गड्ढे में डूबा 10 साल का मासूम: एक साल में दूसरी संतान खोने से कोहराम, लगातार बारिश से भरा था पानी; मौत
शिवपुर के बेलवरियां गांव में बारिश के पानी से भरे निर्माणाधीन मकान के गड्ढे में डूबने से 10 वर्षीय आशु पटेल की मौत हो गई। आशु ट्यूबवेल से नहाने के बाद लापता हुआ था। सीसीटीवी से उसकी लोकेशन पता चली, जिसके बाद ग्रामीणों ने गड्ढे से शव निकाला। एक साल पहले उसकी बहन की भी बीमारी से मौत हुई थी।
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वाराणसी में बेलवरियां गांव में निर्माणाधीन मकान के लिए जेसीबी से नींव के लिए खोदे गए गड्ढे में डूबने से बुधवार की सुबह आशु पटेल (10) की मौत हो गई। घर से 100 मीटर की दूरी पर खोदे गए पांच फीट गहरे गड्ढे में बारिश का पानी भरा था। आशु के लापता होने के छह घंटे बाद शव निकाला गया। पुलिस ने शव को संरक्षण में लिया है।
बेलवरिया गांव निवासी राजगीर अभय पटेल का बेटा आशु पटेल सुबह 8 बजे घर से 100 मीटर की दूरी पर ट्यूबवेल पर नहाने गया था। सुबह 11 बजे तक आशु के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। दोपहर एक बजे ट्यूबवेल के पास परिजनों को आशु का बनियान और कच्छा मिला। आसपास उसकी तलाश के साथ ही पास के एक मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में आशु गांव के ही आकाश पटेल के निर्माणाधीन मकान की तरफ जाता दिखा। आकाश ने मकान निर्माण के लिए जेसीबी से नींव की खोदाई कराई थी। इसमें बारिश का पानी भरा हुआ था।
परिजनों में मातम
आशंका पर गांव के युवकों ने पानी भरे गड्ढे में कूदकर बच्चे की तलाश शुरू की। दोपहर दो बजे आशु का शव मिला। ग्रामीणों ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी और बच्चे को दीनदयाल अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गई। परिवार में कोहराम मच गया। आशु पटेल कक्षा दूसरी का छात्र था।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि आशु अपने दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई अंकित पांच साल का है। अभय पटेल की पांच साल की बेटी की एक साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। साल भर के अंदर दूसरे संतान की मौत से अभय का परिवार टूट गया। मां काजल पटेल, दादा श्यामनारायण पटेल और दादी मुन्नी देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। थाना प्रभारी निरीक्षक अजीत कुमार वर्मा ने बताया कि शव को संरक्षण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अभी तक परिजनों ने किसी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी है।
बेटे के लिए पूड़ी-सब्जी बनाकर इंतजार कर रही थी मां
बेटे का शव देखते ही मां काजल बिलख उठी। घर पर ढांढ़स बंधाने पहुंचीं पड़ोस की महिलाओं से वह यही कह रही थीं कि अपने बचवा के खाना पर इंतजार करत रहली... पूड़ी-सब्जी बनल रहल। हमे ना पता रहल कि बचवा हमार अब कब्भो न अईहन...। मां और दादी मुन्नी को बिलखता देख मौजूद हर किसी की आंखें डबडबा गईं। रक्षाबंधन त्योहार से पहले इस घटना से गांव में भी शोक है।