हे भगवान मेरा क्या कसूर ! जो मुझे दो साल में ही मरने को कर दिया मजबूर
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गरीबी किस तरह से एक हंसते-खेलते कुनबे को खत्म कर देती है। इसकी बानगी वाराणसी के रामनगर के रामपुर मोहल्ले में रहने वाला एक परिवार है। परिवार का मुखिया चंदन विश्वकर्मा आठ महीने से जेल में बंद है, ऐसे में गृहस्थी की गाड़ी भीख मांगकर चला रही सुनीता देवी का दिल उस समय चाक हो गया, उसकी ममता तब सिसक गई, जब भीख मांग रहे उसके दो साल के कुपोषित बच्चे ने दम तोड़ दिया। सरकारी महकमे की संवेदनशीलता की पोल दो साल के बच्चे की मौत ने खोल दी।
दरअसल, चंदौली के सकलडीहा नई बाजार निवासी चंदन एक मामले में आठ महीने से जेल में बंद है। पत्नी सुनीता देवी चार बच्चों ऋषि (2), श्वेता (14), अमन (4) और विक्की (5) का किसी तरह भरण-पोषण कर रही है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से बच्चों को भी भीख मांगना पड़ रहा है।
सोमवार को रोजाना की तरह कुपोषित ऋषि बहन श्वेता के साथ सोमवार को वाराणसी के मैदागिन चौराहे पर भीख मांग रहा था। इसी बीच उसकी तबीयत बिगड़ी और राहगीर उसे कबीरचौरा अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माता सुनीता ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों ने ऋषि को कुपोषण से ग्रसित बताया था। इसके अलावा एक अन्य बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी।
जानकारी मिलने के बाद रोटी बैंक के संस्थापक किशोरकांत तिवारी ने बच्चे को रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को भी कुपोषण से ग्रसित बताते हुए इलाज किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि कुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में पूरी व्यवस्था है। रामनगर अस्पताल के सीएमएस से बात कर भर्ती बच्चे का बेहतर इलाज कराया जाएगा।