BHU: कुलपति बोले- भोजपुरी भाषा के ऐसे शब्द ढूंढें जो दूसरी भाषाओं में न मिलें, इसे रिसर्चर की नजर से देखें
Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भोजपुर कार्यशाला में लोकगीत और चित्रकला विषय पर गहनता से चर्चा हुई। वक्ताओं ने अपने-अपने स्तर से जानकारीपरक बातें बताईं। कुलपति ने भी इस पर रिसर्च बढ़ाने की सलाह दी।
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BHU University Varanasi: बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र में आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला में वक्ताओं ने लोकगीत और चित्रकला विषय पर अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भोजपुरी भाषा के ऐसे शब्द को ढूंढना होगा जो दूसरी भाषाओं में न मिलें।
भोजपुरी लोकगीत और चित्रकला : पाठ, गायन और चित्रकला अंतर-विषयक कार्यशाला में बीएचयू कुलपति ने कहा कि किसी भी कार्यशाला की सार्थकता का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसे व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए। जिससे कि दूर दराज में बैठे लोग जानकारी ले सकें। हमें अपनी भाषा को रिसर्चर की नजर से देखना चाहिए। भाषा और विभागों को इतना बेहतर बनाना है कि विभिन्न विषयों, पृष्ठभूमियों और देशों के लोग इसकी तरफ आकर्षित हों।
संगोष्ठी का प्रतिवेदन केंद्र के समन्वयक और बीएचयू हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. प्रभाकर सिंह ने किया। स्वागत डॉ. केए चंचल ने किया। प्रो. सुषमा घिल्डियाल, प्रो. डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. नीरज खरे, डॉ. रामनारायण तिवारी, पृथ्वीराज सिंह, डॉ. उर्वशी आदि मौजूद रहीं।
परीक्षा केंद्र बनाने के लिए आवेदन करने वाले 42 से ज्यादा विद्यालयों का नहीं हो पाया सत्यापन
यूपी बोर्ड परीक्षा में केंद्र बनाने के लिए विद्यालयों का भौतिक सत्यापन जांच समिति की ओर से किया जा रहा है। 17 नवंबर सत्यापन की रिपोर्ट डीआईओएस कार्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि थी। समय सीमा बीत जाने के बाद भी 42 से ज्यादा विद्यालयों का सत्यापान नहीं हो पाया है। सोमवार को बोर्ड की वेबसाइट पर रिपोर्ट अपलोड करने का अंतिम दिन है।
डीआईओएस कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में केंद्रीय कारागार समेत कुल 404 विद्यालयों ने केंद्र बनने के लिए आवेदन किया है। डीआईओएस भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि समिति की ओर से सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। कुछ विद्यालय रह गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।