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विदेशों में छठ पूजा की धूम: कैरीबियाई देशों में प्रवासी हिंदुओं ने विधिविधान से की सूर्योपासना

Sun, 22 Nov 2020 04:54 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 22 Nov 2020 04:54 PM IST
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Chhath Puja celebrated abroad: Diaspora Hindus in Caribbean countries worshiped by law
विदेशों में छठ मनाते हिंदू प्रवासी। - फोटो : अमर उजाला

सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ की सात समंदर पार विदेशों में भी धूम मची। भारतीय समय से लगभग 10 घंटे पीछे रहने वाले कैरीबियाई देशों ट्रिनिडाड-टोबैगो, गुयाना, सूरीनाम आदि में प्रवासी हिंदुओं ने पहली बार पूरे श्रद्धाभाव से सूर्य षष्टी पर छठ पूजा की। इस दौरान सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र होकर श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।

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ब्रह्म विद्यापीठम अंतरराष्ट्रीय की साध्वी आनंदमयी गिरी के अनुसार, भदोही जिले के ज्ञानपुर क्षेत्र के कारीगांव निवासी महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय वेस्टइंडीज के उपकुलपति स्वामी ब्रह्मदेव ने कार्यक्रम का मार्गदर्शन किया। साध्वी ने बताया कि छठ पूजा की पश्चिमी देशों में भी लोकप्रियता बढ़ने लगी है। हिंदुस्तानी श्रद्धालुओं ने 20 और 21 नवंबर को क्रमशः अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर विश्व कल्याण की कामना की।
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साध्वी आनंदमयी ने कहा कि छठ पूजा सूर्य देव (सौर देवता) और षष्ठी देवी (छठ मैया) को समर्पित एक प्राचीन हिंदू वैदिक त्योहार है। यह बिहार, उत्तर प्रदेश, मधेश क्षेत्र, झारखंड और नेपाल के दक्षिणी भागों में उत्सव की तरह मनाया जाता है। भक्त भगवान सूर्य को अपनी प्रार्थना अर्पित करते हैं।

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धरती पर खुशहाली के लिए दुआ मांगते हैं और जीवन में सौभाग्य पाने के लिए देवता को धन्यवाद देते हैं। वे सूर्य देव, उनकी पत्नी उषा देवी और प्रत्यूषा की पूजा-अर्चना करते हैं। षष्ठी देवी ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं। त्रिनिदाद और टोबैगो, जमैका, गुयाना, अरूबा, बारबाडोस, सूरीनाम, फिजी, मॉरीशस औपनिवेशिक देश थे। यहां भारतीय परंपराएं और संस्कृति आज भी समृद्ध है।

त्रिनिदाद में छठ पूजा की लोकप्रियता बढ़ रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बार ही आयोजन में बड़े पैमाने पर आस्था देखने को मिली। यहां की 20 प्रतिशत आबादी यूपी और बिहार से आती है। उनके पूर्वज भारत से अप्रवासी के रूप में आए थे और कई ने राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, कानून और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। बताया कि भक्तों ने पूजा करने के लिए गैस्पारिलो, त्रिनिदाद और टोबैगो, वेस्ट इंडीज में स्थित आश्रम पहुंचकर विधान की जानकारी ली।

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