खून का काला धंधा: मरीज भर्ती नहीं, फिर भी आईएमए ब्लड बैंक से लिया खून, ऐसे चल रहा पूरा खेल
प्लेटलेट्स की कालाबाजारी का गिरोह सक्रिय हो गया है। इनके पास शहर के कई नामचीन अस्पताल के लेटर पैड हैं। संबंधित अस्पताल के स्टाफ, डॉक्टर वार्ड व बेड नंबर तक की जानकारी है। यह भी पता है कि किस बीमारी में कितने रक्त या फिर प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। इससे मिलीभगत की आशंका और गहरा जाती है।
विस्तार
बीएचयू और शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में भर्ती फर्जी डेंगू पीड़ितों के नाम पर खून के काले कारोबार का मामला सामने आया है। जो मरीज भर्ती ही नहीं हैं, उनके नाम पर आइएमए ब्लड बैंक से खून और प्लेटलेट्स लिए गए हैं। ब्लड बैंक प्रशासन ने एक संदिग्ध को चिन्हित किया और उसकी फोटो चस्पा करा दी। साथ ही खून और प्लेटलेट्स देने की व्यवस्था में बदलाव कर दिया। अब जो भी व्यक्ति ब्लड बैंक आ रहा है, उसके मरीज का पूरा ब्योरा संबंधित अस्पताल से लिया जा रहा है। सत्यापन के बाद खून और प्लेटलेट्स दिया जा रहा है। ब्लड बैंक प्रबंधन का कहना है कि खून के काले कारोबार में बड़ा गिरोह सक्रिय है। आइएमए ब्लड बैंकों से सस्ते में खून और प्लेटलेट्स से लेकर उसे महंगे दामों पर जरूरतमंदों को बेचा जा रहा है। इस खेल मे कई बड़े और छोटे अस्पतालों के कर्मचारियों के मिलीभगत की आशंका है।
प्लेटलेट्स की कालाबाजारी का गिरोह सक्रिय हो गया है। इनके पास शहर के कई नामचीन अस्पताल के लेटर पैड हैं। संबंधित अस्पताल के स्टाफ, डॉक्टर वार्ड व बेड नंबर तक की जानकारी है। यह भी पता है कि किस बीमारी में कितने रक्त या फिर प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। इससे मिलीभगत की आशंका और गहरा जाती है। जो सूचना मिली है, उसके मुताबिक आईएमए ब्लड बैंक से 10 से 15 यूनिट प्लेटलेट्स निकल चुके हैं। किसी को कोई शक न हो, इसके लिए बड़े अस्पतालों के लेटर पैड लगाए गए। अस्पताल के डॉक्टर के हस्ताक्षर व उनकी मुहर का इस्तेमाल किया गया। इस मामले का खुलासा खुद आईएमए ब्लड बैंक प्रबंधन ने किया है। साथ ही ब्लड बैंक में कार्यरत कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ब्लड बैंक प्रबंधन का कहना है कि एक युवक को पकड़ा गया, तब फर्जीवाड़ा सामने आया। पता चला कि गिरोह सक्रिय है। गिरोह के सदस्य अपने फायदे के लिए मरीज व उनके तीमारदारों को निशाना बना रहे हैं। जो प्लेटलेट्स (एसडीपी) ब्लड बैंक से दस हजार में मिलते हैं, वही गिरोह के सदस्य जरूरतमंद को 20 से 25 हजार रुपये में बेचते हैं।
पंजीकृत अस्पतालों का फायदा उठाया
आईएमए ब्लड बैंक से करीब 200 पंजीकृत अस्पताल जुड़े हैं। अस्पताल से ब्लड या फिर प्लेटलेट्स की मांग की जाती है तो इन्कार नहीं किया जाता है। इसका फायदा सक्रिय गिरोह के सदस्यों ने उठाया है।
अस्पताल से पूछ रहे मरीज का ब्योरा, तब जारी हो रहा प्लेटलेट्स
खून और प्लेटलेट्स का काला धंधा पकड़ में आ गया है। अब ब्लड व प्लेटलेट्स देने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। जो कोई भी अस्पताल का लेटरपैड लेकर आ रहा है,फोन से सत्यापित किया जा रहा। इसके बाद ही खून और प्लेटलेट्स दिया जा रहा।- डॉ राहुल चंद्रा, अध्यक्ष आईएमए
आईएमए बल्ड बैंक ये है दर
होल ब्लड 1200
पैक्ड रेड सेल 1200
फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा 300
रैंडम डोनर प्लेटलेट कंसट्रेट 400
एसडीपी 9000
केस-1
बीएचयू अस्पताल से नौ साल की एक बच्ची अग्रिमा को दो यूनिट सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की जरूरत बताई गई। एक फार्म साथ युवक आइएमए ब्लड बैंक आया। कर्मचारियों को जब शक हुआ तो उनहोंने हकीकत का पता लगाना शुरू किया। बच्ची के भर्ती होने की जानकारी नहीं मिली। इस युवक को वापस करा दिया गया। अब उसकी फोटो ब्लड बैंक में चस्पा की गई है।
केस-2
एपेक्स हॉस्पिटल भिखारीपुर में संचालित ब्लड बैंक के लेटर पैड पर दो यूनिट खून की जरूरत बताई गई। 29 सितंबर 2023 को एक युवक आईएमए ब्लड बैंक पहुंचा। मरीज का नाम विनोद कुमार(30) बताया और कहा कि बेड नंबर पांच पर भर्ती है। लेटर पर डॉक्टर के हस्तक्षा व मुहर लगाई गई। खून चला गया। बाद में आईएमए ने ने सत्यापन कराया तो पता चला कि एपेक्स में विनोद नाम का कोई मरीज ही नहीं भर्ती है।
केस-3
भोजूबीर स्थित त्रिमूर्ति हॉस्पिटल से 21 सितंबर को युवक आईएमए ब्लड बैंक आया। यहां एनीमिया से ग्रसित 74वर्षीय इंद्रावती देवी के लिए दो यूनिट ब्लड की जरूरत बताई गई। डॉक्टर के हस्ताक्षर व अस्पाल की मुहर के आधार पर खून दिया गया। बाद में सत्यापन हुआ तो मामला फर्जी निकला। पता चला कि अस्पताल में इंद्रावती देवी नाम की मरीज नहीं है।