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फुटपाथ तक कर दिए नीलाम
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 03 Dec 2016 02:01 AM IST
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इस शहर की प्रशासनिक मशीनरी के काम करने का तरीका भी खूब है। जहां हाथ धरिए परत-दर-परत खामियां ही खामियां उघड़ने लगती हैं। एक तरफ सालों से नासूर बनी शहर की ट्रैफिक समस्या का निदान करने के लिए सिग्नल लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग आदि की पहल की जा रही है तो वहीं सड़क और फुटपाथ तक पर पार्किंग बनाकर इस समस्या में और इजाफा किया जा रहा है। जड़ में है नगर निगम, ठेकेदारों और शहर के रसूखदारों की मिलीभगत। इस गठजोड़ का खामियाजा भुगत रही है आम जनता। नगर निगम की कारस्तानी का एक नमूना सामने है। बगैर अपनी जमीन के जहां मन में आया पार्किंग बना दी। यही नहीं, इसका बकायदा ठेका भी दे दिया। आखिर इस मनमानी का खामियाजा शहर की जनता और कितने दिन भुगतेगी...?
नगर निगम ने पार्किंग के लिए शहर में कई जगह सड़क और फुटपाथ तक नीलाम कर दिए हैं। निगम प्रशासन के पास पार्किंग के लिए अपनी कोई जगह नहीं है लेकिन 15 स्थानों पर डेढ़ करोड़ रुपये में पार्किंग का ठेका दिया गया है। दुर्गाकुंड, कचहरी, बांसफाटक, मैदागिन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में सड़क पर ही पार्किंग व्यवस्था चल रही है। नगर निगम, ठेकेदारों और रसूखदारों की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। यह हाल तब है जबकि शहर को जाम से मुक्त करने के लिए नगर निगम, प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
नगर निगम के ही अनुसार पार्किंग स्थल के लिए सार्वजनिक जमीन, जनसुविधाओं का ध्यान और यातायात की सहूलियत आधार होनी चाहिए। लेकिन मनमानी ये है कि जहां जमीन या सड़क खाली दिखी वहीं पार्किंग बना दी। तहसीलदार अविनाश कुमार का कहना है कि शहर में 15 स्थानों पर बने पार्किंग स्थल का डेढ करोड़ में ठेका दिया गया है। इस धनराशि से सड़क एवं गलियों की मरम्मत कराई जाती है। दुर्गाकुंड स्थित कबीरनगर में नगर निगम ने सड़क पर ही पार्किंग की अनुमति दे रखी है। कचहरी स्थित अंबेडकर प्रतिमा के पीछे का भी यही हाल है। संकटमोचन, कलेक्ट्रेट उत्तरी गेट पर और मैदागिन पर सड़क पर ही वाहन खड़े होते हैं।
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संकट मोचन, कबीरा कांपलेक्स दुर्गाकुंड, दुर्गाकुंड आनंद पार्क, शाकंभरी कांपलेक्स, अस्सीघाट वाहन स्टैंड, चौकाघाट जीप स्टैंड, चौकाघाट लकड़ी मंडी, कलेक्ट्रेट उत्तरी गेट दो, जालान शो रूम कचहरी, सारनाथ वाहन स्टैंड, भैंसासुर घाट, काली महल वाहन स्टैंड, गोलघर मैदागिन, हेरिटेज अस्पताल वाहन स्टैंड और महानगर आॅटो स्टैंड पर पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। व्यावसायिक भवनों और बड़े शोरूम में पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर के पास पार्किंग की सुविधा ही नहीं है। नगर निगम की मिलीभगत से शोरूम के सामने सड़क पर ही पार्किंग स्थल बना दिया गया। साथ ही उसका टेंडर कर जनता से शुल्क वसूला जा रहा है।
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नगर निगम ने पार्किंग के लिए शहर में कई जगह सड़क और फुटपाथ तक नीलाम कर दिए हैं। निगम प्रशासन के पास पार्किंग के लिए अपनी कोई जगह नहीं है लेकिन 15 स्थानों पर डेढ़ करोड़ रुपये में पार्किंग का ठेका दिया गया है। दुर्गाकुंड, कचहरी, बांसफाटक, मैदागिन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में सड़क पर ही पार्किंग व्यवस्था चल रही है। नगर निगम, ठेकेदारों और रसूखदारों की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। यह हाल तब है जबकि शहर को जाम से मुक्त करने के लिए नगर निगम, प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
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नगर निगम के ही अनुसार पार्किंग स्थल के लिए सार्वजनिक जमीन, जनसुविधाओं का ध्यान और यातायात की सहूलियत आधार होनी चाहिए। लेकिन मनमानी ये है कि जहां जमीन या सड़क खाली दिखी वहीं पार्किंग बना दी। तहसीलदार अविनाश कुमार का कहना है कि शहर में 15 स्थानों पर बने पार्किंग स्थल का डेढ करोड़ में ठेका दिया गया है। इस धनराशि से सड़क एवं गलियों की मरम्मत कराई जाती है। दुर्गाकुंड स्थित कबीरनगर में नगर निगम ने सड़क पर ही पार्किंग की अनुमति दे रखी है। कचहरी स्थित अंबेडकर प्रतिमा के पीछे का भी यही हाल है। संकटमोचन, कलेक्ट्रेट उत्तरी गेट पर और मैदागिन पर सड़क पर ही वाहन खड़े होते हैं।
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संकट मोचन, कबीरा कांपलेक्स दुर्गाकुंड, दुर्गाकुंड आनंद पार्क, शाकंभरी कांपलेक्स, अस्सीघाट वाहन स्टैंड, चौकाघाट जीप स्टैंड, चौकाघाट लकड़ी मंडी, कलेक्ट्रेट उत्तरी गेट दो, जालान शो रूम कचहरी, सारनाथ वाहन स्टैंड, भैंसासुर घाट, काली महल वाहन स्टैंड, गोलघर मैदागिन, हेरिटेज अस्पताल वाहन स्टैंड और महानगर आॅटो स्टैंड पर पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। व्यावसायिक भवनों और बड़े शोरूम में पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर के पास पार्किंग की सुविधा ही नहीं है। नगर निगम की मिलीभगत से शोरूम के सामने सड़क पर ही पार्किंग स्थल बना दिया गया। साथ ही उसका टेंडर कर जनता से शुल्क वसूला जा रहा है।