{"_id":"5d66e1798ebc3e013874742a","slug":"bhu-varanasi-news-vns4806608158","type":"story","status":"publish","title_hn":"कवियों में आती जा रही है राजनीतिक उदासीनता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कवियों में आती जा रही है राजनीतिक उदासीनता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। बीएचयू हिंदी विभाग में बुधवार को कविता संग्रह क्षीरसागर में नींद का लोकार्पण जाने माने कवि मदन कश्यप ने किया। हिंदी विभाग के प्रोफेसर श्रीप्रकाश शुक्ल के इस संग्रह में बनारस की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासतों का उल्लेख करने के साथ ही संवेदनाओं को शामिल किया गया है। बतौर मुख्य अतिथि कवि मदन कश्यप ने प्रो. शुक्ल को परंपरा बोध का कवि बताते हुए कहा कि अब अधिकांश कवियों ने मौलिक ढंग से सोचना बंद कर दिया है।
हिंदी विभाग के सेमिनार हाल में आयोजित समारोह में मदन कश्यप ने कहा कि आज अधिकांश कवियों में राजनीतिक उदासीनता आती जा रही है, लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ल की सांस्कृतिक चेतना में एक राजनीतिक अंतरधारा मौजूद है। सत्ता जिन चीजों के बारे में जितना चाहती है उतना ही हम सोचने लगे हैं। अध्यक्षता करते हुए कवि ज्ञानेंद्र पति ने प्रो. शुक्ल के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कविता को गद्य के निकटतम बिंदु तक ले जाने की कोशिश की है। ज्ञानेंद्र पति ने पक्का महाल पर लिखी कविताओं को श्रेष्ठ बताया। इस दौरान प्रो. वशिष्ठ अनूप, कवि कृष्णमोहन झां, डॉ. रामाज्ञा शशिधर, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. विंध्याचल यादव ने कविता संग्रह के बारे में अपने विचार रखे। अतिथियाें का स्वागत शोध छात्र जगन्नाथ दूबे, संचालन डॉ. वंशीधर उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन रंजना गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रो. बलिराज पांडेय, प्रो. अखिलेश कुमार, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, प्रो. मनोज सिंह, डॉ. प्रभाकर सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
हिंदी विभाग के सेमिनार हाल में आयोजित समारोह में मदन कश्यप ने कहा कि आज अधिकांश कवियों में राजनीतिक उदासीनता आती जा रही है, लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ल की सांस्कृतिक चेतना में एक राजनीतिक अंतरधारा मौजूद है। सत्ता जिन चीजों के बारे में जितना चाहती है उतना ही हम सोचने लगे हैं। अध्यक्षता करते हुए कवि ज्ञानेंद्र पति ने प्रो. शुक्ल के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कविता को गद्य के निकटतम बिंदु तक ले जाने की कोशिश की है। ज्ञानेंद्र पति ने पक्का महाल पर लिखी कविताओं को श्रेष्ठ बताया। इस दौरान प्रो. वशिष्ठ अनूप, कवि कृष्णमोहन झां, डॉ. रामाज्ञा शशिधर, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. विंध्याचल यादव ने कविता संग्रह के बारे में अपने विचार रखे। अतिथियाें का स्वागत शोध छात्र जगन्नाथ दूबे, संचालन डॉ. वंशीधर उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन रंजना गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रो. बलिराज पांडेय, प्रो. अखिलेश कुमार, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, प्रो. मनोज सिंह, डॉ. प्रभाकर सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन