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Budget 2020: निर्मला सीतारमण के ‘निर्मल मन’ से कालीन उद्योग को मिलेगा जीवन! ओडीओपी से मिलेगी राहत

Sat, 01 Feb 2020 04:08 PM IST
गीतार्जुन गौतम पंकज चौबे, अमर उजाला, भदोही
पंकज चौबे, अमर उजाला, भदोही Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 01 Feb 2020 04:08 PM IST
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Budget 2020 odop scheme for Carpet industry will benefit in bhadohi
बजट 2020। - फोटो : अमर उजाला।

बजट में छोटे निर्यातकों के लिए निर्विक और 'एक जिला-एक उत्पाद'(ओडीओपी) योजना के लिए धन का प्रावधान किए जाने से भदोही के कालीन कारोबार जगत ने राहत की सांस ली है। हालांकि पूरे बजटीय प्रावधान का इस आलोक में अभी अध्ययन किया जाना बाकी है, मगर अर्थशास्त्री इसे सकारात्मक संकेत मानकर चल रहे हैं।

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भदोही के कालीन कारोबार की सेहत अंदर से कुछ ठीक नहीं है। मर्ज बढ़ता जा रहा है, मगर कारोबार के झंडाबरदार बने लोग न जाने क्यों जानबूझ कर कमजोर हो रहे उद्योग को दिखावे का मीठा जहर देकर शूल शैया की तरफ बढ़ने देना चाहते हैं। मगर दूसरी ओर उद्योग पर असर पड़ रहा है। भदोही के हैंडनॉटेड कालीनों पर विदेशी मशीनमेड कालीन भारी पड़ने लगे हैं।
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डोमोटेक्स में इस हकीकत का कड़वा घूंट यहां के कारोबारियों को पीना पड़ा है। माना जा रहा है कि पूरे कारोबार की सेहत सुधारने की दिशा में कारगर पहल न की गई तो मुश्किलें और बढ़ेंगी। इस बार आम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई तो थोड़ी आस जगी, लेकिन निर्विक योजना को पुरानी बोतल में नई शराब के रूप में ही देखा जा रहा है।

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कालीन उद्योग जगत का कहना है कि ड्रॉ-बैक तो पहले से ही लगातार कम हो रहा था, अब उसी को दूसरे रूप में देने की तैयारी का नाम भी निर्विक हो सकता है। हालांकि योजना की पूरी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

जर्मनी में गत दिनों हुए डोमोटेक्स कालीन मेले में जिले की हैंडनॉटेड कालीनों को विदेशी मशीनमेड कालीनों से कड़ी टक्कर मिली है। तमाम कारोबारियों और निर्यातकों को अपेक्षाकृत ऑर्डर भी नहीं मिले। दूसरी ओर कारोबार की असलियत स्वीकार करने का साहस उद्योग जगत से जुड़े लोग नहीं कर पा रहे हैं। डोमोटेक्स से लौटे एक बड़े कालीन कारोबारी ने बताया कि कारोबार की आंतरिक हालत ठीक नहीं है। हैंडनॉटेड के कच्चे माल मशीन मेड की तुलना में महंगे आ रहे हैं।

इसके अलावा बीविंग पर भारी खर्च के चलते महंगे हो चुके भदोही के हैंडमेड कालीनों को सस्ते विदेशी मशीनमेड कालीनों के आगे कम तरजीह मिल रही है। इस तरफ सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। वरना कारोबार पर असर पड़ना तय है। अब बजट में उद्योग जगत को लेकर वित्तमंत्री का ‘निर्मल मन’ दिखा है तो आस जग गई है। हालांकि व्यवसाय में इसका कितना और कैसा असर पड़ता है, यह समय बताएगा।

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