंचन नहीं होने से लीला स्थल पर पहुंचे नेमियों में उदासी छाई रही। रामलीला प्रेमियों ने बताया कि पूरे साल रामलीला का इंतजार रहता था। लेकिन इस बार लीला मंचन न होने से उदासीनता बनी हुई है।
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काशी की पांच सौ एक साल प्राचीन श्री चित्रकूट रामलीला बड़ागणेश स्थित अयोध्या भवन में मुकुट पूजन और राज्याभिषेक के साथ आरंभ हुई। गणेश पूजन, वरुण पूजन, मुकुट पूजन, किरीट पूजन एवं रामायण पूजन के साथ रामराज्याभिषेक आयोजन की लीला की झांकी सजाई गई। सर्वप्रथम श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन के स्वरूपों ने मानव जाति के कल्याण के लिए लीला का संकल्प लिया। इसके पश्चात मुकुट धारण कर सिंहासन पर विराजमान हुए। भजन मंडली ने रामायण के बालकांड का संगीतमय पाठ किया। भगवान राम की झांकी का दर्शन कर भक्त भी आह्लादित नजर आ रहे थे। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया। इस दौरान सुबोध अग्रवाल, मोहन कृष्ण अग्रवाल, मुकुंद उपाध्याय, सत्येंद्र कुमार राय, अशोक सिंह, अभिनव उपाध्याय, रघुनाथ दास मौजूद रहे।
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गंगा-वरुणा संगम पर आरंभ हुई लाटभैरव की सांकेतिक रामलीला
श्रीआदि लाटभैरव के 477वें वर्ष में रामलीला का सांकेतिक श्रीगणेश मुकुट पूजन के साथ गंगा-वरुणा संगम स्थित लंका मैदान में हुआ। लंका मैदान के पश्चिमी छोर स्थित श्रीराम के सिंहासन पर पंचस्वरूपों का मुकुट एवं भगवान श्रीराम का चित्र सजाया गया। मानस का पाठ पांच ब्राह्मणों द्वारा पं. रामनिवास के आचार्यत्व में आरंभ हुआ। अंत में रामलीला समिति के सदस्यों ने चित्र और पंचस्वरूपों के मुकुट की आरती उतारी। प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैया लाल यादव ने बताया कि कोविड संक्रमण के कारण रामलीला का सांकेतिक आयोजन किया जा रहा है।
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आदि लाटभैरव रामलीला का मंचन नहीं होने से लीला स्थल पर पहुंचे नेमियों में उदासी छाई रही। रामलीला प्रेमियों ने बताया कि पूरे साल रामलीला का इंतजार रहता था। लेकिन इस बार लीला मंचन न होने से उदासीनता बनी हुई है।
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