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कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के विवादित बोल, कहा- भाजपा विधायक खुद पैदा करें पांच बच्चे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:07 AM IST
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कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर
- फोटो : अमर उजाला
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बयानों के जरिए सुर्खियों में रहने वाले यूपी सराकर के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। बलिया के बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह के बयान हिंदुत्व को बचाने के लिए हिंदू 5-5 बच्चे पैदा करें पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पहले वह तो पांच बच्चा पैदा करें।
पढ़ेंः भाजपा विधायक ने हिंदुत्व को बचाने के लिए हिंदुओं को पांच बच्चे पैदा करने की दी सलाह
शुक्रवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में पत्रकारों से कहा कि सरकार में हमारी पार्टी का काम नहीं हुआ है। हम खनन का लाइसेंस नहीं मांगते हैं। हम किसी गिट्टी तोड़ने का क्रशर बैठाने का लाइसेंस नहीं मांगते हैं। हम सिर्फ गरीबों, मजलूमों का हक मांगते हैं। उनके लिए दवाई, शिक्षा मांगते हैं।
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जिन किसानों की चकबंदी नहीं हुई है उनका कार्य मांगते हैं। बावजूद इसके हमारा काम नहीं हो रहा है। किसानों के सवाल पर कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने किसानों का ठेका ले रखा है। जो किसान का काम करेगा वही दिल्ली पर राज करेगा।
बलिया कोतवाली पहुंचे मंत्री लाइन में लगकर कोतवाल से मुलाकात करने के सवाल पर कहा कि मैंने कोतवाल को बुलाया था जब वे नहीं आए तो मैं मिलने चला गया।
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शुक्रवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में पत्रकारों से कहा कि सरकार में हमारी पार्टी का काम नहीं हुआ है। हम खनन का लाइसेंस नहीं मांगते हैं। हम किसी गिट्टी तोड़ने का क्रशर बैठाने का लाइसेंस नहीं मांगते हैं। हम सिर्फ गरीबों, मजलूमों का हक मांगते हैं। उनके लिए दवाई, शिक्षा मांगते हैं।
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जिन किसानों की चकबंदी नहीं हुई है उनका कार्य मांगते हैं। बावजूद इसके हमारा काम नहीं हो रहा है। किसानों के सवाल पर कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने किसानों का ठेका ले रखा है। जो किसान का काम करेगा वही दिल्ली पर राज करेगा।
बलिया कोतवाली पहुंचे मंत्री लाइन में लगकर कोतवाल से मुलाकात करने के सवाल पर कहा कि मैंने कोतवाल को बुलाया था जब वे नहीं आए तो मैं मिलने चला गया।
सात साल पुराने मामले में ओमप्रकाश राजभर कोर्ट में पेश
ओम प्रकाश राजभर (बीच में)
- फोटो : amar ujala
धरना-प्रदर्शन, सरकारी कार्य में बाधा सहित अन्य आरोपों के मामले में कबीना मंत्री ओमप्रकाश राजभर सहित नौ आरोपी शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय महेंद्र सिंह यादव की अदालत में हाजिर हुए। अधिवक्ता संजय चौबे के जरिये अदालत द्वारा जारी जमानती वारंट को आरोपियों ने रिकॉल कराया। अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 25 सितंबर नियत की है।
प्रकरण के मुताबिक चौबेपुर के शाहपुर में मकानों पर बुलडोजर चलाने के विरोध में जिला मुख्यालय पर ओमप्रकाश राजभर धरना पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरना दे रहे थे। इसी मामले में तीन जनवरी 2011 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
इसमें आरोपी कैबिनेट मंत्री ने पहले ही जमानत करा ली थी। पुलिस ने विवेचना के बाद ओमप्रकाश राजभर सहित नौ के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। सम्मन जारी होने के बाद भी हाजिर न होने पर कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया था। इसी क्रम में कैबिनेट मंत्री सहित नौ आरोपी और उनके समर्थक अदालत पहुंचे।
प्रकरण के मुताबिक चौबेपुर के शाहपुर में मकानों पर बुलडोजर चलाने के विरोध में जिला मुख्यालय पर ओमप्रकाश राजभर धरना पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरना दे रहे थे। इसी मामले में तीन जनवरी 2011 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
