फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Children are forced to study by risking their lives

स्कूल नहीं खंडहर: वाराणसी में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे, 167 विद्यालयों की हालत ऐसी ही 

Mon, 06 Sep 2021 06:03 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 06 Sep 2021 06:03 PM IST
सार

वाराणसी में 167 स्कूल ऐसे हैं, जो जर्जर भवनों में बदल गए हैं। पिछले साल अक्तूबर में ही शासन की ओर से मिले निर्देश पर विभाग ने सर्वे कर जिले के जर्जर स्कूली भवन को चिह्नित किया था, जिससे कि इन्हें ध्वस्त किया जा सके। लेकिन ये काम चिह्नांकन तक ही अटक गया।

विज्ञापन
Children are forced to study by risking their lives
पांडेयपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दरकती दीवारें, टपकती छत, छोड़ते पेंट और प्लास्टर। भवन नहीं पूरा खंडहर मानिए। वाराणसी में ऐसी कई विद्यालयों के भवनों की स्थिति है। शनिवार को भदैनी स्थित प्राथमिक कन्या विद्यालय प्रथम में जर्जर भवन की छत गिर गई। ऐसा कोई पहला विद्यालय नहीं है, जिले में करीब 167 ऐसे विद्यालय हैं, जिनकी स्थिति बहुत खराब है। कई जगहों पर तो छत का प्लास्टर भी गिरने लगा है, इससे छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


पिछले साल अक्तूबर में ही शासन की ओर से मिले निर्देश पर विभाग ने सर्वे कर जिले के जर्जर स्कूली भवन को चिह्नित किया था। लेकिन ये काम चिह्नांकन तक ही अटक गया। विभागीय पेंच की वजह से इनको ध्वस्त नहीं कराया जा सका है।
विज्ञापन


अब ये भवन कभी भी बड़े हादसों का अंजाम बन सकते हैं। राजातालाब क्षेत्र के जक्खिनी गांव में एक ऐसा ही सौ साल पुराना विद्यालय हे, जहां के बच्चे अपनी जान खतरे में डालकर पढ़ाई करते है। भवन का प्लास्टर उखड़ चुका है, बारिश में छत टपकटती है। खिड़कियां और दरवाजे भी टूट चुके हैं। कई बार इसकी मरम्मत को लेकर मांग उठी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

167 जर्जर भवनों अब तक नहीं हुए ध्वस्त
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में कुल 249 विद्यालय ऐसे थे, जो जर्जर थे। जिसमें से प्रथम चरण में 20 व दूसरे चरण में 62 विद्यालयों को ध्वस्त किया जा चुका है। जिसके बाद जिले में 167 विद्यालय ऐसे बचे है, जो अभी भी जर्जर है। लेकिन विभागीय पेंच फंसने के कारण अब तक उनको लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि शनिवार को जिस प्राथमिक कन्या विद्यालय की छत गिरी है वो 2005 में ही जर्जर घोषित हो चुका है। बच्चों को पढ़ने के लिए दो नए कमरों का निर्माण कराया है। वर्तमान में कक्षाएं उसी में संचालित होती हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय लोहता व प्राथमिक विद्यालय महेशपुर में नए भवन का निर्माण हो हुआ है। लेकिन जर्जर भवन अभी भी उसी परिसर में है, जिसे अब तक ध्वस्त नहीं किया जा सका है।

बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि जिले के जर्जर स्कूली भवनों का चिन्हांकन किया गया है। जिन विद्यालयों के मलबे का आंकलन पांच लाख तक आता है उनका ध्वस्तीकरण शासन स्तर से किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed