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Budget 2025: 'पॉपकॉर्न चर्चा पर सिमटी जीएसटी काउंसिल, टैक्स लो, खून मत पियो'; प्री बजट संवाद में बोले विशेषज्ञ

Fri, 31 Jan 2025 12:47 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 31 Jan 2025 12:47 PM IST
सार

Budget 2025: अमर उजाला के प्री बजट संवाद में लोगों ने कहा कि फ्री की घोषणाएं बंद हों, यह सिर्फ कर दाताओं का बोझ बढ़ाती हैं। उधर, एमएसएमई सेक्टर पांच साल से विशेष पैकेज की आस में है।

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Budget 2025 expectations of Experts in Varanasi and statement on GST
अमर उजाला के प्री बजट संवाद में शामिल एक्सपर्ट्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यह सरकार छूट देने वाली है और यह अलग-अलग एंगल से भी टैक्स वसूल लेती है। जीएसटी में तमाम अधिकारी एसओपी के खिलाफ काम कर रहे हैं। स्टेट जीएसटी में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत बड़े अफसरों से लगाकर पीएमओ तक हुई। करदाता टैक्स देना चाहता है, उसका खून मत पीजिए। वहीं, जीएसटी काउंसिल नियम-कायदों पर नहीं बल्कि पॉपकॉर्न पर चर्चा कर रही है। वित्त मंत्री से मांग है कि जीएसटी को सरल बनाएं और भ्रष्टाचार करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई करें। इनकम टैक्स की तरह जीएसटी में भी फेसलेस व्यवस्था लागू हो। यह बातें, उद्यमियों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, इनकम टैक्स व जीएसटी अधिवक्ताओं ने बृहस्पतिवार को प्री बजट पर आयोजित अमर उजाला संवाद में कहीं।

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चांदपुर औद्योगिक आस्थान स्थित अमर उजाला कार्यालय में उद्यमियों ने कहा कि जीएसटी में बेतुके नोटिसों के साथ ही भ्रष्टाचार थमना चाहिए। एमएसएमई के सर्वाईवल के लिए जीएसटी की दरों को कम करके तर्क संगत बनाने की जरूरत है। सरकार ने जीएसटी लागू करते समय वादा किया था कि जीएसटी कलेक्शन जब एक लाख करोड़ प्रतिमाह पार कर जाएगा, तब सरकार जीएसटी की दरों में कमी करेगी।
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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई सेक्टर में घोषणाएं कई होती हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। पिछले पांच साल के बजट में एमएसएमई को कोई खास पैकेज नहीं मिला। वित्त मंत्री से उम्मीद है कि वह हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपनी पोटली से बड़ा धमाका करेंगी।

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क्या बोले एक्सपर्ट्स

हैंडमेड प्रोडक्ट हैं, उनमें जीएसटी के रेट हाई हो जाते हैं। जूट के प्रोडक्ट इंडिया में घटे हैं, बाहर बढ़े हैं। क्योंकि टैक्स बहुत लगे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा पर सरकार को और काम करने की जरूरत है। जब तक सरकारी और प्राइवेट स्कूल का अंतर समाप्त नहीं होगा, तब तक भविष्य की नींव मजबूत नहीं होगी। -डॉ. शारदा, महिला उद्यमी

एक तरह के पेपर पर तीन तरह का जीएसटी कहीं से भी उचित नहीं है। जीएसटी का सरलीकरण करना चाहिए। हम पर ब्याज लगता जा रहा है। बेमेल नोटिसों का जवाब दें या फिर व्यापार करें। एक तरह से कारोबारियों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। -अंजनी कुमार सिंह, प्रिंटिंग उद्यमी

एमएसएमई के लिए विशेष पैकेज मिलना चाहिए। बिजनेस को बढ़ाने में बैंक का बड़ा रोल है। वह नहीं मिल रहा है। सरकार एमएसएमई पर चर्चा बहुत करती है, लेकिन बजट में एमएसएमई को निराशा ही हाथ लगती है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। -ज्ञानेश्वर, उद्यमी, चांदपुर

