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मुकदमा दर्ज: बीएचयू में क्लर्क की नौकरी के नाम पर 9 लाख रुपये की ठगी, पुराने परिचित ने ही वसूले पैसे
Sat, 26 Jun 2021 02:06 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sat, 26 Jun 2021 02:06 PM IST
सार
बीएचयू में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से उसके ही पुराने परिचित ने जालसाजी कर नौ लाख रुपये वसूल लिए। भुक्तभोगी को न नौकरी और न ही पैसा मिला। युवक ने मुकदमा दर्ज कराया है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व विधि छात्र कृष्णमोहन पांडेय से बीएचयू में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 9 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। नौकरी और पैसा नहीं मिलने के बाद भुक्तभोगी ने लंका थाने में तहरीर देकर अभिषेक श्रीवास्तव और उसके पिता अजय श्रीवास्तव के खिलाफ आईपीसी 406,506 में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस जांच में जुट गई है।
मऊ के सेहबरपुर रतनपुरा हलधरपुर के रहने वाले कृष्ण मोहन पांडेय बीएचयू से विधि की पढ़ाई करने के बाद लंका इलाके में किराए पर कमरा लेकर तैयारी करता है। कृष्ण मोहन का आरोप है कि एक दिन विश्वनाथ मंदिर के पास पुराने परिचित अभिषेक श्रीवास्तव मिला। बातचीत के दौरान अभिषेक ने बीएचयू में क्लर्क की नौकरी दिलाने की बात की।
उसने कहा कि मेरे पिता की बीएचयू के रजिस्ट्रार से अच्छी बनती है। इस दौरान उसने फोनकर पांच लाख रुपये और सारे कागजात मांगे। इसके बाद कृष्णमोहन ने एक लाख 35 हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कर दिया।
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मऊ के सेहबरपुर रतनपुरा हलधरपुर के रहने वाले कृष्ण मोहन पांडेय बीएचयू से विधि की पढ़ाई करने के बाद लंका इलाके में किराए पर कमरा लेकर तैयारी करता है। कृष्ण मोहन का आरोप है कि एक दिन विश्वनाथ मंदिर के पास पुराने परिचित अभिषेक श्रीवास्तव मिला। बातचीत के दौरान अभिषेक ने बीएचयू में क्लर्क की नौकरी दिलाने की बात की।
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उसने कहा कि मेरे पिता की बीएचयू के रजिस्ट्रार से अच्छी बनती है। इस दौरान उसने फोनकर पांच लाख रुपये और सारे कागजात मांगे। इसके बाद कृष्णमोहन ने एक लाख 35 हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कर दिया।
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बाकी साढ़े सात लाख रुपये लेकर अभिषेक ने सी 302 अंसल नील पदम् कुंज गाजियाबाद लेकर बुलाया। वहां पहुंचने पर सारा पैसा अपने पिता अजय को दिलवाया और बोला कि जल्द नौकरी मिल जाएगी। कुछ दिन बीतने के बाद अभिषेक फोन नहीं उठाने लगा। अगर फोन उठाता भी तो पैसा नहीं देने की धमकी देता। भुक्तभोगी को न नौकरी और न ही पैसा मिला। हार कर उसने लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया।