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मधुमेह की मार से बच्चे भी लाचार, बीमारी के हो सकते ये कारण और जानें कैसे करें बचाव

Mon, 16 Sep 2019 03:20 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 16 Sep 2019 03:20 PM IST
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Children can also be helpless, disease due to diabetes and know how to prevent
डायबिटीज - फोटो : अमर उजाला

अगर आप यह मानते हैं कि मधुमेह केवल अधिक उम्र वालों को ही होता है तो ऐसा नहीं है। इस बीमारी की चपेट में 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी आ रहे हैं। सामान्य तौर पर ब्लड शुगर का लेवल 100-140 होना चाहिए, लेकिन इन बच्चों की जांच में ब्लड शुगर लेवल औसतन 200 से 300 होता है।

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बीएचयू आईएमएस के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर दिन आने वाले औसतन 150 से 200 मरीजों में चार से पांच बच्चे मधुमेह से पीड़ित होते हैं। इनमें कुछ असंतुलित खान-पान, जंक फूड का अधिक सेवन, खराब जीवन शैली, अनियमित दिनचर्या और मोटापा आदि की वजह से मधुमेह की चपेट में आते हैं। कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनका शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए चिकित्सकों को इंसुलिन देना पड़ता है।
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बच्चों में मधुमेह का कारण :
वजन सामान्य से अधिक होना, पैंक्रियाज ग्रंथि में खराबी, वायरस का संक्रमण होना।

ये हैं प्रमुख लक्षण :
भूख अधिक लगना और बार-बार पेशाब आना, कमजोरी और थकान महसूस होना, वजन कम होना।

कैसे करें बचाव :
जंक फूड का सेवन करने से बचें। खेलकूद की गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाएं। सुबह पैदल चलने के साथ ही साइकिलिंग करना भी जरूरी है। चिकित्सक के संपर्क में रहें और दवाइयां समय पर लेते रहें। 

ये बरतें सावधानी :
18 साल से कम उम्र वाले कुछ बच्चों में मधुमेह का कारण मोटापा, खराब दिनचर्या और असंतुलित आहार है। इन बच्चों को खेलकूद में भागीदारी और जंक फूड से बचने की सलाह दी जाती है। अभिभावकों को भी बच्चों की सेहत पर ध्यान देना होगा। इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यदि रक्त में ग्लूकोज का बढ़ा लेवल लगातार बना रहे तो अंगों को नुकसान नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। -प्रोफेसर एनके अग्रवाल, इंडोक्राइनोलॉजी विभाग, आईएमएस बीएचयू

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