BHU: 531 सुपर रिसर्चर, बिना JRF मिले 4.46 करोड़; अंतरराष्ट्रीय रिसर्च की गुणवत्ता से हर एक छात्र को 84-84 हजार
Varanasi News: विज्ञान के छात्रों के रिसर्च टॉप उच्च गुणवत्ता वाले क्यू-1 और क्यू-2 के जर्नल, वहीं ह्यूमैनिटीज विषयों के रिसर्च क्यू-3 और क्यू-4 जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं।
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बीएचयू में बिना जेआरएफ वाले 531 छात्र सुपर रिसर्चर के तौर पर पहचाने गए हैं। ये सभी पीएचडी छात्र हैं। इनकी रिसर्च गुणवत्ता के लिए बीएचयू ने 4.46 करोड़ से ज्यादा धन दे दिया है। पिछले तीन वर्ष से ऐसे शोध छात्रों को पहचान कर धनराशि भेजी जा रही है। इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (आईओई) फंड के तहत हर एक को 84 हजार रुपये दिए गए हैं।
इन 531 में से 65 फीसदी से ज्यादा विज्ञान, पर्यावरण संस्थान और कृषि विज्ञान संस्थान के शोध छात्र हैं, बाकी 40 फीसदी में आईएमएस, आयुर्वेद, कला संकाय, सामाजिक विज्ञान, दृश्य कला, मंच कला आदि संकायों के शोध छात्र हैं।
ये सुपर रिसर्चर पिछले तीन साल में तैयार किए गए हैं। इनमें से 136 पीएचडी स्कॉलर्स ऐसे हैं जो सत्र 2024-25 में इस कैटेगरी में शामिल किए गए हैं। इनमें विज्ञान और कृषि विज्ञान से 93 और 43 छात्र शेष विषयों से हैं।
कम से कम एक रिसर्च उच्च गुणवत्ता के जर्नल में प्रकाशित: बीएचयू के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से ये डेटा एकत्र किया गया है। प्रकोष्ठ के प्रमुख प्रो. भास्कर भट्टाचार्य ने बताया कि इस प्रोत्साहन के पीछे वजह ये है कि इन छात्रों ने कम से कम अपना एक रिसर्च अंतरराष्ट्रीय स्तर के उच्च गुणवत्ता वाले जर्नल में प्रकाशित कराया है।
2024 तक 395 को मिली धनराशि
प्रो. भट्टाचार्य ने बताया कि 2022 से 2024 तक 395 पीएचडी छात्रों को ये धनराशि दी चुकी है। वहीं, उसके बाद 2025 से लेकर अब तक 136 शोधकर्ताओं को ये सहायता मिली है। बीएचयू ने मार्च 2022 में इंसेंटिव टू रिसर्च स्कॉलर्स स्कीम की शुरुआत की थी। इसके तहत रिसर्च करने वाले छात्रों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहन धनराशि देना था। बीएचयू की ओर से ये धनराशि नॉन नेट फेलोशिप के तहत दी जा रही है। जो छात्र पहले से जेआरएफ के तहत फेलोशिप लेकर बीएचयू में रिसर्च कर रहे हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है।