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बीएचयू के अधीन होगा आगरा का केंद्रीय हिंदी संस्थान
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 19 Jul 2017 10:35 PM IST
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नीति आयोग की सिफारिश पर मानव संसाधन मंत्रालय का फैसला
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा का केंद्रीय हिंदी संस्थान का संचालन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अधीन होगा। नीति आयोग की ओर से भेजे गए इस सुझाव पर जल्द ही केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है। बीएचयू की ओर से किस तरह से संस्थान का संचालन किया जाएगा, इसके लिए कमेटी का गठन भी किया जा चुका है।
बीएचयू कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक स्वायतशासी संस्थान के रूप में चल रहे संस्थान के बीएचयू के अधीन होना बड़ी उपलब्धि है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय तो आगरा में हैं लेकिन इसकी क्षेत्रीय शाखाएं देश भर में हैं। अब केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद संस्थान में अध्ययनरत छात्रों को बीएचयू की डिग्री मिलेगी।
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बता दें कि नीति आयोग ने करीब 600 से अधिक स्वायतशासी संस्थानों को दूसरे संस्थानों में विलय करने का फैसला लेते हुए इसकी सिफारिश मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा था। इसमें पहले चरण में करीब 42 शिक्षण संस्थान चुने गए, जिसमें हिंदी संस्थान भी शामिल रहा।
पिछले दिनों मंत्रालय के संयुक्त सचिव वाईएसएस सिंधु की ओर से भेजा गया पत्र भी बीएचयू को मिला, इसके बाद से ही बीएचयू में कमेटी गठन आदि की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। कुलपति ने बताया कि इसकी सूचना मिलने के बाद कमेटी का गठन किया जा चुका है।
बताया कि मंत्रालय की ओर से आधिकारिक घोषणा होना बस बाकी है। बता दें कि संस्थान को हर साल सरकार की ओर से 17 से 20 करोड़ का बजट मिलता है जो अब बीएचयू को मिलेगा और बीएचयू से जुड़ने के बाद संस्थान में कई नये कोर्स भी चालू हो सकेंगे।
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बीएचयू कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक स्वायतशासी संस्थान के रूप में चल रहे संस्थान के बीएचयू के अधीन होना बड़ी उपलब्धि है।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय तो आगरा में हैं लेकिन इसकी क्षेत्रीय शाखाएं देश भर में हैं। अब केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद संस्थान में अध्ययनरत छात्रों को बीएचयू की डिग्री मिलेगी।
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बता दें कि नीति आयोग ने करीब 600 से अधिक स्वायतशासी संस्थानों को दूसरे संस्थानों में विलय करने का फैसला लेते हुए इसकी सिफारिश मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा था। इसमें पहले चरण में करीब 42 शिक्षण संस्थान चुने गए, जिसमें हिंदी संस्थान भी शामिल रहा।
पिछले दिनों मंत्रालय के संयुक्त सचिव वाईएसएस सिंधु की ओर से भेजा गया पत्र भी बीएचयू को मिला, इसके बाद से ही बीएचयू में कमेटी गठन आदि की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। कुलपति ने बताया कि इसकी सूचना मिलने के बाद कमेटी का गठन किया जा चुका है।
बताया कि मंत्रालय की ओर से आधिकारिक घोषणा होना बस बाकी है। बता दें कि संस्थान को हर साल सरकार की ओर से 17 से 20 करोड़ का बजट मिलता है जो अब बीएचयू को मिलेगा और बीएचयू से जुड़ने के बाद संस्थान में कई नये कोर्स भी चालू हो सकेंगे।