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बीएचयूः बीएससी नर्सिंग की मान्यता रद होने के बावजूद दाखिला देकर फीस वसूलता रहा विवि प्रशासन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:15 PM IST
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धरना देती छात्राएं
- फोटो : amar ujala
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आईएमएस बीएचयू के नर्सिंग कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की मान्यता तीन साल पहले ही रद कर दी गई थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन दाखिला देता रहा और छात्र-छात्राओं से मोटी फीस वसूलता रहा।
अब इस कोर्स में अध्ययनरत 260 छात्र-छात्राओं का भविष्य दाव पर है। वर्ष 2015 में ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल, स्टेट काउंसिल ने बीएचयू के नर्सिंग कॉलेज में मानक के अनुसार शिक्षण व अन्य सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए मान्यता रद कर दी थी। इसकी जानकारी छात्रों को तब हुई जब उनका दाखिला हो गया था।
नर्सिंग कॉलेज में वर्ष 2015 से 2017 तक 260 (क्रमश: 100-100 और 60) छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया है। वर्ष 2015 में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब डिग्री मिलने वाली है। मगर इसे मान्यता नहीं है। इसलिए छात्रों को भविष्य की चिंता सता रही है।
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छात्र-छात्राओं ने स्थानीय स्तर पर कुलपति, आईएमएस डायरेक्टर, प्रोफेसर इंचार्ज, डीन को पत्र लिखने के साथ ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल में भी गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। अधिकारी केवल जल्द से जल्द मानक पूरा कर लेने और काउंसिल से मान्यता ले लेने की बात कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
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अब इस कोर्स में अध्ययनरत 260 छात्र-छात्राओं का भविष्य दाव पर है। वर्ष 2015 में ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल, स्टेट काउंसिल ने बीएचयू के नर्सिंग कॉलेज में मानक के अनुसार शिक्षण व अन्य सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए मान्यता रद कर दी थी। इसकी जानकारी छात्रों को तब हुई जब उनका दाखिला हो गया था।
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नर्सिंग कॉलेज में वर्ष 2015 से 2017 तक 260 (क्रमश: 100-100 और 60) छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया है। वर्ष 2015 में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब डिग्री मिलने वाली है। मगर इसे मान्यता नहीं है। इसलिए छात्रों को भविष्य की चिंता सता रही है।
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छात्र-छात्राओं ने स्थानीय स्तर पर कुलपति, आईएमएस डायरेक्टर, प्रोफेसर इंचार्ज, डीन को पत्र लिखने के साथ ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल में भी गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। अधिकारी केवल जल्द से जल्द मानक पूरा कर लेने और काउंसिल से मान्यता ले लेने की बात कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
झुका प्रशासन, मार्च तक का आश्वासन
छात्र-छात्राओं द्वारा मान्यता को लेकर धरना देने के बाद आखिर विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्च 2019 तक का समय मांगा है। इसकी जानकारी छात्रों को धरना स्थल पर दी गई। इसमें कुलसचिव की ओर से नर्सिंग कॉलेज प्रोफेसर इंचार्ज के पत्र का हवाला भी दिया गया।
कुलसचिव ने बताया है कि संस्थान की ओर से इंडियन नर्सिंग काउंसिल में मान्यता संबंधी प्रक्रिया चल रही है, संभावना है कि मार्च 2019 तक मान्यता मिल जाएगी। इसके अलावा नियमित नियुक्ति होने तक संविदा के आधार पर खाली पदों के सापेक्ष दिसंबर 2018 तक नियुक्तियां करने का आदेश भी जारी किया गया है।
कुलसचिव ने बताया है कि संस्थान की ओर से इंडियन नर्सिंग काउंसिल में मान्यता संबंधी प्रक्रिया चल रही है, संभावना है कि मार्च 2019 तक मान्यता मिल जाएगी। इसके अलावा नियमित नियुक्ति होने तक संविदा के आधार पर खाली पदों के सापेक्ष दिसंबर 2018 तक नियुक्तियां करने का आदेश भी जारी किया गया है।
ये उठ रहे हैं सवाल
-जब विश्वविद्यालय प्रशासन को मान्यता रद होने की जानकारी 2015 में मिल गई थी तो दाखिले क्यों जारी रखे गए।
-प्रवेश लेने से पहले इसकी जानकारी छात्र-छात्राओं को क्यों नहीं दी गई?
-जब शिक्षक नहीं थे तो कैसे तीन साल तक की पढ़ाई हुई?
-अब तक केवल आश्वासन ही मिला है?
-प्रवेश लेने से पहले इसकी जानकारी छात्र-छात्राओं को क्यों नहीं दी गई?
-जब शिक्षक नहीं थे तो कैसे तीन साल तक की पढ़ाई हुई?
-अब तक केवल आश्वासन ही मिला है?