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दलालों के बिना नहीं होता काम

Fri, 10 Jun 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 10 Jun 2016 02:00 AM IST
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Brokers do not work without
काउंटर के पास फार्म भरते हुए दलाल।
डीएम विजय किरन आनंद के स्टिंग आपरेशन के बाद भी संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के हालात कमोवेश जस के तस हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो या कोई और काम, दलालों के बिना बात नहीं बनती। डीएल बनवाने के नाम पर पांच सौ से एक हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। कई जगह तो बाकायदा कुर्सियों पर बैठकर दलाल काम करते नजर आते हैं, मानो विभागीय कर्मचारी हों। यह सारा खेल खुलेआम चलता है।
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कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही एक दलाल मिला। डीएल बनवाने के बाबत पूछने पर कहा कि डीएम के स्टिंग आपरेशन के बाद से सख्ती बढ़ गई है। बिना परीक्षा पास किए डीएल नहीं बनेगा। परीक्षा पास करने पर वह डीएल बनवा देगा। लर्निंग डीएल बनवाने के  लिए उसने दो सौ रुपये मांगे। कहा, फार्म भरने से लेकर डीएल बन जाने तक की जिम्मेदारी उसकी। कुछ अन्य दलाल भी बात करना चाहते थे लेकिन नजदीक नहीं आए। वजह, जब एक दलाल किसी ग्राहक से सौदेबाजी कर रहा होता है तो दूसरा दखल नहीं देता।
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डीएल फार्म खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी थी। काउंटर के पास ही एक दलाल चबूतरे पर बैठ कर दो लोगों के फार्म भर रहा था। देखकर लग रहा था कि उसे दफ्तर के अधिकारियों का कोई डर नहीं। कई लोगों से बातचीत के बाद दो ग्राहकों का काम उसने जिम्मे लिया। इनमें भदैनी और लंका से आए युवक शामिल थे। उनसे दलाल ने स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पांच-पांच सौ रुपये लिए। ये पैसे उसने सबके सामने लिए। कुछ अन्य दलाल भी थे जो फार्म खरीदने के लिए लाइन में लगे थे।
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एआरटीओ प्रशासन के दफ्तर के ठीक पीछे एक व्यक्ति अलग बेंच लगाकर बैठा था। वह कई ग्राहकों से घिरा हुआ था और उनके फार्म भर रहा था। लगा कि वह विभाग का ही कर्मचारी होगा लेकिन लोगों से पूछने पर मालूम हुआ वह यहीं के एक कर्मचारी का ड्राइवर है। बताया गया कि अधिकारियों और कर्मचारियों के कई चालक दफ्तर पहुंचते ही दलाली में लग जाते हैं।



वहीं, आरटीओ कार्यालय के इकलौते महिला प्रसाधन कक्ष में ताला बंद रहता है। इसका इस्तेमाल केवल विभागीय महिला कर्मचारी करती हैं,जबकि डीएल बनवाने के लिए महिलाएं भी यहां आती हैं।
 
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