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वैदिक विज्ञान केंद्र का तीसरा स्थापना दिवसः वेदों में निहित विज्ञान पर होगा शोध, वक्ताओं ने कहा- मानव जीवन को नई दृष्टि देना इस केंद्र का उद्देश्य
Sat, 18 Sep 2021 10:51 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sat, 18 Sep 2021 10:51 PM IST
सार
बीएचयू स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में प्रो. हृदय रंजन ने कहा कि वेदों में निहित विज्ञान पर शोध करते हुए मानव जीवन को नई दृष्टि देना ही इस केंद्र का उद्देश्य है।
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वैदिक विज्ञान केंद्र का तीसरा स्थापना दिवस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वैदिक विज्ञान केंद्र के तीसरे स्थापना दिवस पर गणपति सहस्त्र नाम से गणेशार्चन किया गया। इसके बाद आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने केंद्र से जुड़े कार्यों, योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बतौर सारस्वत अतिथि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में वेद विभाग के आचार्य प्रो. हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि वेदों में निहित विज्ञान पर शोध करते हुए मानव जीवन को नई दृष्टि देना ही इस केंद्र का उद्देश्य है।
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स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में प्रो. हृदय रंजन ने कहा कि वेद अपौरूषेय है और शुरू में भाषा और लिपि के रुप में नहीं थे बल्कि प्राणरूप ध्वनि रूप में थे। अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. कमलेश झा ने कहा कि वेद ज्ञान है और तंत्र विज्ञान हैं।
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प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि वेद अपने आप में अहम है। विश्व के कई देश जैसे चेक गणराज्य, रूस आदि में अकाटय सत्य के लिए बोले जाने वाले शब्द के रूप में वेद का प्रयोग होता है। वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने केंद्र के भावी लक्ष्य और एआईसीटीई को भेजे गए शोध प्रस्तावों की जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. आशाराम त्रिपाठी, प्रो. सुमन जैन, प्रो. विंध्याचल पांडेय, प्रो. मुकुट मणि त्रिपाठी, डा. अभय कुमार सिंह, प्रो. एके जोशी आदि को सम्मानित किया गया।
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