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काशी के शिवालय: कुतुबमीनार से भी ऊंचा है बीएचयू का विश्वनाथ मंदिर, नर्मदेश्वर बाणलिंग के रूप में विराजते हैं बाबा विश्वनाथ
Tue, 10 Aug 2021 04:10 PM IST
हरि User
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: हरि User
Updated Tue, 10 Aug 2021 04:10 PM IST
सार
यह मंदिर दिल्ली के ऐतिहासिक कुतुबमीनार से भी 13 फीट ऊंचा है। कुतुबमीनार की ऊंचाई 239 फीट है।
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बीएचयू का विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिव स्वरूप में विराजित काशी के शिव मंदिरों की कहानियां भी अलग-अलग हैं। महामना की बगिया में स्थित श्वेत संगमरमर से बना काशी विश्वनाथ मंदिर तो दिल्ली के कुतुबमीनार से भी ऊंचा है।
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यहां पर महादेव नर्मदेश्वर बाणलिंग के रूप में विराजते हैं। बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह का कहना है कि भारत की समस्त वास्तुशैलियों द्रविण, नागर और बेसर को समेटे हुए है बीएचयू स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर। यह मंदिर दिल्ली के ऐतिहासिक कुतुबमीनार से भी 13 फीट ऊंचा है। कुतुबमीनार की ऊंचाई 239 फीट है।
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महामना ने भेजा था शिलान्यास के लिए न्योता
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि महामना ने 1927 में गोस्वामी गणेशदास के हाथों विश्वविद्यालय परिसर में विश्वनाथ मंदिर के शिलान्यास के लिए स्वामी कृष्णम को न्योता भेजा। तपस्वी कृष्णम को मनाने में गणेशदास को चार साल लग गए। 11 मार्च 1931 को स्वामी कृष्णम के हाथों मंदिर का शिलान्यास हुआ।
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मंदिर निर्माण के लिए बिड़ला ने किया था वादा
मंदिर के निर्माण के लिए उद्योगपति जुगल किशोर बिड़ला ने महामना से वादा किया था और उसको पूरा किया। 1954 तक शिखर को छोड़कर मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया। 17 फरवरी 1958 को महाशिवरात्रि के दिन मंदिर के गर्भगृह में नर्मदेश्वर बाणलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के साथ भगवान विश्वनाथ की स्थापना मंदिर में हो गई। भारत कला भवन में मंदिर का ब्लू प्रिंट सुरक्षित है।