भाजपा ने यह तरीका अपना कर हासिल की सबसे ज्यादा सीटें, पूर्वांचल में कांग्रेस का नहीं खुला था खाता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर काशी से लोकसभा चुनाव 2019 लड़ रहे हैं। आजमगढ़ से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता की विरासत बचाने के लिए मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने अपनी खोई जमीन हासिल करने के लिए राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी का प्रभारी बनाया है।
देश की राजनीति का केंद्र बन चुकी काशी से सियासी दल लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल और बिहार को साधने की कोशिश करेंगे। भाजपा ने 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में यही तरीका अपना कर सबसे ज्यादा सीट हासिल की थीं।
पूर्वांचल की ज्यादातर सीटों पर छठवें और सातवें चरण में मतदान होगा। ऐसे में पांचवे चरण की सभी राजनीतिक दलों के नेता पूर्वांचल में ही जुटेंगे। प्रधानमंत्री की काशी में मौजूदगी के जरिए भाजपा पूर्वांचल के साथ ही बिहार को साधना चाहेगी। वहीं, विपक्षी दल काशी से ही मोदी और भाजपा की घेराबंदी करेंगे।
26 में से 25 सीटों पर आसीन हैं भाजापा और उसके सहयोगी दल
वर्तमान में पूर्वांचल की 26 में 25 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसद हैं। इसमें वाराणसी से पीएम मोदी, गाजीपुर से रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, चंदौली से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और मिर्जापुर से अपना दल (एस) की नेता केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल हैं। पूर्वांचल की एक मात्र सीट आजमगढ़ सपा के कब्जे में है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद हैं।
पूर्वांचल में जातिगत समीकरण के तहत गठबंधन में उतरी सपा-बसपा की सफलता भविष्य के गर्भ में है मगर, उपचुनाव में गोरखपुर जीतने के बाद सपा ने अपनी जमीन मजबूत की थी। बसपा से गठबंधन के सहारे सपा पिछले चुनाव में रह गई सीटों पर वापसी का प्रयास करेगी। इसी तरह बसपा अपने कैडर वोट सहेज रही है। पार्टी का पहला प्रयास होगा कि वह इस क्षेत्र में दोबारा खाता खोले।
पूर्वांचल की लोकसभा सीटें
वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, आजमगढ़, घोसी, लालगंज, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर, चंदौली, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बांसगांव, बहराइच, डुमरियागंज, महराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़।
लोकसभा चुनाव 2009 और 2014 में प्रमुख दलों को मिली सीटें
भाजपा को 2009 में 9 तो 2014 में 23 सीटें मिली थी, अपना दल को 2009 में 0 तो 2014 में 2 सीटें मिली थी। वहीं, सपा को 2009 में 9 तो 2014 में 1 ही सीट मिली थी। कांग्रेस को 2009 में 4 तो 2014 में एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। वहीं, बसपा की झोली में 2009 में 4 तो 2014 में 0 सीट गई थी। हालांकि पूर्वांचल की 23 सीटों पर जीतने वाली भाजपा 2018 में गोरखपुर और फूलपुर सीट के उपचुनाव में हार गई थी।
2017 के विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों की स्थिति
भाजपा को पूर्वांचल में 87 सीटें तो अपना दल को 9 सीटें मिली थी। वहीं ओमप्रकाश राजभर की पार्टी भासपा को सिर्फ 4 सीटें ही मिली थी। सपा सिर्फ 14 सीटों पर अपना कमाल दिखा पाई थी। वहीं, बसपा को सिर्फ 10 सीटें ही मिली थी। 2017 में कांग्रेस पूर्वांचल में अपना खाता ही नहीं खोल पाई थी। वहीं, अन्य दलों ने 6 सीटों पर कब्जा किया।