लोकसभा चुनाव 2019 : बसपा ने लालगंज में नए चेहरे पर लगाया दांव, 2014 में इस सीट पर खिला था कमल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की लालगंज सीट सपा-बसपा गठबंधन में बसपा के खाते में है। इसी के मद्देनजर गुरुवार को आयोजित बसपा-सपा की संयुक्त कार्यकर्ता बैठक में स्थानीय विधायक आजाद अरिमर्दन की पत्नी संगीता आजाद को लालगंज (सुरक्षित) लोकसभा से बसपा का प्रभारी घोषित किया।
इस दौरान मुख्य अतिथि एवं आजमगढ़, वाराणसी, गोरखपुर के प्रभारी घनश्यामचंद्र खरवार ने कहा कि हम सबकी बहुत अच्छी टीम है। यह गठबंधन नेचुरल है। भाजपा ने ईवीएम मशीन के माध्यम से बेईमानी की।
भाजपा को खत्म करने के लिए बसपा और सपा का एक होना जरूरी था और वही हुआ। भाजपा ने जनता को गुमराह करके वोट लिया। काला धन विदेश में जमा है उसको लाएंगे, प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए देंगे, लेकिन एक भी पैसा लोगों के खाते में नहीं आया। भाजपा ने हिंदू-मुस्लिम भाइयों में दंगा कराया।
इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर, मंडल जोन इंचार्ज हरिश चंद्र गौतम, लालगंज बसपा विधायक अजाद अरिमर्दन, सपा विधायक संग्राम यादव आदि ने भी संबोधित किया और केंद्र तथा प्रदेश सरकार पर जमकर भड़ास निकाली।
आजादी के 67 साल बाद खिला कमल
लालगंज सुरक्षित सीट पर आजादी के 67 साल बाद कमल को खिलने का मौका मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के खाते में गई। इस सीट पर भी सबसे अधिक पांच बार कांग्रेस को जीत मिली। बसपा तीन, सपा व जनता दल दो-दो तो पीएसपी, बीएलडी, जेएनपी (एस) व बीजेपी को एक-एक बार जीत का मौका मिला।
लालगंज सीट : सर्वाधिक नुमाइंदगी रही रामधन ने नाम
आजमगढ़ की दूसरी लोकसभा सीट लालगंज अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। इस सीट पर सर्वाधिक प्रतिनिधत्व छह बार रामधन का रहा है। विभिन्न दलों के प्रत्याशी के रूप में रामधन ने सीट पर नुमाइंदगी की है। वहीं डॉ. बलिराम तीन बार तो विश्वनाथ व दरोगा प्रसाद सरोज दो-दो बार इस सीट से सांसद रहे। छांगुर राम, विश्राम व नीलम सोनकर एक-एक बार संसद पहुंचे।