पिछले पांच साल से एक मांग कर रहे हैं। टैक्स कलेक्शन में जिसकी ग्रोथ नहीं है, उनका टैक्स घटा दिया। शतरंज का खेल खिला रहे हैं। सात स्लैब का एक नया सिस्टम ला दिए हैं। जीएसटी का दर नहीं घटा रहे हैं। टैक्स कलेक्शन नहीं घटा रहे हैं। अन्नदाताओं से कोई टैक्स नहीं और प्रोडक्टदाता से टैक्स वसूला जा रहा है। -मनीष कटारिया, चैप्टर चेयरमैन आईआईए

वन नेशन वन टैक्स की बात कर रहे हैं तो पेट्रोल को उस दायरे में क्यों नहीं ला रहे हैं। तकनीकी उन्नयन का गठन हो। रामनगर राल्हूपुर में 200 करोड़ की लागत से बना मल्टीमॉडल टर्मिनल पिछले पांच साल से सफेद हाथी बनकर रह गया। फल सब्जी का पैकेजिंग हाउस बनाने की बात हुई लाखों-करोड़ों खर्च होने के बाद बंद पड़ा है। -नीरज पारिख, महासचिव, एसआईए

जीएसटी काउंसिल पॉपकार्न पर चर्चा करने के लिए बैठती है। इसमें बहुत अनियमितताएं है। सरकार धीरे-धीरे एक्सपोर्ट की सुविधाएं खत्म कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो प्रतिस्पर्धा हैं, उसके लिए शोध नहीं हो रहे हैं। लांग टर्म कोई प्लानिंग नहीं हो रही है। फ्लाइट का किराया मनमाना है, उसके लिए कोई नियम कानून नहीं है। -राजेश भाटिया, सचिव, आईआईए

जीएसटी अधिकारियों के कार्यप्रणाली से सभी त्रस्त हैं। एआई जनरेटेड नोटिस अपने आप नहीं आ रहे हैं, इसे अफसर ही आगे बढ़ा रहे हैं। यदि इसकी समीक्षा हो जाए तो 90 प्रतिशत नोटिस फर्जी निकलेंगे। वही, 2014 से 2024 तक 82 प्रतिशत टैक्स में वृद्धि हुई है, इसे संभालने की भी जरूरत है, जो टैक्स दे रहे हैं, उन्हें फैसिलिटी में हेल्प करिए। -सुदेशना बसु, चार्टर्ड एकाउंटेंट

जीएसटी दे रहे हैं। यूनिट माइक्रो या स्माल में हैं, इनकम टैक्स में बेनिफिट दीजिए। चुनाव में फ्री की घोषणा बहुत कर रही हैं। यह घोषणा सिर्फ 60 वर्ष से ऊपर के लिए होनी चाहिए। ऑनलाइन एजुकेशन 12 तक बंद होना चाहिए। एक्साइज ड्यूटी में छूट हो। -अजय जायसवाल, उद्यम

निर्यातकों की सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है और पेपर वर्क बहुत कम किया जाए। सरल और आसान तरीक से लाभ मिले। निर्यात नहीं होने से ही आज रुपया कमजोर और डॉलर मजबूत होता जा रहा है। इनकम टैक्स में 10 लाख तक की छूट होनी चाहिए। -महिपाल गुप्ता, उद्यमी

टैक्स में एकरूपता लाने का प्रयास होना चाहिए। कंपनी में अलग पार्टनरशिप की सिर्फ एक पॉलिसी होनी चाहिए। सभी वर्गों के लिए सरकार फंडिंग कर रही हैं हमसे सिर्फ टैक्स ले रही हैं। सरकार बदले में दे कुछ नहीं रही हैं। आयुष्मान योजना अच्छी है, लेकिन उसकी निगरानी ठीक नहीं है। -अरविंद शुक्ला, एडवोकेट, इनकम टैक्स बार एसोसिएशन

स्टेट जीएसटी में तमाम अधिकारी एसओपी के खिलाफ काम कर रहे हैं। उनके लिए व्यापारी साॅफ्ट टारगेट होता है। पैसे की बेमेल नोटिस भेजे जाते हैं। टैक्स देने के बावजूद व्यापारी, उद्यमी प्रताड़ना सहे, यह कहां तक उचित है, टैक्स वसूलने के साथ ही करदाताओं का खून पीने तक तैयार हैं। भ्रष्टाचार रोकथाम पर भी सरकार को अलग से काम करना चाहिए। -असीम जफर, पूर्व अध्यक्ष, इनकम टैक्स बार एसोसिएशन

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