फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Brahminical Patriarchy Not in BHU Syllabus Yet Question Asked in Exam Topics Also Mentioned

UP: BHU के सिलेबस में नहीं है ब्राह्मणवादी पितृसत्ता, फिर भी परीक्षा में पूछा सवाल; इनका भी जिक्र

Wed, 20 May 2026 09:25 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 20 May 2026 09:25 AM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू के सिलेबस को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि बुक रिफरेंस में 'ब्राह्मणवादी' शब्द की जगह केवल 'ब्राह्मण' और 'पैट्रियार्की' शब्द का अलग-अलग उल्लेख किया गया है। इसे लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के बीच बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे वैचारिक बदलाव बता रहे हैं, जबकि प्रशासन ने मामले की समीक्षा की बात कही है।

विज्ञापन
Brahminical Patriarchy Not in BHU Syllabus Yet Question Asked in Exam Topics Also Mentioned
बीएचयू कैंपस में कुछ इस तरह दिखे लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: बीएचयू में एमए इतिहास चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में ब्राह्मणवादी पितृसत्ता पर पूछे गए सवाल पर छात्र संगठनों और राजनेताओं ने भी सवाल उठा दिए। छात्र संगठनों ने बताया कि जो सवाल पूछा गया वह सिलेबस में कहीं नहीं लिखा है। 

विज्ञापन


सिलेबस के बुक रिफरेंस में ब्राह्मणवादी की जगह ब्राह्मण शब्द और पितृसत्ता शब्द का अलग-अलग जिक्र है। इन शब्दों को मिलाया नहीं जा सकता है। सिलेबस के बुक रिफरेंस या उसकी रीडिंग लिस्ट में दिल्ली विश्वविद्यालय की उमा चक्रवर्ती की किताब बियॉन्ड द किंग्स एंड ब्राह्मंस ऑफ एंशियंट इंडिया और लर्नर गेरदा की किताब द क्रिएशन ऑफ पैट्रियार्की की चर्चा है। 
विज्ञापन


सामाजिक विज्ञान संकाय की परीक्षा में सवाल पूछा गया था कि ब्राह्मणवादी पितृसत्ता शब्द से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली? 

विज्ञापन
विज्ञापन

बीएचयू प्रशासन का पक्ष - पूछे गए प्रश्नों को शैक्षणिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। संबंधित प्रश्न ‘वुमेन इन मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री’ पेपर के निर्धारित पाठ्यक्रम में पूछा गया है। किसी भी विषय के संबंध में ज्ञान और विश्लेषणात्मकता के विकास के लिए विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे पाठ्यक्रम में शामिल विषयों के विविध पक्षों और संदर्भों के बारे में जानकारी रखें। सेमेस्टर परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों को शैक्षणिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इस संबंध में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विवाद उत्पन्न नहीं किया जाना चाहिए।

पेपर बनाने वालों को जिम्मेदार बनाया जाए : वहीं, बीएचयू ईसी सदस्य और मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि जो भी प्रश्न बनाता है उसको जिम्मेदार बनाना चाहिए। पिछले साल अशोक कुमार तिवारी बीएचयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य बनाए गए थे।

सिलेबस में है इनका जिक्र 

यूनिट 1 - महिला इतिहास : प्रकृति, स्रोत और एप्रोच। प्रकृति - क्यों महिलाओं का इतिहास। 
महिलाओं का उभरना और विकास से जुड़ा इतिहास। स्रोत-परंपरागत और गैर परंपरागत। 
उदारवादी, मार्क्सवादी, समाजवादी, कट्टरपंथी और उत्तर आधुनिक।
यूनिट 2 - भारत में महिलाओं का इतिहास लेखन। 
यूनिट 3 - 19वीं और 20वीं शताब्दी में महिला-सती प्रथा, विधवा पुर्नविवाह, सहमति की उम्र, दहेज, हिंदू कोड बिल।  
यूनिट 4 - औपनिवेशिक शासन में सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, महिलाओं के लिए बदलते कार्य तरीके और नए अवसर। 
शिक्षा की पहल, सरकार, मिशनरीज, स्थानीय प्रयास, करिकुलम की प्रकृति। 
यूनिट 5 - संगठन, भागीदारी और संघर्ष।
महिला संगठनों की सक्रियता : मुद्दे और प्रभाव।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और महिलाओं की भागीदारी।
सामाजिक और आर्थिक समानता के लिए आंदोलन : तेभागा और तेलंगाना।

बीएचयू ने पूछा टेढ़ा-मेढ़ा सवाल : अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि सुनने में आया है कि बीएचयू में क्वेश्चन पेपर में बड़ा टेढ़ा-मेढ़ा सवाल आया है। बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जो हमारे पूजनीय शिक्षाविद मदन मोहन मालवीय जी ने बनाया, उस संस्थान में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं। ये भारतीय जनता पार्टी की सोची समझी रणनीति है कि पहले से बदनाम करो, फिर उससे समाज में सवाल पूछवाओ। अखिलेश यादव के इस बयान को सोशल मीडिया पर भी जारी किया गया है। 

एबीवीपी ने कहा- यूरो-सेंट्रिक है शब्द, कांग्रेस ने सवाल हटाने की मांग उठाई
बीएचयू की सेमेस्टर परीक्षा में पूछे गए ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से प्राचीन भारतीय महिलाओं की प्रगति में बाधा के सवाल पर छात्र संगठनों और विपक्ष के नेताओं ने नाराजगी जताई है। एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री और शोध छात्र अभय सिंह ने कहा कि सेमेस्टर की परीक्षा में पूर्वाग्रह से ग्रसित और गैर अकादमिक सवाल पूछा गया। 

ब्राह्मणवादी राजनीतिक शब्दावली का कोई भी अकादमिक तर्क या पृष्ठभूमि नहीं है। यह अवधारणा यूरो-सेंट्रिक और औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित है जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति को हीन, पिछड़ा और अत्याचारी साबित करना है ताकि औपनिवेशिक शासन के साथ ही इस्लामिक आक्रमण की विसंगतियों पर पर्दा डाला जा सके। इन्हें प्राचीन भारत में गार्गी, मैत्रेई, लोपामुद्रा, घोषा जैसी विदुषियों के जीवन से परिचय नहीं है।

राजनीतिक एजेंडे के लिए न हो शिक्षा संस्थान : कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने विवि प्रशासन से मांग है कि इस प्रश्न को तत्काल वापस लिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में शिक्षा संस्थानों का उपयोग किसी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे के लिए न हो। 

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों का कार्य समाज को जोड़ना, जागरूक करना और तथ्यपरक इतिहास प्रस्तुत करना होता है, लेकिन आज लगातार कोर्स और इतिहास लेखन में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ता दिखाई दे रहा है। ये भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित लोगों का प्रभाव लगातार बढ़ा है। ब्राह्मणवादी पितृसत्ता जैसे शब्दों से समाज के एक वर्ग विशेष के प्रति नकारात्मक सोच पैदा होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed