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वैस्कुलर सर्जरी में स्पेशियलिटी पर जोर देने की जरूरत

Mon, 07 Oct 2019 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 01:15 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू में थोरेसिक एवं वैस्कुलर सोसाइटी के 17वें वार्षिक अधिवेशन में वैस्कुलर सर्जरी से जुड़े अहम बिंदुओं पर चिकित्सकों ने मंथन किया। इसमें ओपीडी में मरीजों के देखने, ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के साथ ही इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हुई। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. रमाकांत ने चिकित्सकों को मरीजों के साथ बेहतर संबंध बनाने के सुझाव के साथ ही सर्जरी के क्षेत्र में स्पेशियलिटी पर जोर देने की बात कही।
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केएन उडप्पा सभागार में आयोजित अधिवेशन में लखनऊ से आए डॉ. रमाकांत ने कहा कि देश में वैस्कुलर सर्जन की कमी है, इस वजह से मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समय जहां पांच हजार सर्जन की जरूरत है, वहां महज 500 ही काम कर रहे हैं। बताया कि चिकित्सकों को मरीजों के साथ रिश्ता मजबूत करने की जरूरत है। इसमें उनकी पूरी बात सुनकर ही जवाब देने, उन्हें खुशियां देने की जरूरत है। कहा कि चुनौतियों से घबराने की जरूरत नहीं बल्कि अपने काम में सजगतापूर्वक आगे बढ़ते रहना होगा। इससे पहले रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला ने वैस्कुलर स्पेशियलिटी को समय की मांग बताया। रोहतक से डॉ. अश्वनी के दलाल ने फेफड़े के संक्रमण और उसके इलाज के बारे में बताया। अलग-अलग सत्रों में तिरुपति से आई प्रो. आभा चंद्रा ने फेफड़ों के फफदीय संक्रमण, डा. एसके तिवारी, डॉ. आशीष वर्मा, डॉ.एमजी वशिष्ठ ने वेन नसों के फूलने के बारे में बताया। अतिथियों का स्वागत प्रो. एके खन्ना और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. पुनीत ने किया। इस दौरान प्रो. टीके लहरी, डॉ. सिद्धार्थ लखोटिया, डॉ. दिव्या खन्ना, डॉ. राहुल खन्ना, डॉ. सीमा खन्ना, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. एसके जैन आदि मौजूद रहे।
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मेडिकोलीगल में सेंट्रल एक्ट जरूरी - प्रो. शाह
अधिवेशन में भाग लेने आए इंडियन मेडिको लीगल एंड ईथिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. राजेश सी शाह ने बताया कि मेडिकोलीगल को लेकर जिस तरह हर राज्य अपना-अपना एक्ट लागू कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। जरूरी है कि सेंट्रल एक्ट को लागू किया जाए। बातचीत में कहा कि हर जगह अलग-अलग एक्ट होने का नुकसान न केवल चिकित्सक बल्कि मरीजों को भी होता है। अब तक केवल 43 में से 26 राज्य में ही एक्ट बन सका है। उपभोक्ता फोरम में भी इस तरह के मामले जाते हैं, जिसमें कभी कभी जागरूकता की कमी की वजह से मरीजों और चिकित्सकों के बीच संबंध भी खराब हो रहे हैं। कहा कि एक्ट के बारे में चिकित्सकों के साथ ही मरीजों को भी जागरूक करने की जरूरत है।
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