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सीबीआई के घेरे में बीएचयू के पूर्व कुलपति, इस मामले में किए गए तलब 

Wed, 09 Jan 2019 10:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 09 Jan 2019 10:41 AM IST
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CBI summons to BHU Former vice chancellor GC tripathi
प्रो. जीसी त्रिपाठी
बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी सीबीआई के घेरे में आ गये हैं। उन पर 2015 में सिक्किम विश्वविद्यालय में हुई वित्तीय अनियमितता को दबाने का मामला सामने आ रहा है। असल में सीबीआई को इस घोटाले में हुई जांच रिपोर्ट पर शक है।
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प्रो. त्रिपाठी जांच के लिए बनी मानव संसाधन मंत्रालय की इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य बनाए गए थे। तब इस समिति ने मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति एमपी लामा समेत अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन सीबीआई उस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। इसलिए प्रो. त्रिपाठी को तलब किया है।
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सिक्किम उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने प्रो. त्रिपाठी के खिलाफ कोलकाता में यह मामला दर्ज किया है। सीबीआई सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति रहे एमपी लामा के कार्यकाल के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमिताओं का परीक्षण कर रही है।
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सूत्रों के अनुसार सिक्किम यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा की संबद्धता और यूपी समेत अन्य राज्यों में इसके केंद्रों के संचालन से मामला जुड़ा है। इस केंद्र का प्रधान कार्यालय प्रयागराज की जिस समिति के भवन में संचालित है, उसका संबंध प्रो त्रिपाठी से जुड़ा है। तब दूरस्थ शिक्षा केंद्रों की आड़ में बड़े पैमाने पर स्नातक स्तर की डिग्रियां बांटने का खेल हुआ था।

शिकायत के बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने जिस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से इस अनियमितता की जांच कराई, उसके सदस्य के रूप में बीएचयू के तत्कालीन वीसी रहे प्रो त्रिपाठी नामित थे। सीबीआई ने इस इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को नोटिस जारी किया। इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को बीती 18 दिसंबर 2018 को सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा के एसपी के समक्ष पेश होना था, लेकिन वह गए नहीं।

प्रो. त्रिपाठी ने अमर उजाला से बातचीत में सीबीआई का नोटिस मिलने की पुष्टि की। उनका कहना था कि जिस दिन सीबीआई ने बुलाया था, उसी दिन दोपहर के समय उनको नोटिस मिला, ऐसे में कोलकाता जाना संभव नहीं था। उनका कहना है कि अगर सीबीआई उनकी जांच से संतुष्ट नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह दोषी हैं। किसी दूसरी समिति से परीक्षण करा लिया जाए।

नियुक्तियों में धांधली से गिरी विवि की साख 

CBI summons to BHU Former vice chancellor GC tripathi
बीएचयू
बीएचयू में कुलपति के रूप में तैनाती के दौरान प्रो. जीसी त्रिपाठी का विवादों से नाता लगातार जुड़ा रहा। शिक्षकों की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद और वसूली से लेकर सर सुंदरलाल अस्पताल में घटिया ऑक्सीजन की आपूर्ति के कारण मरीजों की मौत का मामला हो या फिर हक के लिए आवाज उठाने वाली छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना हो, प्रो. त्रिपाठी लखनऊ से लेकर नई दिल्ली तक चर्चा में रहे।

इस दौरान बीएचयू की साख गिरने को लेकर देशभर में चर्चा होती रही। हालात अनियंत्रित होने पर प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल पूरा होने के दो महीना पहले ही विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर त्रिपाठी बीएचयू में कुलपति के रुप में 27 नवंबर, 2014 को आए थे।

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद बीएचयू में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के आयोजन में भी परिसर के भगवाकरण का आरोप लगा था। इसके बाद से सर सुंदरलाल अस्पताल में गैस कांड होने से मरीजों की मौत के बाद जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति करने वाली फर्म भी उनके करीबियों की थी। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में कैंपस में छात्र-छात्राओं से रैगिंग, आगजनी, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं भी खूब हुई थीं। 

जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में छात्राओं पर हुआ लाठीचार्च

CBI summons to BHU Former vice chancellor GC tripathi
बीएचयू छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में आईएमएस, विज्ञान संकाय, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान समेत अन्य संकायों में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर पद पर हुई तैनाती में बड़े पैमाने पर अनियमितता की पुष्टि भी हुई। यहीं नहीं, आरटीआई में मिले कागजातों से एक से बढ़कर एक फर्जीवाड़े की पोल खुलती गई। कहीं कम नंबर के बाद भी नियुक्ति हुई तो कहीं पूरे कागजात के अभाव में ही नियुक्ति पत्र दे दिया गया। अब मामला सामने आने के बाद न्याय के लिए आवेदकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच चल रही है।

 

छात्राओं पर लाठीचार्ज भी इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। 21 सितंबर, 2017 को भारत कला भवन चौराहे के पास एक छात्रा से छेड़खानी के बाद 22 सितंबर की सुबह से छात्राएं मुख्य द्वार पर धरने पर बैठकर कुलपति को बुलाती रही लेकिन 40 घंटे बाद भी वह छात्राओं से मिलने नहीं गए। लिहाजा 23 सितंबर की शाम को छात्राएं कुलपति आवास पहुंचकर अपनी बात रखनी चाही तो वहां से उन्हें भगा दिया गया और बाद में महिला महाविद्यालय के गेट पर लाठीचार्ज भी किया गया। इसमें एक महिला शिक्षक समेत आधा दर्जन छात्राओं को चोट आई थी।

विश्वविद्यालय में कार्यकाल के अंतिम दिन 26 नवंबर, 2017 को प्रो. त्रिपाठी ने मजबूरी में अयोग्य लोगों की नियुक्त करने का बयान दिया तो हर कोई चौंक गया। इसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं थी कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्हें अयोग्य नियुक्तियां करनी पड़ीं। फेसबुक, व्हॉटसऐप, विटर पर टिप्पणी के साथ ही इस बयान की शिकायत भी की गई।

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