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वाराणसी: दलालों और कर्मचारियों की साठगांठ का अड्डा बना आरटीओ, बिना सेटिंग वाले दिनभर खाते हैं धक्के

Sat, 06 Mar 2021 01:26 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Sat, 06 Mar 2021 01:26 AM IST
सार

वाराणसी के संभागीय परिवहन कार्यालय हरहुआ के बाहर ही खड़े दलालों की फौज हर आवेदक को घेरती है और वहां चंगुल में नहीं आने वालों को कार्यालय में धक्के ही मिलते हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने दलालों और कर्मचारियों की साठगांठ की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
 

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Brokers dominate in Varanasi RTO difficult to work without facility fee
आरटीओ कार्यालय में भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के संभागीय परिवहन कार्यालय हरहुआ में दलालों एवं आरटीओ ऑफिस के कर्मचारियों के बीच ऐसी साठगांठ है कि आप दो ,तीन या चार बार प्रयास करेंगे, फिर आप परेशान हो जाएंगे। आपको लगेगा इससे अच्छा तो यही था कि आरटीओ ऑफिस के बाहर लगी दुकानों के पास किसी दलाल को फिट कर लेते तो आसानी से काम हो जाता। क्योंकि आरटीओ ऑफिस हरहुआ में कोई भी काम बिना रिश्वतखोरी के नहीं हो रहा है।

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 दलालों का कहना है उन्हें सिर्फ पैसे दे दो, फिर न तो गाड़ी चलाकर दिखानी है और न ही कोई परीक्षा देनी है और सब काम अधिकारी कर देंगे। इसके लिए बकायदा हर काम का शुल्क निर्धारित है। आरसी, एनओसी, गाड़ियों का ट्रांसफर करवाने, पंजीकरण, मालिकाना हस्तांतर, पता बदलना, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीकरण सभी कार्यों के लिए आरटीओ ऑफिस में काम करवाने का तरीका एक ही है।
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कार्यालय में घुसते ही दलालों ने घेरा

हरहुआ स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में शुक्रवार को प्रवेश करने से पहले दर्जनों लोगों ने घेर लिया। हर किसी का एक ही सवाल था कि क्या काम है। जैसे ही उन्हें जानकारी हुई कि ट्रक का फिटनेस करना है तो काम कराने को लेकर मोलभाव शुरू कर दिया। दूसरी तरफ ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदनों को जांच करने वाले पटल-1 पर लंबी कतार लगी थी। अंदर लिपिक गायब था। बाहर दलाल अभ्यर्थियों को सुविधा शुल्क के जरिए काम सुलभ करने का वादा कर रहे थे। ज्यादातर कमरों में अधिकारी ही मौजूद नहीं थे।

केस- 1

  • सगुनहां का एक युवक ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल)के लिए पिछले एक महीने से चक्कर काट रहा था। दो बार परीक्षा में शामिल हुआ मगर वह फेल हो गया। इसके बाद उसने आरटीओ कार्यालय के बाहर बैठे दलालों से संपर्क किया और 3500 रुपये देने के बाद उसकी फाइल आगे बढ़ गई। परीक्षा में पास हो गया और अब बिना किसी तरह का ड्राइविंग टेस्ट दिए ही उसका लाइसेंस जारी होने का दावा किया जा रहा है।


केस-2

  • फिटनेस टेस्ट के लिए सुबह से वाहनों की लंबी कतार आरटीओ के बाहर लगती है। मगर, सबसे अहम बात कि एप से फिटनेस का नियम अभी वाराणसी में पूरी तरह लागू नहीं है। कार्यालय के बाहरी व्यक्ति ही वाहनों को देखकर उसकी फाइल लिपिकों तक पहुंचाते रहे हैं। फाइल पर एक चिन्ह को नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारी पहचान रहे हैं और बेरोकटोक वह फाइल अप्रूव हो रही है।

कार्यालय में न जांच, न अफसर

कार्यालय में लिपिकों की मनमानी को लेकर किसी तरह की निगरानी नहीं थी। यही कारण है कि बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतार के बाद भी अंदर बाहरी व्यक्तियों की भीड़ थी। सुविधा शुल्क देने वाले बिना कतार से ही काम कराकर निकल रहे थे। अधिकारी कमरों में बैठकर इस बंदरबाट पर आंख मूंदे रहे।

इस संदर्भ में आरटीओ हरीशंकर सिंह का कहना है कि बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध है और ऑनलाइन कामों को तवज्जों दिया जा रहा है। टीम गठित कर अभियान चलाएंगे।

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