#Corona से बचाव के लिए पूर्वांचल के लिए मेडिकल हब बनेगा बीएचयू
कोरोना संक्रमण के खिलाफ जारी जंग में शासन की नई गाईडलाइन के बाद बीएचयू पूर्वांचल सभी जिलों के लोगों के लिए कोरोना संक्रमण की जांच का भी हब बन गया है। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर अब प्रदेशभर के जनप्रतिनिधि अब बीएचयू और एएमयू को विधायक निधि से दो करोड़ रुपये तक का अनुदान दे सकेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो कोरोना जांच और उसके इलाज के लिए बीएचयू के पास पर्याप्त संसाधन मिल जाएंगे।
फिलहाल राज्यमंत्री (स्वत्रन्त्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी के अनुदान के बाद जांच की दो और मशीनें बीएचयू पहुंच चुकी है। शासन की ओर से इसके लिए 31 मार्च को नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इस नए आदेश के बाद बीएचयू में और एमयू में कोरोना से बचाव के लिए अपनी निधि 2 करोड़ 40 लाख रुपये में 40 लाख रुपये जीएसटी का छोड़कर बाकी पूरा दो करोड़ रुपया कोरोना से बचाव के लिए संसाधन में खर्च कर सकते हैं।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जहां पीजीआई और एम्स में विधायक निधि दी जा रही थी, मगर बीएचयू और एएमयू को इससे अलग रखा गया था। हालांकि इससे पहले आईएमएस बीएचयू में कोरोना के संदिग्धों के सैंपल की जांच के लिए पिछले दिनों राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी ने 33 लाख रुपए का अनुदान नई मशीनों के लिए दिया था।
जिसके बाद माइक्रोबायोलॉजी लैब में दो नई मशीनें भी आ गई हैं। इन मशीनों के आने के बाद से अब दिन भर में जरूरत पड़ने पर कोरोना के 100 से अधिक सैंपल की जांच आसानी से हो सकेगी। ग्राम विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में बताया है कि अब कोरोना वायरस के बचाव के लिए जनप्रतिनिधि बीएचयू और एएमयू को भी धनराशि दे सकेंगे।
इसके साथ ही फागिंग और सैनिटाइजेशन के लिए भी विकास निधि से मदद की जा सकेगी। शासन के इस आदेश के बाद अब बीएचयू और एमयू में कोरोना से बचाव को लेकर उपकरण सहित अन्य जरूरी सामानों के लिए जनप्रतिनिधि धनराशि दे सकेंगे।
कोरोना संदिग्धों और मरीजों के लिए बीएचयू में कई तरह के प्रयास जारी हैं। फिलहाल पूर्वांचल के 21 जिलों के कोरोना संदिग्ध की जांच के लिए बीएचयू ही विकल्प है। ऐसे में इन सभी जिलों के जनप्रतिनिधियों से बीएचयू को उम्मीद है।
दरअसल, सपा एमएलसी ने उठाई थी मांग सपा एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इन दोनों संस्थानों का नाम भी विधायक निधि मार्ग निर्देशिका में शामिल करने की मांग की थी। एमएलसी ने अपने पत्र में 26 मार्च के शासनादेश का हवाला देते हुए बताया था कि पीजीआई और एम्स को विधायक निधि से धनराशि उपकरण आदि के लिए दिया जा रहा है। लेकिन बीएचयू और एएमयू का नाम विधायक निधि मार्ग निर्देशिका में न होने से जनप्रतिनिधि मदद नही कर पा रहे हैं।