बीएचयू कुलपति और छात्र के बीच बातचीत का ऑडियो वायरल- 'महामना रुपयों का पेड़ लगाते तो सब फ्री कर देते'
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काशी हिंदू विश्विद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रोफेसर राकेश भटनागर और छात्र के बीच बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। बातचीत के दौरान छात्रों ने जहां बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में हेल्थ डायरी में निशुल्क सुविधा के बावजूद बीएचयू अस्पताल में पंजीकरण शुल्क जमा करने की बात करते हुए अपनी समस्या का समाधान करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं कुलपति ने जवाब बेहद चौंकाने वाला दिया है। वायरल ऑडियो में कुलपति ने कहा है कि महामना ने कैंपस में आम का पेड़ तो लगाया लेकिन रुपयों का पेड़ लगा जाते तो सब कुछ फ्री कर दिया जाता। करीब 4 मिनट 15 सेकंड की इस बातचीत में कुलपति ने बीएचयू के बजट से ज्यादा बिजली का बिल होने और अस्पताल में इलाज के लिए खुद कभी का पैसा खर्च करने को कहा है।
वायरल ऑडियो के अंश -
छात्र- सर छात्रों की हेल्थ डायरी का मामला था। आपको पत्र भी दिया था, मेल भी। क्या हुआ सर। छात्र 350 रुपये एक बार मे जमा करते हैं। निशुल्क इलाज मिलता है। पर्ची कटवानी पड़ रही है।
कुलपति- आप तो जानते है कि सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करना ही है। इसीलिए केवल 25-25 लोगों को बुलाते हैं। यूजीसी केवल 60 करोड़ देता है। बीएचयू और बरकछा का बिजली का बिल 66 करोड़ आता है। बाकी क्या बचा। घाटे की अर्थव्यवस्था हो गई, जो कांग्रेस ने चलाई है। अगर कुछ नहीं चार्ज करेंगे तो अस्पताल बंद हो जाएगा। आप चाहते हैं कि अस्पताल बंद हो जाए।
छात्र- इसके पहले भी जो लोग आए ऐसा नहीं किए सर। तब भी व्यवस्था चल रही थी।
कुलपति- विवि में पढ़ने वालों के लिए महामना जी आम का पेड़ तो लगा गए, मैं चाहता था कि कुछ रुपयों का भी पेड़ अगर लगा जाते तो हम सब कुछ फ्री कर देते। कोई प्रॉब्लम नहीं होता। यह मजबूरी है। मैं भी पैसा देकर ही अस्पताल में दिखाता हूं। 500 रुपये महीने देते हैं। बच्चों को 20 रुपये देने से पहले खुद भी देते हैं।
छात्र- हेल्थ डायरी से इलाज को लेकर कुछ और वैकल्पिक व्यवस्था बनाइए। निशुल्क को ही लागू करें।
कुलपति- आप एक काम करिए सरकार को कहिए कि 60 करोड़ की बजाय 70 करोड़ साल में दे दे। जब आप करवा देंगे तो मैं यह व्यवस्था बंद कर दूंगा।
छात्र- सर आप अथॉरिटी है, आप अधिकृत हैं।
कुलपति- हम तो हर साल लिखकर मांग भेजते हैं कि 60 नहीं 120 करोड़ दो। कोविड में सरकार को टैक्स कम मिला है। अगले साल हो सकता है 60 करोड़ भी न मिले।
छात्र- सरकार के माध्यम से अगर आप मांग नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दीजिए।
कुलपति- सुन लीजिए। ऐसा है अगर यही करने से यहां का बजट बढ़ जाता तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। मुझे मालूम है कि कोविड के बाद स्थिति बहुत खराब है।
छात्र- इसके पहले आखिर कैसे चल रहा था सर।
कुलपति- जैसे-जैसे अस्पताल बढ़ता जाता है, बिजली का खर्चा भी बढ़ता जाता है। अस्पताल में सबसे अधिक बिजली खर्च होती है। इसको समझना पड़ेगा। हम हर मीटिंग में बजट बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
छात्र- एक ही निवेदन है। आपसे मिलना चाहते हैं सर।
कुलपति- मिलकर क्या करेंगे, यही बात कहेंगे न जो फोन पर बता रहे हैं।
छात्र- पहले निःशुल्क इलाज मिलता था। छात्र, शिक्षक, कर्मचारी का। कुछ करिए।
कुलपति- चलिए इस बारे में छात्र अधिष्ठाता और अस्पताल से इस बारे में बात होगी कुछ कराया जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।
(नोट-यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। अमर उजाला इसकी कोई पुष्टि नही करता है।)
नहीं उठा कुलपति का फोन, चांसलर बोले- उदाहरण के तौर पर वीसी ने कही होगी यह बात
ऑडियो वायरल और इसमें महामना द्वारा रुपयों के पेड़ लगाने वाले मामले पर जब कुलपति से बातचीत करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा और उन्होंने मैसेज का भी कोई जवाब नहीं दिया। उधर इस बारे में बीएचयू के चांसलर जस्टिस गिरधर मालवीय से बातचीत करने पर वह कुलपति के बचाव में दिखे। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई वायरल ऑडियो उन्होंने सुना तो नहीं है लेकिन अगर कुलपति ने छात्रों से बातचीत में ऐसा कहा भी होगा तो वह केवल उदाहरण के तौर पर कहा होगा। चांसलर ने कहा कि छात्रों को भी इस बात को समझना चाहिए।
छात्रों ने की राष्ट्रपति से शिकायत कार्यवाही की मांग
बीएचयू में कुलपति द्वारा महामना पर बातचीत में टिप्पणी करने को लेकर छात्रों ने इसकी बिरला हॉस्टल के गेट पर बैठक कर इसकी निंदा की है। साथ ही राष्ट्रपति से शिकायत कर कार्यवाही की मांग भी की है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में शिक्षक, छात्र, कर्मचारियों के लिए निशुल्क इलाज की व्यवस्था है और इसके लिए हेल्थ केयर के नाम पर एक निश्चित धनराशि जमा होती है। ऐसे में इलाज की व्यवस्था को लेकर कुलपति द्वारा यह बात कहा जाना निंदनीय है।