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काला दिवस पर रस्म अदायगी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 23 Sep 2016 02:10 AM IST
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प्रतिमा विसर्जन विवाद को लेकर एक साल पहले गोदौलिया में हुए लाठीचार्ज के प्रति विरोध जताने के लिए गुरुवार को काला दिवस मनाने की संतों की घोषणा रस्म अदायगी ही रही। चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था, सतर्कता, संतों के बंटने और प्रशासन की कोशिशों से सड़क पर उतरने और गोदौलिया चौराहे पर सभा करने की उनकी घोषणा सिरे नहीं चढ़ पाई। अन्य मठों के संत और बटुक बाहर नहीं निकले, जबकि पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने गोदौलिया जाने की घोषणा पहले ही वापस ले ली थी। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद श्रीविद्या मठ में नहीं थे। वह अपने गुरु के पास मध्य प्रदेश चले गए थे।
पातालपुरी मठ में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया। यज्ञ दिन के 11 बजे शुरू हुआ। कुछ देर बाद ही जिलाधिकारी विजय किरन आनंद के साथ एसएसपी आकाश कुलहरि मठ पहुंच गए। पं. विष्णु दयाल तिवारी, महेंद्र पुरोहित, प्रदीप, आकाश द्विवेदी शास्त्री के आचार्यत्व में यज्ञ में आहुति दी गई। महंत बालक दास ने दोनों अधिकारियों को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देकर कहा कि प्रदेश में सनातनी परंपराओं के साथ प्रदेश में छेड़छाड़ की जा रही है। ऐसे प्रयास बंद होने चाहिए। कहा कि गंगा में मूर्ति विसर्जन के अधिकार को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके परमहंस सर्वेश्वर शरण, महंत श्रवण दास, साध्वी हरि सिद्धि गिरि, महंत अवध किशोर दास, महंत राघव दास, महंत सिया वल्लभ शरण, महंत रोशन दास समेत कई संत उपस्थित थे। केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ में बटुकों ने बांह पर काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शित किया। इस दौरान प्रमुख आश्रमों और मठों के बाहर मजिस्ट्रेट व सीओ की ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस-पीएसी की तैनाती से महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा के अलावा विद्यामठ से भी संत-बटुक बाहर नहीं निकले।
काला दिवस मनाने की घोषणा करने वाले पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने आरोप लगाया कि महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खां से मिले हुए हैं। इसीलिए उन्होंने काला दिवस मनाने का विरोध किया। संतोष दास को पुलिस ने यज्ञ में आने से रोका नहीं था। वह जानबूझ कर मठ से बाहर नहीं निकले। दरअसल, सतुआ बाबा ने कहा था कि वह यज्ञ में शामिल होने के लिए जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने बाहर निकलने ही नहीं दिया।
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गोदौलिया लाठीचार्ज के बाद प्रतिकार यात्रा में शामिल संतों, बटुकों और नागरिकों पर लादे गए मुकदमे वापस लिए जाएं। सनातनी परंपरा के त्योहारों को प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाकर नष्ट न किया जाए। गंगा में मूर्ति विसर्जन मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित कराकर सुनवाई कराई जाए ताकि सनातन धार्मियों, संतों के सम्मान की रक्षा हो सके।
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पातालपुरी मठ में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया। यज्ञ दिन के 11 बजे शुरू हुआ। कुछ देर बाद ही जिलाधिकारी विजय किरन आनंद के साथ एसएसपी आकाश कुलहरि मठ पहुंच गए। पं. विष्णु दयाल तिवारी, महेंद्र पुरोहित, प्रदीप, आकाश द्विवेदी शास्त्री के आचार्यत्व में यज्ञ में आहुति दी गई। महंत बालक दास ने दोनों अधिकारियों को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देकर कहा कि प्रदेश में सनातनी परंपराओं के साथ प्रदेश में छेड़छाड़ की जा रही है। ऐसे प्रयास बंद होने चाहिए। कहा कि गंगा में मूर्ति विसर्जन के अधिकार को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके परमहंस सर्वेश्वर शरण, महंत श्रवण दास, साध्वी हरि सिद्धि गिरि, महंत अवध किशोर दास, महंत राघव दास, महंत सिया वल्लभ शरण, महंत रोशन दास समेत कई संत उपस्थित थे। केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ में बटुकों ने बांह पर काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शित किया। इस दौरान प्रमुख आश्रमों और मठों के बाहर मजिस्ट्रेट व सीओ की ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस-पीएसी की तैनाती से महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा के अलावा विद्यामठ से भी संत-बटुक बाहर नहीं निकले।
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काला दिवस मनाने की घोषणा करने वाले पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने आरोप लगाया कि महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खां से मिले हुए हैं। इसीलिए उन्होंने काला दिवस मनाने का विरोध किया। संतोष दास को पुलिस ने यज्ञ में आने से रोका नहीं था। वह जानबूझ कर मठ से बाहर नहीं निकले। दरअसल, सतुआ बाबा ने कहा था कि वह यज्ञ में शामिल होने के लिए जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने बाहर निकलने ही नहीं दिया।
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गोदौलिया लाठीचार्ज के बाद प्रतिकार यात्रा में शामिल संतों, बटुकों और नागरिकों पर लादे गए मुकदमे वापस लिए जाएं। सनातनी परंपरा के त्योहारों को प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाकर नष्ट न किया जाए। गंगा में मूर्ति विसर्जन मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित कराकर सुनवाई कराई जाए ताकि सनातन धार्मियों, संतों के सम्मान की रक्षा हो सके।