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बीएचयू में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से फिर तनाव, पुलिस फोर्स तैनात, इस बार ये है मामला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 28 Nov 2018 10:17 AM IST
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बीएचयू के सिंह द्वार पर छात्रों से बात करतीं चीफ प्रॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू विधि संकाय के छात्र एक बार फिर से प्रवेश पत्र जारी करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। दोपहर में उन्होंने केंद्रीय कार्यालय पर धरना दिया और प्रवेश पत्र जारी करने की मांग की। कुलसचिव से मिलने के बाद भी जब उनकी बात नहीं बनी तो सिंह द्वार पर धरने पर बैठ गए। यहां पर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और विधि संकाय के डीन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि जब तक उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती वो धरने पर बैठे रहेंगे।
दरअसल विधि संकाय के करीब 120 छात्राें की उपस्थिति 75 फीसदी से कम होने की वजह से उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। उन्हें प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया है। छात्रों का आरोप है कि हमारी कक्षाएं कम चली हैं। इस वजह से ही हमारी उपस्थिति कम है।
हालांकि बताया ये भी जा रहा है कि कुछ छात्रों की उपस्थिति जीरो प्रतिशत है। करीब 20 ऐसे छात्र हैं जिन्होंने एक ही नर्सिंग होम से मेडिकल बनवाकर संकाय में जमा किया है। सिंह द्वार पर धरने पर बैठे छात्रों को समझाने के लिए चीफ प्राक्टर प्रो. रोयना सिंह पहुंची लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उधर, छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सिंह द्वार के बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। छात्रों का धरना जारी है।
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दरअसल विधि संकाय के करीब 120 छात्राें की उपस्थिति 75 फीसदी से कम होने की वजह से उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। उन्हें प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया है। छात्रों का आरोप है कि हमारी कक्षाएं कम चली हैं। इस वजह से ही हमारी उपस्थिति कम है।
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हालांकि बताया ये भी जा रहा है कि कुछ छात्रों की उपस्थिति जीरो प्रतिशत है। करीब 20 ऐसे छात्र हैं जिन्होंने एक ही नर्सिंग होम से मेडिकल बनवाकर संकाय में जमा किया है। सिंह द्वार पर धरने पर बैठे छात्रों को समझाने के लिए चीफ प्राक्टर प्रो. रोयना सिंह पहुंची लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उधर, छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सिंह द्वार के बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। छात्रों का धरना जारी है।
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आईआईटी बीएचयू की दो छात्राओं को नोटिस
बीते 23 सितंबर को एमएमवी गेट पर प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में आईआईटी बीएचयू की दो छात्राआें को नोटिस दिया गया है। आईआईटी बीएचयू प्रशासन ने ये कार्रवाई बीएचयू चीफ प्राक्टर की शिकायत पर की है। दोनों छात्राओं को 29 नवंबर को स्टैंडिंग डिस्प्लिनरी कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है।
आईआईटी बीएचयू के सेरामिक इंजीनियरिंग की चतुर्थ वर्ष की छात्रा वंदना कुमारी और मेकैनिकल इंजीनियरिंग की छात्रा इप्शिता को असिस्टेंट रजिस्ट्रार की ओर से नोटिस जारी किया गया है। ये दोनों छात्राएं आईआईटी बीएचयू में छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले संगठन स्टूडेंट फॉर चेंज (एसएफसी) से जुड़ी हैं।
नोटिस मिलने के बाद छात्राओं ने आईआईटी प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की है। उनका कहना है कि अपने हक के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर प्रशासन ने नोटिस जारी कर उनके अधिकारों का हनन किया है। छात्राओं ने नोटिस में आचरण पर सवाल उठाने पर भी आपत्ति जताई है।
बताया कि बीएचयू में पिछले साल सितंबर में छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पर कार्रवाई तो हो गई, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जिन्होंने एमएमवी गेट पर छात्र-छात्राओं पर हमला किया था। हमलावरों पर नामजद मुकदमा होने के बाद भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया। छात्राओं ने बीएचयू और आईआईटी प्रशासन से तत्काल नोटिस वापस लेने की मांग की है।
आईआईटी बीएचयू के सेरामिक इंजीनियरिंग की चतुर्थ वर्ष की छात्रा वंदना कुमारी और मेकैनिकल इंजीनियरिंग की छात्रा इप्शिता को असिस्टेंट रजिस्ट्रार की ओर से नोटिस जारी किया गया है। ये दोनों छात्राएं आईआईटी बीएचयू में छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले संगठन स्टूडेंट फॉर चेंज (एसएफसी) से जुड़ी हैं।
नोटिस मिलने के बाद छात्राओं ने आईआईटी प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की है। उनका कहना है कि अपने हक के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर प्रशासन ने नोटिस जारी कर उनके अधिकारों का हनन किया है। छात्राओं ने नोटिस में आचरण पर सवाल उठाने पर भी आपत्ति जताई है।
बताया कि बीएचयू में पिछले साल सितंबर में छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पर कार्रवाई तो हो गई, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जिन्होंने एमएमवी गेट पर छात्र-छात्राओं पर हमला किया था। हमलावरों पर नामजद मुकदमा होने के बाद भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया। छात्राओं ने बीएचयू और आईआईटी प्रशासन से तत्काल नोटिस वापस लेने की मांग की है।