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अपने ही फूलों की ‘खुशबू’ भूली महामना की बगिया
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बीएचयू में 17 और 18 जनवरी को होने वाले पुरातन छात्र समागम में देश-विदेश से कई पुरातन छात्रों को न्योता दिया गया है, लेकिन यहां से निकली कई हस्तियों को बीएचयू ने नजरअंदाज कर दिया है। बृहस्पतिवार देर शाम तक लोग अपने ही विश्वविद्यालय में बुलाए जाने के निमंत्रण का इंतजार करते रहे। इसमें कुछ तो ऐसे हैं, जिन्होंने 1950-1960 के बीच पढ़ाई की और देश-विदेश में अपनी प्रतिभा के बल पर न केवल अपना बल्कि विश्वविद्यालय का भी मान बढ़ाया।
अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम की तैयारी अब अंतिम चरण में है। कमेटियां बनाकर पुरातन छात्रों को निमंत्रण भी भेजे गए, कुछ विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया जाएगा। विश्वविद्यालय की ओर से 1500 पुरातन छात्रों को बुलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कई ऐसे पुरातन छात्र हैं, जो अभी भी समारोह में बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में 1950 में पहले बैच के छात्र और मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय ग्वालियर के पूर्व कुलपति प्रो. चितरंजन ज्योतिषी और वर्ष 1953 में इसी संकाय के छात्र रहे पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य को भी समागम में नहीं बुलाया गया है।
बीएचयू में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम का शुभारंभ शुक्रवार को होगा। स्वतंत्रता भवन में सुबह 10 बजे नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत समारोह का उद्घाटन करेंगे। 18 जनवरी को समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय मुख्य अतिथि होंगे। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति जस्टिस गिरधर मालवीय करेंगे।
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दो दिवसीय समारोह के दौरान खगोलविद पद्म विभूषण प्रोफेसर जयंत वी. नर्लिकर समेत आठ लोगों को विशिष्ट पुरातन छात्र समागम पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाएगा। इसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स आफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल डॉ. ओंकार राय, गायिका पद्मश्री डॉ सोमा घोष, प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. संगीता शंकर, लंदन में आईएमआर ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक अनिरुद्ध मिश्रा, एसईआरबी, नई दिल्ली के सचिव प्रोफेसर संदीप वर्मा, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख प्रोफेसर अरविंद गुप्ता का नाम भी शामिल है।
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अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम की तैयारी अब अंतिम चरण में है। कमेटियां बनाकर पुरातन छात्रों को निमंत्रण भी भेजे गए, कुछ विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया जाएगा। विश्वविद्यालय की ओर से 1500 पुरातन छात्रों को बुलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कई ऐसे पुरातन छात्र हैं, जो अभी भी समारोह में बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में 1950 में पहले बैच के छात्र और मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय ग्वालियर के पूर्व कुलपति प्रो. चितरंजन ज्योतिषी और वर्ष 1953 में इसी संकाय के छात्र रहे पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य को भी समागम में नहीं बुलाया गया है।
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बीएचयू में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम का शुभारंभ शुक्रवार को होगा। स्वतंत्रता भवन में सुबह 10 बजे नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत समारोह का उद्घाटन करेंगे। 18 जनवरी को समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय मुख्य अतिथि होंगे। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति जस्टिस गिरधर मालवीय करेंगे।
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दो दिवसीय समारोह के दौरान खगोलविद पद्म विभूषण प्रोफेसर जयंत वी. नर्लिकर समेत आठ लोगों को विशिष्ट पुरातन छात्र समागम पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाएगा। इसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स आफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल डॉ. ओंकार राय, गायिका पद्मश्री डॉ सोमा घोष, प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. संगीता शंकर, लंदन में आईएमआर ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक अनिरुद्ध मिश्रा, एसईआरबी, नई दिल्ली के सचिव प्रोफेसर संदीप वर्मा, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख प्रोफेसर अरविंद गुप्ता का नाम भी शामिल है।