फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Birth anniversary Munshi Premchand symbol of the story do bailon ki katha bad condition in lamahi varanasi

मुंशी प्रेमचंद की जयंती: लमही में न बाग बचा न बैठकी; कुआं भी बदहाल; आज गुलजार हुआ कथा सम्राट का आवास

Wed, 31 Jul 2024 10:22 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 31 Jul 2024 10:22 AM IST
सार

Varanasi News: आज कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती है। वाराणसी के लमही स्थित उनके आवास पर विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। संगोष्ठी भी होगी। इस दौरान उनकी प्रमुख कहानियों का मंचन भी होगा। भारतीय संस्कृति और गांव की धरोहर को प्रेमचंद ने अपनी कहानी में संजोया है। आइए जानते हैं क्या हाल है उनकी कहानियों और उनके आवास का...

विज्ञापन
Birth anniversary Munshi Premchand symbol of the story do bailon ki katha bad condition in lamahi varanasi
मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही के प्रवेश द्वार पर बने उद्यान में टूटी पड़ीं मूर्तियां। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं से कभी ब्रिटिश हुकूमत तो कभी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। किसानों और शोषितों की आवाज को अपनी कलम से बुलंद किया। 

विज्ञापन


आज भी देश-दुनिया में उनकी रचनाएं पढ़ी और गुनी जाती हैं। उनकी कहानियों के ज्यादातर किरदार और परिवेश उनके और उनके गांव लमही के इर्द-गिर्द ही घूमते हैं। लेकिन, अब उन कहानियों की निशानियां इस गांव में मिलनी मुश्किल हैं। 
विज्ञापन


गांव में अब शहर का स्वरूप ले लिया है। अब यहां न बाग बचा न बैठकी, दो बैलों की कथा की निशानी कुआं भी बदहाल हो चुका है। गांव ने शहर का रूप ले लिया है। कॉलोनियां बस गईं, बड़े-बड़े बाजार भी खुल गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुंशी प्रेमचंद ने अपनी ज्यादातर कहानियां अपने गांव में ही लिखीं। उनके निधन के बाद उनसे जुड़े गांव की धरोहरों को बमुश्किल ही संजोया गया है। अब उनके गांव का शहरीकरण हो चुका है। अब यहां आधा दर्जन कॉलोनियां हैं। 

उनकी जन्मस्थली के पास अगर कुछ बचा है तो सिर्फ उनका घर। जो जीर्णशीर्ण हाल में है। वहीं, जिस कुएं पर कभी बैठकर प्रेमचंद ने दो बैलों की कथा लिखी, वह भी दरक गया है।

Birth anniversary Munshi Premchand symbol of the story do bailon ki katha bad condition in lamahi varanasi
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का आवास। - फोटो : अमर उजाला

हमारा समाज स्मृति विरोधी है : प्रो. विभूति
स्मारक स्थल की देखरेख कर रहे सुरेश चंद दुबे ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद का प्रिय खेल गिल्ली डंडा था। अपने घर के पास बगीचे में वह गिल्ली डंडा खेलते थे। इस पर कहानी भी लिखी। लेकिन, अब वह बाग नहीं है। वहां शोध संस्थान बन गया है। 

उन्होंने बताया कि मैकू की कहानी पांडेयपुर के पास की नई बस्ती में लिखी। पांडेयपुर के पास राय साहब के बगीचा और पास की हरिजन बस्ती में रंगभूमि की रचना की। लेकिन, आज उनकी वो स्मृतियां वहां नजर नहीं आतीं। 

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, बर्धा के पूर्व कुलपति रहे प्रो. विभूति नारायण राय ने कहा कि हमारा समाज स्मृति विरोधी है। ऐसे महान साहित्यकार के घर और उनकी स्मृतियों को मूल स्वरूप में रखना चाहिए। 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे प्रो. राजेंद्र कुमार ने बताया कि परिवर्तन के दौर में भले प्रेमचंद से जुड़ी चीजें मिट गई हों, मगर उनके प्रश्न आज भी जिंदा है। बीएचयू हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि विकसित समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसे लेखकों की स्मृतियों को संवारे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। शोध केंद्र बनने के बाद भी वह मूर्तरूप नहीं ले सका है।

अंतिम सांस ली रामकटोरा में, वहां भी नहीं बचीं स्मृतियां
मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन का अंतिम समय रामकटोरा में बिताया। डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि यहीं पर उनका प्रेस था। जहां वह हंस पत्रिका का संपादन करते थे। रामकटोरा कुंड के सामने वहां पर अब स्कूल बन गया है। अब यहां उनकी निशानी के तौर पर कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने यहां पर मुंशी प्रेमचंद पार्क बनाने को कहा था लेकिन वो पार्क सुंदरपुर के बृजइंक्लेब कॉलोनी में बना दिया गया।

इन शहरों में भी रहकर की थी रचनाएं
मुंशी प्रेमचंद ने बनारस के अलावा कई शहरों में भी रहकर रचनाएं कीं। डॉ. संजय के मुताबिक जब वह शिक्षा अधिकारी के रूप में कुछ शहरों में रहे तो वहां पर भी लिखते थे। उन्होंने लखनऊ, महोबा, कानपुर, लखनऊ, आजमगढ़, गोरखपुर, कोलकाता, पटना आदि में रहकर रचनाएं कीं।

Birth anniversary Munshi Premchand symbol of the story do bailon ki katha bad condition in lamahi varanasi
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के आवास परिसर में कुआं। - फोटो : अमर उजाला

लमही में जीवंत हुए मुंशी प्रेमचंद की कहानियाें के किरदार, मंचन ने मोहा जन मन
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती बुधवार को उनके पैतृक गांव लमही में मनाई गई। आमजनों के साथ साहित्यकार और प्रशासनिक अफसर भी उनके स्मारक पर श्रद्धा के पुष्प अर्पित कर नमन किया। 

गांव में उनकी कहानियों के किरदार भी जीवंत हुए। मंत्र, पंचपरमेश्वर आदि कहानियों का स्कूल बच्चे मंचन किया। मंगलवार को जयंती समारोह की तैयारियां देर रात तक चलती रहीं।

कई माह से अंधेरे में प्रेमचंद की स्मारक स्थली पड़ी थी। वहां जाने वाले मार्ग की लाइटें खराब थीं, लेकिन जयंती के ठीक एक दिन पहले मंगलवार को नगर निगम और संस्कृति विभाग ने आनन-फानन में बिजली दुरुस्त करा दी।



साफ-सफाई के बाद सड़के किनारे चूने का छिड़काव कराने के साथ पानी के टैंकर आदि की व्यवस्था करा दी गई। क्षेत्रीय पार्षद ज्ञानचंद ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर टेंट और बिजली के अलावा पानी की व्यवस्था की गई है।

संस्कृति विभाग के अधिकारी अमित द्विवेदी ने बताया कि बुधवार को सुबह आठ बजे से कार्यक्रम शुरू हो गया था। पुष्पांजलि, संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। शाम को स्मारक स्थल पर दीपांजलि कार्यक्रम हुआ। 

संगोष्ठी में बीएचयू हिंदी के प्रो. वशिष्ठ अनूप, पूर्व प्रो. सदानंद शाही, दयानिधि मिश्र, प्रीति जायसवाल आदि विचार रखे। वहीं, प्रेरणा कला मंच के अलावा बनारस, जौनपुर के स्कूल के बच्चे मंत्र, पंचपरमेश्वर आदि कहानियों का मंचन किया। कजरी और बिरहा गायकों की भी प्रस्तुतियां हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed