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ललही महारानी से मांगा पुत्रों की दीर्घायु
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वाराणसी। सात वार और नौ त्योहार वाली काशी बुधवार को भी गुलजार रही। प्रकृति और पर्यावरण पर आधारित ललही छठ पर काशी के कुंड और तालाब गुलजार हो उठे। महिलाओं ने पुत्रों की लंबी उम्र, सुख, सौभाग्य के साथ ही अचल सुहाग की कामना से व्रत रखा और हलषष्ठी माता का पूजन किया। शहर से लेकर गांव तक ललही छठ के दौरान कुंडों पर सुबह से ही पूजन करने वाली महिलाओं का तांता लगा रहा। पूजन-अर्चन के बाद महिलाओं ने तिन्नी के चावल और दही का प्रसाद ग्रहण किया।
बुधवार को सुबह महिलाएं सिर पर पूजा की थाली रखकर कुंडों पर पहुंची। थाली में सजे हुए महुए के पत्ते, दूध, गंगाजल, फल, मिष्ठान्न, नारियल, दही को पूजन के लिए रखा गया था। कुंडों पर महिलाओं ने गोबर से स्थान को लीपकर छोटे तालाब की आकृति उकेरी। उस पर फूल, गूलर, कुश और साफा बांधकर तैयार किया। इसके उपरांत ललही महारानी का पूजन किया गया। माता को भुना हुआ चना, गेहूं, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ चढ़ाया गया। सुहागिन महिलाओं ने हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र व सुहाग की सामग्री अर्पित की। कुश और महुआ के पत्ते का पूजन कर इस पर महुआ, तिन्नी के चावल, गुड़ और दही का प्रसाद महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के साथ वितरित किया। महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु के साथ ही अचल सुहाग की कामना की। इसके उपरांत दोपहर बाद महिलाओं ने तिन्नी के चावल और दही को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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बुधवार को सुबह महिलाएं सिर पर पूजा की थाली रखकर कुंडों पर पहुंची। थाली में सजे हुए महुए के पत्ते, दूध, गंगाजल, फल, मिष्ठान्न, नारियल, दही को पूजन के लिए रखा गया था। कुंडों पर महिलाओं ने गोबर से स्थान को लीपकर छोटे तालाब की आकृति उकेरी। उस पर फूल, गूलर, कुश और साफा बांधकर तैयार किया। इसके उपरांत ललही महारानी का पूजन किया गया। माता को भुना हुआ चना, गेहूं, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ चढ़ाया गया। सुहागिन महिलाओं ने हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र व सुहाग की सामग्री अर्पित की। कुश और महुआ के पत्ते का पूजन कर इस पर महुआ, तिन्नी के चावल, गुड़ और दही का प्रसाद महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के साथ वितरित किया। महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु के साथ ही अचल सुहाग की कामना की। इसके उपरांत दोपहर बाद महिलाओं ने तिन्नी के चावल और दही को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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