इसमें आरोपी कैबिनेट मंत्री ने पहले ही जमानत करा ली थी। पुलिस ने विवेचना के बाद ओमप्रकाश राजभर सहित नौ के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। सम्मन जारी होने के बाद भी हाजिर न होने पर कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया था। इसी क्रम में कैबिनेट मंत्री सहित नौ आरोपी और उनके समर्थक अदालत पहुंचे।
भाजपा सरकार ने किया सौतेला व्यवहार
ओम प्रकाश राजभर
- फोटो : amar ujala
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर खुद और पार्टी कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे को न हटाए जाने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार से नाराज हैं। शुक्रवार को अदालत में एक पुराने मामले में पेश होने आए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं पर संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमे भी हटाए जा रहे हैं।
राजनीतिक द्वेषवश दर्ज किए गए मुकदमा को हटाने के लिए मैं बीते 14 महीने से पत्र लिख रहा हूं। इसके लिए मुख्यमंत्री से भी मिला लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी पत्र भेजा लेकिन बात नहीं बनी। हमारे साथ हो रहा भेदभाव साफ दिख रहा है।
ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि दिसंबर 2011 में चौबेपुर के शाहपुर में कई गरीबों को उनके घर से बेघर कर दिया गया था। इसे लेकर हमने और पार्टी कार्यकर्ताओं ने कमिश्नर और डीएम से गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किए।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को हमारा धरना अच्छा नहीं लगा तो सर्किट हाउस में उनके दो मंत्रियों की मौजूदगी में हमारे ऊपर लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन हमारे खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला तो अदालत ने जमानत दे दी।
मंत्री ने कहा कि हम बीजेपी के सहयोगी दल हैं। अपने दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक द्वेषवश दर्ज किए गए मुकदमे को हटाने के लिए संघर्ष करता रहूंगा। कहा कि हम गरीबों और लाचारों के नेता हैं। बीते दिनों बलिया के रसड़ा में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था।
बीजेपी से जुड़े लोगों का सुबह ही मेडिकल मुआयना वगैरह करा कर कार्रवाई की गई और सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी से जुड़े लोग भेदभाव का शिकार हुए। इसके लिए कोतवाल को बुलाया तो वो नहीं आए तब हमें खुद उनके पास जाना पड़ा। कहा कि वंचितों और शोषितों के हित की लड़ाई लड़ता रहूंगा।
राजनीतिक द्वेषवश दर्ज किए गए मुकदमा को हटाने के लिए मैं बीते 14 महीने से पत्र लिख रहा हूं। इसके लिए मुख्यमंत्री से भी मिला लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी पत्र भेजा लेकिन बात नहीं बनी। हमारे साथ हो रहा भेदभाव साफ दिख रहा है।
ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि दिसंबर 2011 में चौबेपुर के शाहपुर में कई गरीबों को उनके घर से बेघर कर दिया गया था। इसे लेकर हमने और पार्टी कार्यकर्ताओं ने कमिश्नर और डीएम से गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किए।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को हमारा धरना अच्छा नहीं लगा तो सर्किट हाउस में उनके दो मंत्रियों की मौजूदगी में हमारे ऊपर लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन हमारे खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला तो अदालत ने जमानत दे दी।
मंत्री ने कहा कि हम बीजेपी के सहयोगी दल हैं। अपने दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक द्वेषवश दर्ज किए गए मुकदमे को हटाने के लिए संघर्ष करता रहूंगा। कहा कि हम गरीबों और लाचारों के नेता हैं। बीते दिनों बलिया के रसड़ा में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था।
बीजेपी से जुड़े लोगों का सुबह ही मेडिकल मुआयना वगैरह करा कर कार्रवाई की गई और सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी से जुड़े लोग भेदभाव का शिकार हुए। इसके लिए कोतवाल को बुलाया तो वो नहीं आए तब हमें खुद उनके पास जाना पड़ा। कहा कि वंचितों और शोषितों के हित की लड़ाई लड़ता रहूंगा।