फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   BHU Silver Jubilee was historical

ऐतिहासिक था बीएचयू का रजत जयंती समारोह

Fri, 20 Jan 2017 01:37 PM IST
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 20 Jan 2017 01:37 PM IST
विज्ञापन
BHU Silver Jubilee was historical
मदन मोहन मालवीय

21 जनवरी 1942, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद का दूसरा स्वर्णिम ऐतिहासिक दिन। बृहस्पतिवार को रजत जयंती के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। वसंत पंचमी के दिन 75 साल पहले जिस उत्साह और जोश के साथ विश्वविद्यालय की रजत जयंती मनाई गई, वह गरिमा और भव्यता आज भी यादगार है। उस वक्त का आयोजन न सिर्फ विश्वविद्यालय, बल्कि भारत के शैक्षणिक इतिहास में अनूठा था। 

विज्ञापन



विश्वविद्यालय की रजत जयंती के साक्षी स्वयं महामना तो थे ही, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित गोविंद वल्लभ पंत, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, डॉ. संपूर्णानंद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सरोजनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉ. जाकिर हुसैन, सीवी रमन आदि भी आयोजन के साक्षी बने।
विज्ञापन


लंदन, ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज, ग्लास्गो, ओटावा समेत देश भर के अन्य विश्वविद्यालयों के विद्वतजनों के साथ-साथ देश भर के राजा-महाराजाओं ने भी समारोह में शिरकत की थी।  रजत जयंती समारोह के उपलक्ष्य में 18 जनवरी से ही यज्ञ, पूजा पाठ शुरू हो गए थे। 21 जनवरी को उस वक्त कुलपति रहे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन ने गीता पर विशिष्ट व्याख्यान दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रो. श्यामाचरण डे के नेतृत्व में विश्वविद्यालय से विशाल जुलूस निकला। जुलूस ने पहले मालवीय भवन के सामने महामना और महात्मा गांधी का दर्शन किया और फिर शिलान्यास स्थल तक गया। ये परंपरा दो साल पहले फिर से शुरू की गई है। एंफीथिएटर मैदान में आयोजित रजत जयंती समारोह में पंडाल में 30 हजार तो बाहर लाखों का जनसमूह था। 

पूर्व शिक्षा निदेशक श्रीनिवास शर्मा ने लिखा है कि इस समारोह में हजारों लोग कई मील दूर से चलकर गांवों से आए थे। जब माइक पर घोषणा हुई कि मालवीय जी, महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू पंडाल में आ रहे हैं, जन समुदाय उन्हें देखने को अधीर हो उठा। इससे भगदड़ मच गई।


लोग एक-दूसरे पर गिरने-पड़ने लगे। नेहरू जी ने मेज पर चढ़कर सभी को रुकने को कहा लेकिन स्थिति जस की तस रही। तब मालवीय जी ने माइक संभाला। ये मालवीय जी की दिव्य वाणी का जादू था कि जो जहां था वहीं खड़ा रहा और दो घंटे ये उत्सव यज्ञ चलता रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed